
Ajit Pawar Plane Crash: संसदीय समिति ने एक महीना पहले ही दी थी वार्निंग, रिपोर्ट में क्या-क्या
संसदीय पैनल ने चार्टर विमानों के संचालन को लेकर कई गंभीर मुद्दे उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कई चार्टर ऑपरेटर बहुत छोटी तकनीकी और सुरक्षा टीमों के साथ काम करते हैं, जिससे विमान के रखरखाव और निगरानी पर असर पड़ता है।
Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की बुधवार को बारामती में एक विमान दुर्घटना में हुई दुखद मृत्यु ने देश को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन इस हादसे के बाद अब उन चेतावनियों पर बहस छिड़ गई है, जिन्हें कुछ महीने पहले ही संसद में उठाया गया था। एक संसदीय स्थायी समिति ने पिछले साल अगस्त में ही भारत के नागरिक उड्डयन सुरक्षा ढांचे, विशेषकर निजी और चार्टर विमानों के संचालन में गंभीर कमियों को लेकर आगाह किया था।
जेडीयू सांसद संजय झा की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि भारत में विमानन क्षेत्र का विस्तार तो तेजी से हो रहा है, लेकिन सुरक्षा निगरानी की क्षमता उस गति से नहीं बढ़ रही है। रिपोर्ट में एक बड़ा अंतर स्पष्ट किया गया था। कमर्शियल एयरलाइंस कड़े वैश्विक मानकों का पालन करती हैं, वहीं निजी जेट और चार्टर सेवाओं में नियमों का पालन बहुत ही लचीला और असमान है।
किन जोखिमों पर किया था इशारा?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संसदीय पैनल ने चार्टर विमानों के संचालन को लेकर कई गंभीर मुद्दे उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कई चार्टर ऑपरेटर बहुत छोटी तकनीकी और सुरक्षा टीमों के साथ काम करते हैं, जिससे विमान के रखरखाव और निगरानी पर असर पड़ता है। बड़े विमानों के पास प्रतिकूल मौसम में फैसले लेने के लिए 'ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर' होते हैं, लेकिन छोटे और निजी ऑपरेटरों के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती। रिपोर्ट में मांग की गई थी कि इनके सुरक्षा मानक भी कमर्शियल विमानों के बराबर होने चाहिए।
समिति ने सुझाव दिया था कि डीजीसीए (DGCA) को चार्टर ऑपरेटरों के औचक निरीक्षण और सख्त ऑडिट करने चाहिए, ताकि सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई कोताही न हो। रिपोर्ट में केवल निजी ऑपरेटरों को ही नहीं, बल्कि नियामक संस्था डीजीसीए को भी कटघरे में खड़ा किया गया था। पैनल ने कहा था कि डीजीसीए अत्यधिक काम के बोझ तले दबा है और स्टाफ की कमी के कारण वह केवल घटनाओं के बाद रिएक्ट करता है, जबकि उसे भविष्य के खतरों को भांपने के लिए सक्रिय होना चाहिए।
इसके अलावा एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बारे में चेतावनी दी गई थी कि व्यस्त हवाई अड्डों पर कंट्रोलर्स पर भारी तनाव है। थकान और वर्कलोड के कारण मानवीय चूक की संभावना बढ़ रही है। रिपोर्ट में जल्द भर्ती और संचार प्रणालियों के आधुनिकीकरण की वकालत की गई थी।
समिति ने पुरानी दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए कहा था कि अक्सर जांच रिपोर्टों की सिफारिशें केवल कागज पर रह जाती हैं। छोटे हवाई अड्डों पर बुनियादी ढांचे, जैसे रनवे सुरक्षा क्षेत्र और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को अपग्रेड करने की सख्त जरूरत है।





