BJP सांसद को ममता बनर्जी ने क्यों दिया पश्चिम बंगाल का सर्वोच्च सम्मान, चुनावों से पहले दीदी का कैसा दांव?
अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ नगेन रॉय को दिया गया है, जिससे सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली 25 विशिष्ट हस्तियों को राज्य के नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित किया है। 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' के अवसर पर शनिवार को कोलकाता के देशप्रिय पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में इन हस्तियों को सम्मानित किया गया। ये सम्मान कला, संस्कृति, साहित्य, लोक प्रशासन और पब्लिक सर्विस में खास योगदान के लिए दिए जाते हैं। इस मौके पर सभी हस्तियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं आप सभी के प्रति अपना सर्वोच्च सम्मान प्रकट करती हूं और आपको बधाई देती हूं।"
कौन हैं नगेन रॉय?
अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ नगेन रॉय को दिया गया है, जिससे सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, नगेन रॉय जिन्हें उनके समुदाय में अनंता महाराज के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं। 2023 में ही भाजपा ने उन्हें उच्च सदन के लिए नामित किया था। इस सम्मान को ममता बनर्जी द्वारा स्वयं प्रदान किया गया, जिसमें उन्हें अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सम्मान के जरिए क्या सियासी संदेश?
यह सम्मान ऐसे समय में दिया गया है जब राज्य में अप्रैल-मई के दौरान विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में एक विपक्षी दल के सांसद को सम्मानित करना राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। खासकर इसलिए भी क्योंकि नगेन रॉय राजबंशी समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं, जिसका उत्तर बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव है। यह वही क्षेत्र जहां हाल के चुनावों में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है और तृणमूल कांग्रेस को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
ममता ने सम्मान देते हुए क्या कहा?
सम्मान समारोह में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि नगेन रॉय को यह सम्मान राजबंशी भाषा और संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान के लिए दिया गया है और उम्मीद जताई कि वे आगे भी समाज के लिए काम करते रहेंगे। वहीं, नगेन रॉय ने इस सम्मान पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी। राजनीतिक अटकलों के बीच जब उनसे दल बदल की संभावना पर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं और राजनीति में उनकी दिलचस्पी सीमित है।
राजबंशी समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत
नगेन रॉय लंबे समय से ‘ग्रेटर कूच बिहार’ राज्य की मांग से जुड़े रहे हैं और राजबंशी समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समुदाय का वोट काफी हद तक उनके रुख से प्रभावित होता है। इस सम्मान के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है, जबकि भाजपा राज्य में उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी है। उत्तर बंगाल में राजबंशी समुदाय का प्रभाव निर्णायक माना जाता है, ऐसे में नगेन रॉय को दिया गया यह सम्मान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
पहले टीएमसी के करीब माने जाते थे
गौरतलब है कि नगेन रॉय पहले तृणमूल कांग्रेस के करीब माने जाते थे, लेकिन बाद में भाजपा के साथ जुड़े। हाल ही में उन्होंने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष जताया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे अपने समुदाय के मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे हैं। नगेन रॉय के अलावा राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बंग विभूषण' चित्रकार गणेश हलुई, गायक शिवाजी चट्टोपाध्याय, श्रीराधा बंद्योपाध्याय, नचिकेता चक्रवर्ती, लोपामुद्रा मित्रा, बाबुल सुप्रियो, इमान चक्रवर्ती और कवि श्रीजतो बंद्योपाध्याय को प्रदान किया गया। राज्य का एक अन्य प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'बंग भूषण' गायक मनोमय भट्टाचार्य, राघव चट्टोपाध्याय, रूपंकर बागची, अदिति मुंशी, बाउल कलाकार कार्तिक दास बाउल, गायक विवेक कुमार और अभिनेता परमब्रत चट्टोपाध्याय सहित अन्य हस्तियों को प्रदान किया गया। (भाषा इनपुट्स के साथ)
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


