अब भी नींद नहीं आती; एयर इंडिया प्लेन क्रैश के सबसे 'खुशनसीब इंसान' का दर्द

लाइव हिन्दुस्तान, अहमदाबाद
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अहमदाबाद के एयर इंडिया क्रैश में 241 यात्रियों की मौत हो गई। हादसे में सिर्फ एक यात्री विश्वास कुमार रमेश की जान बच पाई। रमेश बताते हैं कि वह अभ भी ठीक से सो नहीं पाते हैं।

अब भी नींद नहीं आती; एयर इंडिया प्लेन क्रैश के सबसे 'खुशनसीब इंसान' का दर्द

2025 में 12 जून की दोपहर जब आसमान में उड़ान भरने की कोशिश करते हुए अहमदाबाद एयरपोर्ट से चंद कदम दूर ही एयर इंडिया का विमान जमीन पर आ गिरा तो आग की लपटें और धुएं का गुबार आसमान तक छा गया। तभी एक ऐसा दृश्य भी दिखा जिसे लोग अब भी चमत्कार मानते हैं। खौफनाक हादसे से बचकर निकले विश्वास कुमार रमेश को भी यह यकीन नहीं हो रहा था कि वह जिंदा हैं। लंदन के लिए उड़ान भरने वाले AI-171 में कुल 241 यात्री थे जिसमें सिर्फ उनकी जान ही बच पाई थी। लेकिन जिस विश्वास कुमार को सबसे 'खुशनसीब इंसान' कहा जाता है, वह कई तरह के दर्द के साथ उस भयानक हादसे की डरावनी यादों से जूझ रहे हैं।

हादसे के एक साल बाद कुमार कहते हैं कि हादसे में भले ही उनकी जान बच गई, लेकिन वह अब भी कई तरह की मुश्किलों से घिरे हुए हैं। उन्हें आज भी रातों को नींद नहीं आती। प्लेन क्रैश के डरावने दृश्य अब भी उनकी आंखों के सामने रहते हैं और मन में घबराहट बेचैनी होती है। रमेश ने हादसे की पहली बरसी पर कहा, 'लोग देखते हैं कि मैं बच गया, लेकिन वे बंद दरवाजे के पीछे क्या चुनौतियां होती हैं वे उन्हें नहीं पता। मैं अब भी नींद के लिए संघर्ष करता हूं और बुरी यादों की वजह से एंग्जाइटी रहती हैं।'

विश्वास कुमार रमेश एयर इंडिया हादसे में बचने वाले इकलौते यात्री थे।

जून 2025 की वह घटना कुछ ही सेकेंड्स में हो गई, लेकिन कुमार कहते हैं कि इसका असर उनकी जिंदगी पर हर दिन होता है। अहमदाबाद-लंदन की यह फ्लाइट उस दिन उड़ान के कुछ पल बाद ही बीजेपी मेडिकल कॉलेज कैंपस में जा गिरी। विमान के इमारत से टकराने के तुरंत बाद इसमें आग लग गई। हादसे में विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई तो जमीन पर मौजूद 19 लोगों ने भी अपनी जिंदगी गंवाई। विमान में सीट संख्या 11A पर बैठे कुमार चमात्कारिक ढंग से बच गए। उन्हें बस कुछ चोटें आईं। एग्जिट गेट के पास होने की वजह से वह तेजी से बाहर निकल कर बाहर आ गए। हालांकि,विमान में उनके साथ सफर कर रहे छोटे भाई अजय इतने खुशनसीब नहीं थे।

बच तो गया पर उसके बाद क्या झेला बता नहीं सकता: विश्वास

विश्वास ने कहा, 'मैं कृतज्ञ हूं कि जिंदा हूं पर यह कहानी का एक ही पहलू है। तब से मैंने क्या-क्या झेला है वह ज्यादा कठिन है और मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता।' उनका यह बयान बताया है कि 40 साल के ब्रिटिश नागरिक के लिए उस हादसे में बचना सिर्फ खुशी लेकर नहीं आया। क्रैश के बाद आईं तस्वीरों में दिखा था कि खून से सने और घायल कुमार क्रैश वाली जगह से हट रहे थे। उनकी तस्वीरें तुरंत ही टीवी स्क्रीन और सोशल मीडिया पर छा गईं। बाद में उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से घटना के बाद का मंजर याद करते हुए हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा था, 'जब मैं उठा तो चारों तरफ लाशें थीं। मैं मडर गया था। मैं उठा और भाग गया।

शरीर के जख्म सूखे पर दिलो-दिमाग में पीड़ा

हादसे में कुमार के छोटे भाई अजय कुमार रमेश की मौत हो गई। भारत में परिजनों और रिश्तेदारों के पास कुछ दिन बिताकर दोनों भाई लंदन वापस लौट रहे थे। एक साल में कई इंटरव्यू के दौरान कुमार ने अपने भाई को याद करते हुए अपना कष्ट जाहिर किया। भले ही अब उनके शरीर पर हादसे के घाव नहीं दिखते पर दिलो-दिमाग पर मानसिक पीड़ा कम नहीं हुई है। दोस्त और परिवार के लोग बताते हैं कि कैसे कुमार ने क्रैश की यादों से मुश्किलों को झेला है। वह ठीक से सो नहीं पाते हैं।

एयर इंडिया क्रैश के बाद की तस्वीरें

रमेश के सामने आर्थिक चुनौतियां भी

हादसे ने विश्वास कुमार रमेश को कई तरह से तोड़ा। ना सिर्फ वह मानसिक रूप से पीड़ा में हैं, बल्कि आर्थिक दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। कुमार ने बताया था कि उन्होंने और उनके भाई ने अधिकतर बचत को भारत में मछली कारोबार में लगा दिया था। क्रैश और अजय की मौत के बाद परिवार की योजनाएं अनिश्चतताओं में चली गईं।

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Sudhir Jha

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सुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)


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