TVK के सभी 108 MLA दे देंगे इस्तीफा, अगर DMK-AIADMK ने की सरकार गठन की कोशिश; तमिलनाडु में नया ट्विस्ट

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई
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Tamil Nadu Political Twist: TVK सूत्रों के मुताबिक, अगर डीएमके या एआईएडीएमके राज्य में नई सरकार बनाने का दावा करती हैं तो टीवीके के सभी 108 विधायक इस्तीफा दे देंगे।

TVK के सभी 108 MLA दे देंगे इस्तीफा, अगर DMK-AIADMK ने की सरकार गठन की कोशिश; तमिलनाडु में नया ट्विस्ट

Tamil Nadu Political Twist: दक्षिणी राज्य तमिलनाडु की राजनीति में नया ट्विस्ट आ गया है। विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने चेतावनी दी है कि अगर DMK और AIADMK ने राज्य में में नई सरकार बनाने की कोशिश की तो उसके सभी 108 विधायक इस्तीफा दे देंगे। सूत्रों के हवाले से NDTV की रिपोर्ट में कहा गया है कि TVK ने यह फैसला आज DMK और AIADMK खेमों में हुई दो अहम बैठकों के ठीक बाद लिया है। TVK ने गुरुवार शाम चेतावनी दी है कि अगर दोनों द्रविड़ पार्टियों में से कोई भी यानी एम.के. स्टालिन की DMK या ई. पलानीस्वामी की AIADMK, ने तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश करने की कोशिश की तो पार्टी के सभी विधायक इस्तीफा दे देंगे।

बता दें कि हालिया चुनावों में TVK ने 108 सीटें जीती हैं जिनमें से दो सीटें खुद विजय ने जीती हैं। इस लिहाज से उसके पास कुल 107 विधायक हैं। पार्टी का तर्क है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते, राज्यपाल को सरकार बनाने के लिए उनके नेता विजय को आमंत्रित करना चाहिए लेकिन अभी तक राज्यपाल ने ऐसा नहीं किया है। हालांकि, दो दिनों में दो बार थलापति विजय राज्यपाल से मिल चुके हैं और सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैं। बावजूद इसके राज्यपाल ने उन्हें न्योता नहीं दिया बल्कि 118 विधायकों के समर्थन का पत्र मांगा है।

विजय के पास 113 विधायक

दरअसल टीवीके ने 23 अप्रैल को हुए चुनावों में 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीट जीतीं और वह सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। हालांकि, पांच विधायकों वाली कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन दिया है, लेकिन अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली पार्टी सदन में बहुमत के 118 के आंकड़े से अब भी कुछ सीट दूर है। इस बीच, टीवीके नेता सीटीआर निर्मल कुमार ने आज चेन्नई में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के प्रदेश सचिव एम वीरपांडियन और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव पी शनमुगम से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु में सरकार गठन में दोनों दलों का समर्थन मांगा और सत्ता में हिस्सेदारी पर जोर दिया लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी दल ने TVK को समर्थन नहीं दिया है।

CPM ने की विजय की तरफदारी

इस बीच, DMK सूत्रों ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष और निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बैठक में वामपंथी दलों सहित गठबंधन दलों के नेताओं को अपनी इच्छा व्यक्त की कि उन्हें धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन का हिस्सा बने रहना चाहिए। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने बृहस्पतिवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करते हुए टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का आह्वान किया, क्योंकि वह त्रिशंकु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है।

गवर्नर पर सवाल

तमिलनाडु में राजनीतिक गतिरोध पर माकपा महासचिव ने तर्क दिया कि स्पष्ट बहुमत के अभाव में या चुनाव पूर्व गठबंधन के बहुमत तक न पहुंचने की स्थिति में, संवैधानिक परंपरा के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी के नेता को (सरकार में) शपथ दिलायी जानी चाहिए। उन्होंने 1996 में भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी को दिए गए निमंत्रण का उदाहरण दिया। बेबी ने निमंत्रण में देरी पर सवाल उठाते हुए कहा, ''राज्यपाल का कार्यालय संदेह से परे होना चाहिए।'' उन्होंने मांग की कि टीवीके नेता विजय को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए उचित समय दिया जाए।

गवर्नर के बचाव में उतरी भाजपा

इस बीच, भाजपा प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने दावा किया कि सरकार गठन से संबंधित सभी प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से होगी और राज्यपाल नियमों का पालन करेंगे। भाजपा नेता ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि राजभवन या राज्यपाल को लेकर कोई भ्रम है। वह (राज्यपाल) संविधान के अनुसार कदम उठाएंगे। वह नियमों का पालन करेंगे।'' दूसरी तरफ, टीवीके के कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल आर्लेकर से पार्टी प्रमुख विजय को सरकार बनाने की अनुमति देने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को लोक भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि टीवीके 108 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और संविधान के अनुसार, विजय को सरकार बनाने के लिए बुलाना राज्यपाल का कर्तव्य है।

कांग्रेस पर भड़की DMK

इस बीच, DMK ने पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन से कांग्रेस के अलग होने की कड़ी आलोचना की और उस पर ''पीठ में छुरा घोंपने'' और तमिलनाडु के साथ ''विश्वासघात'' करने का आरोप लगाया। DMK ने कहा कि दूसरी तरफ पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने परिपक्वता और जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार का परिचय दिया है। पार्टी अध्यक्ष और निवर्तमान मुख्यमंत्री स्टालिन ने द्रमुक के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पारित एक प्रस्ताव में कांग्रेस के ''अवसरवादी राजनीतिक झुकाव'' की कड़ी आलोचना की गई।

प्रस्ताव में कहा गया, ''कांग्रेस ने तमिलनाडु में हमारे साथ वही किया है जो भाजपा कई राज्यों में करती है। यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी ने अपना पुराना चरित्र नहीं बदला है। हमारे गठबंधन में कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट और 28 विधानसभा सीटें आवंटित की गई थीं। उसने तीन दिनों के भीतर ही एक अन्य पार्टी को समर्थन देकर अपने पुराने गठबंधन सहयोगियों की कड़ी मेहनत से हासिल की गई जीत को खतरे में डाल दिया।'' (भाषा इनपुट्स के साथ)

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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