किस ‘पाप’ का प्रायश्चित करने पहुंचे ऐक्टर रणवीर सिंह, चामुंडेश्वरी मंदिर में गुहार; पूरा मामला

लाइव हिन्दुस्तान, मैसूर
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रणवीर सिंह का नाम फिलहाल डॉन-3 को लेकर विवाद में है। लेकिन अभी वह एक और पुराने विवाद का पाप धोने में लगे हैं। इसी सिलसिले में रणवीर मंगलवार को मैसूर के चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचे।

किस ‘पाप’ का प्रायश्चित करने पहुंचे ऐक्टर रणवीर सिंह, चामुंडेश्वरी मंदिर में गुहार; पूरा मामला

डॉन-3 से जुड़े विवादों के बीच फिल्म अभिनेता रणवीर सिंह ने मंगलवार को मैसूर के चामुंडेश्वरी मंदिर में पूजा-पाठ किया। कर्नाटक हाई कोर्ट ने उन्हें कांतारा मिमिक्री मामले में मंदिर जाने का निर्देश दिया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यह मंदिर चामुंडी पहाड़ियों की चोटी पर स्थित है। हाई कोर्ट ने पिछले महीने अभिनेता के खिलाफ फिल्म ‘कांतारा-1’ में देवता के चित्रण की नकल करने से संबंधित मामले में कार्यवाही रद्द कर दी थी। अदालत का यह फैसला अभिनेता द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के बाद आया। अदालत ने रणवीर के वकील द्वारा प्रस्तुत संशोधित हलफनामे को भी स्वीकार कर लिया था और उन्हें अपने आचरण के लिए प्रायश्चित करने हेतु चामुंडी देवी के दर्शन करने को कहा था।

क्या है रणवीर का कांतारा विवाद
यह विवाद गोवा में फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह में अभिनेता द्वारा फिल्म ‘कांतारा’ को लेकर की गई कथित टिप्पणियों से संबंधित है। रणवीर पर एक देवता की नकल करने और उसे ‘शैतान’ कहने का आरोप है। धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाते हुए एक वकील द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर फिल्म 'धुरंधर' के अभिनेता रणवीर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

चामुंडेश्वरी मंदिर की क्या है मान्यता
चामुंडेश्वरी मंदिर मैसूर शहर से 13 किमी दूर, चामुंडी हिल्स पर स्थित है। यह मंदिर देवी चामुंडेश्वरी को समर्पित है। उन्हें मां दुर्गा का अवतार माना गया है और ताकत, रक्षा और न्याय की देवी बताया गया है। सदियों से यह मंदिर अपनी पहचान, इतिहास और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। किवदंती के अनुसार, चामुंडेश्वरी देवी, शक्तिशाली महिषासुर राक्षस को हराने के लिए देवताओं की संयुक्त दिव्य शक्तियों से प्रकट हुई थीं। नौ रातों तक चले युद्ध के बाद, देवी ने उसे सुदर्शन चक्र से मार डाला। इसे अच्छाई पर बुराई की जीत का प्रतीक माना गया। यह कथा नवरात्रि उत्सव और मैसूर के विश्व प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव में खूब सुनाई जाती है।

कैसा है मंदिर का आर्किटेक्चर
मैसूर के मैदानों से लगभग 1,000 फुट ऊंचा उठता हुआ, चामुंडी पहाड़ियां सदियों से एक आध्यात्मिक स्थल रही हैं। मूल मंदिर 12वीं सदी में होयसला शासकों द्वारा द्रविड़ शैली में बनाया गया था। बाद में इसे विजयनगर राजाओं और मैसूर की वाडियार वंश द्वारा बढ़ाया गया। 1659 में, राजा डोड्डा देवराज वोडेयार ने शिखर तक जाने वाले प्रतिष्ठित 1,000-सीढ़ियों वाले मार्ग का निर्माण किया। श्रद्धालु इन सीढ़ियों पर चढ़ना भक्ति का एक कार्य मानते हैं जो पिछले पापों को धोने में मदद करता है।

18 महाशक्तिपीठों में से एक
इस मंदिर का मैसूर पर सदियों तक राज करने वाले शाही परिवार वाडियार वंश से भी गहरा संबंध है। वाडियार देवी चामुंडेश्वरी को अपने संरक्षक देवता के रूप में पूजते थे और शाही समारोहों, युद्धों और महत्वपूर्ण राज्य अवसरों से पहले नियमित रूप से मंदिर में जाते थे। वाडियार वंश ने मंदिर को बचाए रखने और विस्तार में अहम योगदान दिया। इससे यह कर्नाटक के सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थलों में से एक बन गया। यह मंदिर 18 महाशक्तिपीठों में से एक भी है। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान विष्णु ने भगवान शिव के तांडव को शांत करने के लिए माता सती के शरीर को विखंडित किया, तो उनका बाल यहां गिरा। इस स्थल को ऐतिहासिक रूप से कौरुंचपुरी या कौरुंचपीठम के नाम से जाना जाता था।

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Deepak Mishra

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Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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