पहले धर्मेंद्र प्रधान, अब तीन और शिक्षा मंत्रियों की उलटी गिनती शुरू? इन राज्यों में घमासान
धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पंजाब में सियासत गर्मा गई है। किताबों में गड़बड़ी और छात्र विरोध के बीच ओडिशा के नित्यानंद गोंड व छत्तीसगढ़ के गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है।

जंतर-मंतर पर छात्रों के भारी विरोध के बाद शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने राज्यों की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। प्रधान के एग्जिट के बाद अब पंजाब, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्रियों पर भी पद छोड़ने का भारी दबाव बन गया है। दोनों ही राज्यों में विपक्षी दल और छात्र संगठन सड़कों पर उतर आए हैं और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
ओडिशा: 55 किताबों में 2000 गलतियां, नित्यानंद गोंड पर लटकी तलवार
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनके गृह राज्य ओडिशा में स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड विपक्ष के सीधे निशाने पर हैं। दरअसल, राज्य में नई शिक्षा नीति के तहत पेश की गईं 55 नई स्कूली किताबों में 2,000 से अधिक गलतियां पाई गई हैं। इसे लेकर बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेडी की छात्र इकाई 'बीजू छात्र जनता दल (BCJD)' ने पिछले हफ्ते 'सेव एजुकेशन' अभियान शुरू किया था। अब छात्र विंग ने चेतावनी दी है कि मंत्री अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ने के बजाय नैतिक जिम्मेदारी लें, और यदि गोंड इस्तीफा नहीं देते हैं, तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा। वहीं, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि राज्य सरकार छात्रों को त्रुटिहीन किताबें उपलब्ध कराने की समय-सीमा तय करे।
हालांकि, बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष गोलक महापात्र ने विपक्ष की मांग को राजनीति से प्रेरित बताया है। राज्य सरकार ने पहले ही इन 55 किताबों को संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और एससीईआरटी (SCERT) ने इसके लिए टेंडर भी निकाल दिया है, ताकि सितंबर-अक्टूबर तक संशोधित किताबें छपाई के लिए तैयार हो सकें।
छत्तीसगढ़: रायपुर की सड़कों पर उतरे छात्र, मंत्री गजेंद्र यादव के खिलाफ नारेबाजी
ओडिशा की तरह ही छत्तीसगढ़ में भी स्कूल शिक्षा विभाग को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की आंच रायपुर तक पहुंच गई है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के खिलाफ राजधानी रायपुर में कई छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भारी विरोध प्रदर्शन किया है।
प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष और छात्रों का स्पष्ट तर्क है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय मंत्री अपना पद छोड़ सकते हैं, तो राज्यों में भी शिक्षा व्यवस्था की खामियों के लिए संबंधित मंत्रियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों में रिसर्च स्कॉलर सोनम बंसोड़ भी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि प्रधान के इस्तीफे की उनकी मांग तो मान ली गई है, लेकिन अब वे जगदलपुर की 20 साल की NEET एस्पिरेंट हारिका राव नायडू के परिवार के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हारिका ने पेपर लीक के बाद हुए दोबारा एग्ज़ाम में फेल होने पर आत्महत्या कर ली थी। प्रदर्शनकारियों ने इस साल की शुरुआत में हुई 12वीं क्लास की हिंदी परीक्षा का पेपर लीक होने का जिक्र भी किया।
बंसोड़ ने कहा, “प्रधान के इस्तीफे की हमारी मुख्य मांग पूरी हो गई। हमारी दूसरी मांग हरिका राव नायडू के लिए मुआवजा है... जिनका नाम आत्महत्या करने वाले छात्रों की सूची में नहीं है। तीसरी बात, हम राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग करते हैं क्योंकि उन्होंने कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।” कांग्रेस की युवा शाखा भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई और यादव के इस्तीफे की मांग की।
पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
आम आदमी पार्टी शासित पंजाब में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग हो रही है। यह मांग मुख्य रूप से परीक्षा पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर हो रही है। यह विवाद हाल के दिनों में तेज हुआ है, खासकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद।
कांग्रेस और शिअद ने प्रधान के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया, लेकिन साथ ही पंजाब में कथित पेपर लीक को लेकर भगवंत मान सरकार पर भी निशाना साधा है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा, ''केंद्रीय मंत्री को तो इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस अब भी अपने पद पर बने हुए हैं। पंजाब में बार-बार हो रहे पेपर लीक के लिए उन्हें भी पद छोड़ना चाहिए।'' वडिंग ने एक बयान में कहा कि पंजाब में यह लड़ाई जारी रहेगी और कांग्रेस पेपर लीक के मामले में मंत्री और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दोनों को जवाबदेह ठहराएगी।
शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि आख़िरकार नैतिक ज़िम्मेदारी तय हो गई है और जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य में कथित पेपर लीक के लिए भगवंत मान सरकार को जवाबदेह ठहराया जाए। पंजाब के भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी मान सरकार पर निशाना साधा।
ढिल्लों ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''(अरविन्द) केजरीवाल जी, अब हमें बताइए - आप पंजाब में बार-बार पेपर लीक मामलों के लिए जिम्मेदार अपने मंत्रियों से इस्तीफे की मांग कब करेंगे? जब आप दिल्ली में नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, तो पंजाब में चुप क्यों रहते हैं? पंजाब के युवाओं को भी जवाब मिलना चाहिए।''


