दिल्ली के बाद महाराष्ट्र में ऐक्शन, मुंबई के 16 जिमखानों को खाली कराने की तैयारी
राज्य के राजस्व और वन विभाग ने इसी साल फरवरी में जारी एक सरकारी प्रस्ताव के तहत महाराष्ट्र भर के जिमखानों और क्लबों की मौजूदा नीतियों की समीक्षा के लिए एक स्टडी ग्रुप का गठन किया है।

दिल्ली के ऐतिहासिक 'दिल्ली जिमखाना क्लब' को खाली करने के केंद्र सरकार के नोटिस के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने भी मुंबई के प्रतिष्ठित जिमखानों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार एक नई नीति तैयार कर रही है, जिसका उद्देश्य सरकारी जमीन पर बने इन जिमखानों को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाना और इन बेशकीमती जमीनों पर सरकारी नियंत्रण को मजबूत करना है। यह कदम बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा साल 2024 में महालक्ष्मी रेसकोर्स के एक बड़े हिस्से को अपने कब्जे में लेने के बाद आया है, जिसे एक पब्लिक पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है।
राज्य के राजस्व और वन विभाग ने इसी साल फरवरी में जारी एक सरकारी प्रस्ताव के तहत महाराष्ट्र भर के जिमखानों और क्लबों की मौजूदा नीतियों की समीक्षा के लिए एक स्टडी ग्रुप का गठन किया है। सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, मुंबई और राज्य के अन्य जिलों में जिमखानों को रियायती दरों पर सरकारी जमीनें लीज पर दी गई हैं। भविष्य में इन जिमखानों के कामकाज को अधिक समावेशी बनाने और आम जनता को इसका लाभ पहुंचाने के लिए मौजूदा नीतियों की समीक्षा की जा रही है।
इस नई नीति के जरिए क्लबों की सदस्यता प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा और उनके मौजूदा राजस्व मॉडल का पुनर्मूल्यांकन भी किया जाएगा।
मुंबई में जिमखानों का कब्जा
जगह की भारी किल्लत से जूझ रहे मुंबई शहर में ये जिमखाना और क्लब शहर के एक बड़ा हिस्सा घेरे हुए हैं। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के कुल 3,780 एकड़ खुले स्थान में से लगभग 664 एकड़ (यानी करीब पांचवां हिस्सा) इन जिमखानों और वीआईपी क्लबों के पास है। रिपोर्ट के मुताबिक, आम मुंबईकरों के लिए प्रति व्यक्ति केवल 1.28 वर्ग मीटर खुला स्थान ही उपलब्ध है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में 20 से अधिक जिमखाना और क्लब हैं। इनमें से कई एलीट क्लबों की सदस्यता फीस 1 करोड़ रुपये तक है, जबकि वेटिंग पीरियड दो दशकों से भी अधिक लंबा है।
16 जिमखानों को कलेक्टर का बुलावा
मुंबई के 20 जिमखानों में से 16 कलेक्टर की जमीन पर बने हैं। ये प्लॉट ब्रिटिश काल में बेहद मामूली दरों पर लीज पर दिए गए थे। आज इनके सदस्यों में शहर के रईस, नामचीन नागरिक और वरिष्ठ नौकरशाह शामिल हैं। हाल ही में कलेक्टर कार्यालय ने इन सभी 16 जिमखानों के पदाधिकारियों को मुंबई के अतिरिक्त कलेक्टर के साथ बैठक के लिए तलब किया। इनमें बॉम्बे जिमखाना, हिंदू जिमखाना, इस्लाम जिमखाना, पारसी जिमखाना और वोडहाउस जिमखाना जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
सरकारी अधिकारियों की 9 टीमों ने पिछले सप्ताह इन सभी 16 जिमखानों का भौतिक निरीक्षण भी किया है, जिसमें जमीन के रिकॉर्ड, वास्तविक उपयोग और किसी भी तरह के अवैध निर्माण या बदलाव की जांच की गई।
बढ़ सकती है लीज फीस और टैक्स
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला दिल्ली जिमखाना मामले से प्रभावित नहीं है, बल्कि इसकी प्रक्रिया फरवरी से ही चल रही है। बैठक में शामिल एक प्रमुख जिमखाना के सदस्य ने बताया, "इस बैठक में मुख्य रूप से जिमखानों की लीज और लाइसेंस फीस बढ़ाने पर चर्चा हुई। पहले जिमखाना केवल वार्षिक राजस्व देते थे, लेकिन अब परिसर में शादी-ब्याह, कॉन्सर्ट या बैंकविट इवेंट आयोजित करने पर सरकार अतिरिक्त शुल्क या टैरिफ वसूल सकती है।"
महालक्ष्मी रेसकोर्स का उदाहरण
इससे पहले 2024 में बीएमसी ने 211 एकड़ के महालक्ष्मी रेसकोर्स में से 120 एकड़ जमीन अपने नियंत्रण में ले ली थी। इसे न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क और लंदन के हाइड पार्क की तर्ज पर एक विशाल पब्लिक पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। रेसकोर्स की लीज 2013 में ही समाप्त हो चुकी थी, जिसके बाद सरकार ने इसे रिन्यू नहीं किया था।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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