'सोचिए…असली हीरो कौन?' स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अभिषेक बनर्जी ने सेलिब्रेटीज को घेरा, 'चुप्पी' पर सवाल
छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को मिलेनियल्स और जेन जी से उन सेलेब्रिटीज, इंफ्लुएंसर्स और खेल हस्तियों के समर्थन पर दोबारा विचार करने की अपील की, जिन्होंने आंदोलन के दौरान चुप्पी साध ली।

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद पर देशभर में हुए छात्र आंदोलन के बीच तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने उन सेलेब्रिटीज, इंफ्लुएंसर्स और खेल हस्तियों पर निशाना साधा, जिन्होंने युवाओं के साथ खड़े होने के बजाय चुप्पी साध ली। उन्होंने मिलेनियल्स और जेन जी से अपील की कि वे सोचें कि असली हीरो कौन है? सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए बनर्जी ने लिखा कि मिलेनियल्स और जेन जी से मेरी विनम्र अपील है। हमने देखा है कि कैसे युवाओं की एक दृढ़ पीढ़ी सबसे ताकतवर सरकारों को भी घुटनों पर ला सकती है। यह याद दिलाता है कि किसी भी लोकतंत्र की असली ताकत उसके लोगों की ताकत में होती है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से दूर रहने वाले सार्वजनिक हस्तियों की चुप्पी बहुत कुछ कहती है।
चुप्पी बहुत कुछ कहती है
अभिषेक बनर्जी ने आगे कहा कि उसी समय कई सेलेब्रिटी, इंफ्लुएंसर, खेल आइकन और फिल्मी सितारों ने इस देश के युवाओं और छात्रों के साथ खड़े होने के बजाय चुप रहना चुना। चाहे डर से, सावधानी से या अपने फायदे के लिए, उनकी चुप्पी बहुत कुछ कहती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि अगली बार मनोरंजन का कोई कार्यक्रम देखते समय रुककर सोचें। उन्होंने लिखा कि अगली बार जब हम फिल्म टिकट, मैच टिकट खरीदने या किसी कंटेंट क्रिएटर को सब्सक्राइब करने के लिए लाइन में खड़े हों, तो हमें एक पल रुककर खुद से पूछना चाहिए कि क्या यह व्यक्ति सच में उन मूल्यों को दर्शाता है जिन पर मैं विश्वास करता हूं? क्या वे उन लोगों के साथ खड़े रहे जिन्होंने उनकी सफलता को संभव बनाया?
उन्होंने कहा कि अगर जो लोग हमारी प्रशंसा का आनंद लेते हैं, वे सबसे जरूरी समय पर लोगों के साथ खड़े होने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, तो शायद अब समय आ गया है कि हम फिर से सोचें कि हमारी प्रशंसा का हकदार कौन है। बनर्जी ने दर्शकों की ताकत पर जोर देते हुए कहा कि कई सार्वजनिक हस्तियों को जो प्रसिद्धि मिलती है, वह युवाओं की वजह से मिलती है। उन्होंने लिखा कि हम किसे फॉलो करते हैं, यह हमारी पसंद है। हम किसे सेलिब्रेट करते हैं, यह हमारी पसंद है। हम किसे प्रसिद्ध बनाते हैं, यह हमारी पसंद है। दर्शकों ने उन्हें प्रसिद्धि दी। लोगों ने उन्हें प्रभाव दिया। युवाओं ने उन्हें प्रासंगिकता दी। जब इतिहास हिम्मत मांगता है, तो चुप्पी कभी तटस्थ नहीं होती- यह एक विकल्प है।
हम उनके पीछे क्यों खड़े रहें?
अभिषेक बनर्जी ने टिकट खरीदने, कंटेंट देखने, पोस्ट को लाइक और शेयर करने जैसे कामों को सामान्य इस्तेमाल से कहीं अधिक बताया। उन्होंने लिखा कि आपका खरीदा हर टिकट, आपका दिया हर व्यू, हर लाइक, शेयर, फॉलो और चीयर- ये सिर्फ क्लिक या खरीदारी नहीं हैं, ये समर्थन हैं। जितना ध्यान से आप अपना पैसा खर्च करते हैं, उतना ही ध्यान से अपना ध्यान खर्च करें। क्योंकि अगर वे उस समय हमारे साथ खड़े नहीं हो सकते जब सबसे ज्यादा जरूरत हो, तो हम उनके पीछे क्यों खड़े रहें?


