इन देशों में लीगल है गांजा, फूंककर फ्लाइट उड़ा रहे पायलट? एयर इंडिया कांड ने खोली पोल

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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थाइलैंड और एम्स्टर्डम में गांजा लीगल होने से एयरलाइंस की चिंता बढ़ गई है। एयर इंडिया फुकेत फ्लाइट जांच के बाद रैंडम डोप टेस्ट और सख्त डीजीसीए नियमों पर चर्चा तेज हो गई है। जानिए पूरी रिपोर्ट।

एयर इंडिया फुकेत केस: थाइलैंड में आसानी से मिल रहा गांजा बना आफत, जानिए DGCA के क्या हैं नियम
एयर इंडिया फुकेत केस: थाइलैंड में आसानी से मिल रहा गांजा बना आफत, जानिए DGCA के क्या हैं नियम (तस्वीर- AI जनरेटेड)

कुछ देश ऐसे हैं जहां गांजा पीना कानूनी तौर पर लीगल है। लेकिन यही कानूनी वैधता अब दुनियाभर की एयरलाइंस के लिए सिरदर्द बन चुकी है। खासतौर से एयर इंडिया कांड के बाद ये टेंशन और भी बढ़ गई है। दरअसल एयर इंडिया का जो विमान 4 अगस्त को हवा में अचानक 300 फीट नीचे गिर गया था, उसका मुख्य पायलट नशीले पदार्थ के सेवन के लिए किए गए स्क्रीनिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है। बताया जा रहा है कि उसने कथिततौर पर गांजा फूंका था। एयर इंडिया की फ्लाइट एआई 2379 थाइलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही थी।

थाइलैंड और एम्स्टर्डम जैसी जगहों पर गांजा के मेडिकल और मनोरंजक इस्तेमाल को कानूनी मान्यता मिली हुई है। लेकिन इन देशों की यही छूट अब वहां उड़ान भरने वाली एयरलाइंस कंपनियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गई है। एयर इंडिया की फुकेत फ्लाइट की जांच के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में है। दरअसल, फ्लाइट क्रू मेंबर्स के शराब पीने की जांच 'ब्रेथ एनालाइजर' टेस्ट के जरिए आसानी से हो जाती है, लेकिन गांजा या अन्य साइकोएक्टिव (दिमाग पर असर डालने वाले) पदार्थों के सेवन का पता लगाना एयरलाइंस के लिए एक बेहद मुश्किल और पेचीदा काम है।

शराब से ज्यादा समय तक शरीर में रहता है असर

विभिन्न एयरलाइंस के अधिकारियों का कहना है कि फ्लाइट क्रू मेंबर्स को नशीले पदार्थों के सेवन से रोकने का एकमात्र तरीका 'रैंडम डोप टेस्टिंग' को बढ़ाना है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शराब की तुलना में ये साइकोएक्टिव पदार्थ शरीर में बहुत अधिक समय तक मौजूद रहते हैं। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन (ICAO) के अनुसार, किसी भी साइकोएक्टिव पदार्थ के प्रभाव में फ्लाइट ऑपरेट करने से पायलट और अन्य लाइसेंस प्राप्त कर्मचारी सुरक्षित और सही ढंग से अपनी ड्यूटी करने में असमर्थ हो सकते हैं।

जब पायलट ने हवा में बंद कर दिए थे इंजन

इस तरह के खतरे का सबसे खौफनाक मामला एक अमेरिकी एयरलाइन में देखने को मिला था। यहां ड्यूटी पर तैनात नहीं होने के बावजूद एक पायलट कॉकपिट के पीछे 'जंप सीट' यानी पायलट के पीछे वाली अतिरिक्त सीट पर यात्रा कर रहा था। उस ऑफ-ड्यूटी पायलट ने उड़ान के दौरान अचानक विमान के इंजन को बंद करने की कोशिश की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस पायलट ने घटना से दो दिन पहले 'साइकेडेलिक मशरूम' लिया था और वह 48 घंटे से सोया नहीं था।

अधिकारियों का कहना है कि यह विश्व स्तर पर एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि हाल ही में किए गए ड्रग्स के सेवन तो जांच में पकड़ में आ जाते हैं, लेकिन कई बार जांच के नतीजे उलझाऊ होते हैं।

डीजीसीए के क्या हैं नियम?

एविएशन कर्मियों के जांच नियमों के तहत, अगर किसी कर्मचारी का 'कन्फर्मेटरी टेस्ट' पॉजिटिव आता है, तो संस्था के मेडिकल इंचार्ज को एक 'मेडिकल रिव्यू ऑफिसर' से सलाह लेनी होती है।

दवाइयों से भी आ सकता है पॉजिटिव रिजल्ट

रिव्यू ऑफिसर यह पता लगाता है कि टेस्ट पॉजिटिव आने की वजह कोई वैध इलाज तो नहीं है। उदाहरण के लिए, कोडीन युक्त दर्द निवारक दवा लेने से भी 'ओपिएट्स' के लिए टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव आ सकता है।

हर साल 10% की जांच जरूरी

डीजीसीए के नियमों के तहत, सभी शेड्यूल्ड कमर्शियल एयरलाइंस और एयर नेविगेशन सर्विस प्रोवाइडर्स को हर साल अपने कम से कम 10% फ्लाइट क्रू मेंबर्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का डोप टेस्ट करना अनिवार्य है।

कड़े कदम उठाने की मांग

ज्यादातर एयरलाइंस अपनी तरफ से जागरूकता फैलाने की कोशिश करती हैं। वे कर्मचारियों को बिना अपनी पहचान बताए 'सेल्फ-रिपोर्टिंग' के जरिए अपनी लत के बारे में बताने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, ताकि उन्हें नशे से मुक्ति दिलाई जा सके। लेकिन अधिकारी मानते हैं कि लोग बदनामी के डर से ऐसा करने से बचते हैं, जिससे यह योजना पूरी तरह नाकाम ही रहती है।

भारत में फिलहाल मुख्य फोकस 'सेल्फ-रिपोर्टिंग' और नशामुक्ति पर ही है। हालांकि, कई एयरलाइंस का संचालन देख रहे एक अधिकारी का कहना है, "साइकोएक्टिव पदार्थों की आसान उपलब्धता को देखते हुए, हमें इसके परिणाम थोड़े सख्त करने होंगे ताकि एक डर पैदा हो सके। हमें रैंडम टेस्टिंग बढ़ानी ही होगी, इससे निपटने का बस यही एकमात्र रास्ता है।"

किन देशों में लीगल है गांजा?

हालांकि गांजा का एंटरटेनमेंट के लिए इस्तेमाल पूरी तरह कानूनी रूप से कुछ चुनिंदा देशों में ही अनुमति प्राप्त है। इनमें प्रमुख रूप से कनाडा और उरुग्वे शामिल हैं, जहां इसे व्यावसायिक बिक्री के साथ पूरी तरह वैध किया गया है। यूरोप में जर्मनी, माल्टा, लक्जमबर्ग और चेक गणराज्य में वयस्कों के लिए सीमित मात्रा में रखने, घर पर उगाने और कुछ मामलों में क्लबों के माध्यम से प्राप्त करने की अनुमति है। दक्षिण अफ्रीका और जॉर्जिया में भी निजी इस्तेमाल और खेती कानूनी मानी गई है। अमेरिका में संघीय स्तर पर प्रतिबंधित होने के बावजूद कई राज्यों में यह कानूनी है, जबकि नीदरलैंड में कॉफीशॉप्स में बिक्री को मान्य किया जाता है, हालांकि पूरी तरह वैध नहीं है। अधिकांश अन्य देशों में यह या तो केवल चिकित्सकीय उपयोग के लिए अनुमति है, या पूरी तरह अवैध है।

Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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