जिन्हें राम मंदिर चंदा चोरी से फर्क नहीं पड़ता, उन्हें दुनिया की कोई चीज शर्मिदा नहीं कर सकती: HC

पीटीआई, प्रयागराज
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार को लेकर अहम टिप्पणियां कीं। HC ने कहा कि भारत के लोगों ने भ्रष्टाचार को सामान्य मान लिया है और जब तक कोई पकड़ा नहीं जाता, तब तक इसे गलत नहीं मानता।

Allahabad High Court says Nothing can shame people unfazed by Ram temple donation theft
जिन्हें राम मंदिर चंदा चोरी से फर्क नहीं, उन्हें कोई शर्मिंदा नहीं कर सकता: HC

अयोध्या के राम मंदिर में चंदे की हेराफेरी के मामले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा है कि जो लोग राम मंदिर में चंदे की चोरी जैसी घटना से भी बेपरवाह और बेफिक्र हैं, उन्हें अब दुनिया की कोई चीज शर्मिंदा नहीं कर सकती। यही नहीं जस्टिस श्रीधरन ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए जाने वालों को मौत की सजा देने का भी सुझाव दिया है।

उत्तर प्रदेश सरकार के बुलडोजर एक्शन पर अपनी राय रखते हुए जस्टिस श्रीधरन ने भारत के कई संस्थानों में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार की कड़े शब्दों में आलोचना की। राम मंदिर में दान की चोरी के मामले का जिक्र करते हुए जस्टिस के. एस. श्रीधरन ने कहा, "राम मंदिर में दान की चोरी का मामला तो हद ही पार कर गया। अगर राम मंदिर जैसी पवित्र जगह पर हुई चोरी भी लोगों को शर्मिंदा नहीं कर सकती, तो फिर शायद कोई भी घटना उन्हें शर्मिंदा नहीं कर सकती। यह दिखाता है कि ईमानदारी का स्तर कितना गिर चुका है।”

'भ्रष्टाचार हो गया है सामान्य'

जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि भारत के लोगों ने भ्रष्टाचार को सामान्य मान लिया है और जब तक कोई पकड़ा नहीं जाता, तब तक इसे गलत नहीं मानता। उन्होंने कहा कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2025 रिपोर्ट में 182 देशों की सूची में भारत 91वें स्थान पर है लेकिन यह तथ्य भी हमें शर्मिंदा नहीं करता। समाज में भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताते हुए HC ने सुझाव दिया कि अगर राज्य सरकार सचमुच भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहती है, तो उसे 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' में संशोधन कर दोषियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान करने पर विचार करना चाहिए।

जस्टिस श्रीधरन ने चेतावनी दी कि देश में बेलगाम भ्रष्टाचार से कुछ ही लोगों के हाथों में बेहिसाब पैसा होगा। इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई चौड़ी होगी। यह स्थिति आने वाले दिनों में देश में अशांति और असंतोष की कहानी लिख रही है। जस्टिस श्रीधरन ने ये टिप्पणियां 51 पन्नों के अपने एक फैसले में की। यह मामला सरकार के बुलडोजर एक्शन से जुड़ा था। इस मामले में अदालत के दो जजों की राय अलग-अलग थी।

बुलडोजर जस्टिस' की आदत?

जस्टिस श्रीधरन ने अपने फैसले में कहा कि किसी अपराध के तुरंत बाद मकान को ढहा देना 'बुलडोजर जस्टिस' की आदत से पकी समाज की 'खून की प्यास' को शांत करने के लिए किया जाता है। उन्होंने जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बावजूद बिना किसी डर के तोड़फोड़ जारी है। इससे ऐसा लगता है, मानो ये फैसले अस्तित्व में ही नहीं हैं या राज्य को यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों की अवहेलना का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अवैध निर्माणों पर राय देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी मकान रातों-रात खड़ा नहीं हो जाता। बिल्डर को संरक्षण मिलने और रिश्वतखोरी के कारण जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंद लेते हैं। इसका खामियाजा दशकों बाद उस आम खरीदार को भुगतना पड़ता है जिसे अचानक बेदखली का सामना करना पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी अवैध बिल्डिंगों को पानी और बिजली जैसी सरकारी सुविधाएं देकर सरकार भी इस अपराध में बराबर का भागीदार बन जाती है।

Jagriti Kumari

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Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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