बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब UP में बढ़ेगा NDA का कुनबा? भड़के अखिलेश, राजभर को चेताया
लखनऊ में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा का इतिहास डरा-धमकाकर या लालच देकर पार्टियों को तोड़ने का रहा है, लेकिन सपा पर इसका कोई असर नहीं होने वाला।

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानों का भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में मचे घमासान के बीच, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) टूटने की कगार पर है। इस दावे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार करते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट और मजबूत है।
लखनऊ में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा का इतिहास डरा-धमकाकर या लालच देकर पार्टियों को तोड़ने का रहा है, लेकिन सपा पर इसका कोई असर नहीं होने वाला। अखिलेश यादव ने भाजपा की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा, "यह भाजपा का पुराना तरीका है और उसने पहले भी कई पार्टियों को तोड़ा है। उत्तर प्रदेश में भी उन्होंने हमारे कई विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और राज्यसभा सांसदों को तोड़ा था। वे नेता स्वार्थ, लालच या डर की वजह से गए, यह एक अलग बात है। लेकिन भाजपा से मुकाबला करने के लिए बहादुर लोगों की टीम चाहिए और समाजवादी पार्टी इसके लिए पूरी तरह तैयार है।"
अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए एक्स पर राजभर पर तंज कसते हुए लिखा कि ज्योतिषियों को पहले यह बताना चाहिए कि भाजपा उन्हें आगामी चुनाव में कितनी सीटें दे रही है, 75, 50 या सिर्फ आश्वासन? उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने तो गठबंधन में 30 सीटें मिलने का दावा करके टिकट के दावेदारों से पैसे भी ऐंठ लिए हैं। अखिलेश ने दावा किया कि खुद भाजपा के भीतर भारी असंतोष है और आने वाले समय में उनके अपने विधायक पाला बदल सकते हैं।
राजभर बोले- "अब यूपी की बारी है"
इससे पहले सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने यह दावा करके सियासी हलकों में हलचल मचा दी थी कि महाराष्ट्र और टीएमसी के बाद अब अगला नंबर उत्तर प्रदेश का है। राजभर ने बिना किसी पुख्ता सबूत के आरोप लगाया कि सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा है। राजभर के मुताबिक, इस पत्र में उन सपा नेताओं की सूची है जो २०१२ से २०१७ के बीच अखिलेश सरकार के दौरान हुए कथित रेत खनन घोटाले और गोमती रिवरफ्रंट परियोजना की जांच से राहत के बदले भाजपा में शामिल होने को तैयार हैं। राजभर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इन घोटालों की जांच के खुलासे से यूपी की राजनीति में "भूकंप" आ जाएगा।
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने राजभर के बयानों को अफवाह और भ्रम फैलाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि समाजवादी पार्टी 2026-27 के पारिवारिक विवाद के दौरान अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना कर चुकी है और उससे उबरकर अब और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आज सपा के पास केवल एक ही पावर सेंटर है, अखिलेश यादव और किसी भी अन्य नेता के पास इतना बड़ा स्वतंत्र जनाधार नहीं है जो पार्टी में बड़ी फूट डाल सके।
हम नहीं तोड़ रहे, अपने आप टूट जाएगी सपा : केशव
यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 25-26 सपा सांसदों के पार्टी से अलग होने का दावा करने के बाद स्पष्ट कि भाजपा उन्हें नहीं तोड़ रही है। वे खुद टूटने को तैयार बैठे हैं। 2027 में अपने आप सपा की टूट हो जाएगी। सपा में टूट की राजनीतिक चर्चाओं में केशव के बयान ने इसे और बल दे दिया है। सपा चाहे जितने भी सम्मेलन कर लें, उसका कोई भला नहीं होगा। उन्होंने कहा, भाजपा तो दबदबे के साथ लखनऊ में है और सत्ता में बनी रहेगी। उन्होंने कहा देश में जो पार्टियां टूट रही हैं, उसमें भाजपा का कोई रोल नहीं है। उन्होंने सपा के भविष्य को टीएमसी जैसा बताया व कहा कि सपा का प्रभाव सैफई तक सिमट जाएगा।
2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने 80 में से 37 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए सपा खुद को भाजपा के मुख्य चैलेंजर के रूप में पेश कर रही है।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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