Explainer: ममता-उद्धव के बाद अब अगला नंबर अखिलेश का? क्यों इतनी तेजी से टूट रहे विपक्षी दल; है एक खास वजह
ममता बनर्जी की TMC से विधायकों और सांसदों के टूटने के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी पर खतरा मंडराने लगा है। इस बीच, अखिलेश यादव की सपा पर ओम प्रकाश राजभर के दावे से यूपी की सियासत में हड़कंप मच गया है।

पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद तमाम विपक्षी दलों की भगदड़ जैसी स्थिति बन गई है। राज्य में भाजपा के जीतते ही ममता बनर्जी की पार्टी में टूट शुरू हो गई। पहले विधायक बागी हुए और फिर 20 से ज्यादा सांसदों ने ममता से दूरी बनाकर एनडीए को समर्थन दे दिया। इसके बाद अगला नंबर एक बार फिर से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) का आया है। एक बार फिर से उद्धव की पार्टी में टूट होने जा रही है। 9 में से लगभग छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जल्द ही शामिल होने की अटकलें हैं। शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जमकर निशाना साधा। टीएमसी और उद्धव में टूट के बाद एनडीए के सांसदों की संख्या बढ़कर 318-319 हो सकती है। इसमें 20 टीएमसी से टूटे सांसद जिन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ज्वाइन कर ली, वे शामिल हैं और छह सांसद शिवसेना यूबीटी के जिनके जल्द ही एकनाथ शिंदे के साथ होने की अटकलें हैं, वे भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
अब अगला नंबर समाजवादी पार्टी का?
ममता और उद्धव की पार्टी में टूट के बीच समाजवादी पार्टी का जिक्र होने लगा है। दरअसल, यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को दावा किया कि अखिलेश की समाजवादी पार्टी में भी टूट होने जा रही है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ''समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होगी। राम गोपाल यादव ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह को चिट्ठी सौंपी है। खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है, पूरा यूपी जानता है। शिकंजा कस रहा है तो सपा परेशान है। महाराष्ट्र-बंगाल छोड़िए, पूरी सपा भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है।'' राजभर के इस बयान के बाद हड्कंप मच गया है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या महाराष्ट्र और बंगाल के बाद अब अगला नंबर विपक्षी दल में टूट का यूपी में ही है? क्या वाकई समाजवादी पार्टी के सांसद टीएमसी और शिवसेना यूबीटी की तरह अलग होने वाले हैं। हालांकि, अभी तक इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया जरूर दी है।
अखिलेश बोले- जो डरेगा, वो चला जाएगा
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राजभर के दावे को खारिज कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो डर जाएगा, वो चला जाएगा। उन्होंने बुधवार को कहा कि पार्टी पूरी तरह से मजबूत है और भाजपा का इतिहास रहा है कि वह लालच और दबाव डालकर नेताओं को पार्टी छोड़ने पर मजबूर करती रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संभावित टूट पर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने जवाब दिया कि भाजपा पहले भी कई पार्टियों को तोड़ चुकी है, जिसमें सपा के विधायक और नेता भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ''अगर आप यूपी को देखेंगे तो कई सपा विधायक, एमएलसी और यहां तक कि राज्यसभा सदस्य भी पार्टी छोड़कर चले गए। इसके पीछे जरूर कोई निजी स्वार्थ, कोई लालच या कोई डर रहा होगा। जो लोग डर जाते हैं, वे अपनी पार्टी छोड़ देते हैं।" हालांकि, यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश ने साफ कहा कि उनकी पार्टी एकजुट है। अपने सफर में जरूर उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन यह एक मजबूत पार्टी है और ऐसी ही बनी रहेगी।''
लोकसभा में बहुमत से पीछे रह गई थी भाजपा
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा बहुमत के आंकड़े के पीछे रह गई थी। भाजपा 240 सीटें जीतीं तो एनडीए की संख्या 292 हो गई। सरकार तो बन गई, लेकिन उस दौरान विपक्ष हावी हो गया। राहुल गांधी नेता विपक्ष बने और सड़क से लेकर संसद तक सरकार पर हमलावर रहे। यहां तक कि दावा किया गया कि यह सरकार अपना कार्यकाल तक नहीं पूरा कर पाएगी। लेकिन महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, असम, बंगाल समेत तमाम विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों की करारी हार हुई और भाजपा को बड़ी जीत मिली। इससे भगवा दल को खोया हुआ मोमेंटम वापस मिल गया। एक के बाद एक कई विधानसभा चुनावों में एनडीए ने जीत हासिल की और विपक्ष पर दबाव फिर से बना लिया। अब सवाल उठ रहे हैं कि केंद्र में एनडीए को बहुमत से ज्यादा नंबर्स होने के बाद भी विपक्ष में टूट क्यों हो रही है। बंगाल चुनाव के बाद जो पार्टियों में टूट का सिलसिला शुरू हुआ है, उसके पीछे एक खास वजह मानी जा रही है।
टूट के पीछे वजह डिलिमिटेशन बिल पास करवाना तो नहीं?
संसद के पिछले सत्र के दौरान केंद्र सरकार लोकसभा में डिलिमिटेशन बिल लेकर आई थी। इसके जरिए महिला आरक्षण को बढ़ाकर 33 फीसदी किया जाना था, जबकि देशभर में लोकसभा की सीटों में भी इजाफा होता और यह बढ़कर 850 हो जातीं। विपक्ष ने इस बिल को पास नहीं होने दिया। दरअसल, संविधान संशोधन बिल होने की वजह से बिल को पास करने के लिए दो तिहाई आंकड़े की जरूरत थी, जोकि एनडीए के पास नहीं होने की वजह से पारित नहीं हो सका। विपक्ष और खासतौर पर राहुल गांधी ने इसे विपक्षी दलों की बड़ी जीत बताया था। अब पहले टीएमसी के 20 सांसद अलग होकर एनडीए के समर्थन में आए, फिर शिवसेना यूबीटी के छह से सात सांसदों के टूट की खबर है। इससे संख्या बढ़कर 319 तक पहुंचने की संभावना है। दो तिहाई के आंकड़े तक पहुंचने के लिए 363 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। सूत्रों की मानें तो यही वजह है कि कयास लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी और शिवसेना यूबीटी के बाद अगला नंबर सपा का हो सकता है। भाजपा और कांग्रेस के बाद सपा लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। 2024 में सपा के 37 सांसद जीतकर संसद पहुंचे थे। ऐसे में अगर इसमें बड़ी टूट होती है तो एनडीए को डिलिमिटेशन बिल पास करवाने के लिए दो तिहाई के आंकड़े तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। वहीं, चूंकि अब डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, इसलिए उसे भी मनाने की कोशिश की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, जरूरी नंबर पूरे हो जाने पर डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल फिर से संसद में लाया जा सकता है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है?
लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
परिचय, अनुभव एवं शिक्षा
वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
मीडिया में अवॉर्ड्स.
मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत एक दर्जन से ज्यादा पुरस्कार जीते हैं।
विशेषज्ञता
देश-विदेश की राजनीति पर गहरी पकड़
यूपी-बिहार समेत सभी राज्यों की खबरों को कवर करने का व्यापक अनुभव
विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव, संसद की कार्यवाही को लंबे समय से कवर किया
ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज, एनालिसिस स्टोरीज, एशिया, मिडिल ईस्ट, पश्चिमी देशों की खबरों को कवर करने का एक दशक से ज्यादा का एक्सपीरियंस


