राघव चड्ढा पर कार्रवाई ने खोली ‘खामोश कलह’ की परतें, क्यों असहज हुई AAP
एक समय अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाने वाले राघव चड्ढा धीरे-धीरे नेतृत्व की मुख्यधारा से अलग होते नजर आए। राघव चड्ढा पर यह निर्णय एक झटके में नहीं लिया गया। लंबे समय से पार्टी के भीतर असंतोष पनप रहा था।

आम आदमी पार्टी (आप) ने गुरुवार को सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता के पद से हटा दिया। पार्टी ने उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को नियुक्त किया है। चड्ढा पंजाब से ही राज्यसभा सांसद हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ चड्ढा के कथित मतभेदों को लेकर चर्चा जोरों पर थी। पार्टी नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजा गया था, जिसमें उच्च सदन में पार्टी के उप-नेता पद से चड्ढा को हटाने का अनुरोध किया गया था।
राज्यसभा में आप के सदन के नेता संजय सिंह ने पत्रकारों से कहा, राज्यसभा सचिवालय को पार्टी के इस फैसले से अवगत करा दिया गया है। हालांकि, आप नेताओं ने उन दावों को खारिज किया कि चड्ढा को पार्टी सांसदों के कोटे के तहत राज्यसभा में बोलने से रोका जा रहा था।
अटकलों पर मुहर लगी
दिल्ली की सियासत में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार मुहर लग गई। राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता पद से हटाने का फैसला लेकर पार्टी ने साफ किया कि वह चड्ढा की अलग लकीर खींचने व पार्टी से दूरी बनाकर खुद को बड़ा बनाने की कोशिशों से खुश नहीं है। चड्ढा को हटाने से पार्टी के भीतर मतभेद का भी संकेत मिला है। पिछले कुछ माह में कई संकेत मिले, जिन्होंने पार्टी व चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी को उजागर किया।
सबसे अहम घटनाक्रम फरवरी अंत में सामने आया, जब कथित शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं को ट्रायल कोर्ट से राहत मिली। उस वक्त जहां पूरी पार्टी जश्न में डूबी थी, वहीं चड्ढा की चुप्पी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। यह दूरी सियासी गलियारों में सवाल खड़े करने लगी। संजय सिंह से इस संबंध में पूछा गया था तो उन्होंने कहा, यह उनसे ही पूछें। चड्ढा की भाजपा से कथित नजदीकी पर सवाल पूछा गया था।
लंबे समय से पार्टी के भीतर पनप रहा था असंतोष
एक समय अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाने वाले राघव चड्ढा धीरे-धीरे नेतृत्व की मुख्यधारा से अलग होते नजर आए। राघव चड्ढा पर यह निर्णय एक झटके में नहीं लिया गया। लंबे समय से पार्टी के भीतर असंतोष पनप रहा था। चड्ढा की अलग लाइन और सार्वजनिक चुप्पी ने नेतृत्व को असहज किया।
इन वजहों से आप को असहज किया
राधव चड्ढा लगातार पार्टी से दूरी बनाकर अपनी अलग लाइन ले रहे थे। शराब घोटाले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद से पार्टी से कन्नी काट रहे थे। उन्होंने केजरीवाल की रिहाई पर न ही स्वागत किया, न कोई पोस्ट किया। इसके बाद से ही उनपर कार्रवाई की अटकलें लगने लगी थी।
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
और पढ़ें

