'मैं तुरंत इस्तीफा दे दूंगा, अगर...' TMC के बागियों को अभिषेक बनर्जी की खुली चुनौती
अभिषेक बनर्जी की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब टीएमसी के कई बागी विधायकों और सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपी और टीएमसी के ऋतब्रता गुट में शामिल हो गए हैं और पार्टी के भीतर के संकट के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के उन बागी सदस्यों को चुनौती दी है, जिन्होंने उन पर संगठन को कमजोर करने का आरोप लगाया है, और कहा है कि अगर वे ममता बनर्जी के नेतृत्व में लौट आते हैं, तो वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।
पार्टी के भीतर चल रहे विद्रोह पर बोलते हुए करते हुए अभिषेक ने कहा कि जो लोग टीएमसी छोड़कर अब उन्हें दोषी ठहरा रहे हैं, उन्हें ममता बनर्जी के पास वापस आ जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो लोग पार्टी छोड़कर आज मुझे गाली दे रहे हैं या मुझ पर आरोप लगा रहे हैं… मैं उन्हें दीदी के पास लौटने की चुनौती देता हूं। अगर वे ऐसा करते हैं, तो मैं एक घंटे के भीतर पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि बागी नेता वापस नहीं लौटेंगे, क्योंकि उन्होंने भाजपा के साथ समझौता कर लिया है। उन्होंने कहा, “उन्होंने भाजपा के साथ समझौता किया है: पार्टी छोड़ो, बागी खेमे में शामिल हो जाओ या भाजपा में, और फिर अभिषेक बनर्जी को दोषी ठहराओ और उनकी आलोचना करो।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे इस विद्रोह के पीछे का कारण हैं, तो बागी नेताओं के ममता बनर्जी की पार्टी में लौटने पर वे 24 घंटे के भीतर इस्तीफा दे देंगे।
कौन-कौन हुए टीएमसी में बागी?
अभिषेक बनर्जी की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब टीएमसी के कई बागी विधायकों और सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपी और टीएमसी के ऋतब्रता गुट में शामिल हो गए हैं और पार्टी के भीतर के संकट के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
टीएमसी छोड़ने या उससे अलग होने वालों में सुखेन्दु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक शामिल हैं।
काकोली घोष दस्तीदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बसुनिया, अरूप चक्रवर्ती, कालीपाड़ा सोरेन, शताब्दी रॉय, जून मालिया, माला रॉय, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी, बापी हलदर, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, असित मल, देव अधिकारी और पार्थ भौमिक सहित लगभग 19 से 20 सांसदों का एक बड़ा बागी गुट त्रिपुरा स्थित एनसीपी में विलय कर चुका है और भाजपा को अपना समर्थन दे चुका है।
वरिष्ठ नेताओं ने इस्तीफा दिया, प्रतिद्वंद्वी गुटों में शामिल हुए
हाल ही में, मदन मित्रा ने टीएमसी के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया और एक बागी गुट में शामिल हो गए, हालांकि उन्होंने कहा है कि उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व शैली की आलोचना करते हुए इसे केंद्रीकृत और "हिटलरवादी" बताया और आरोप लगाया कि पार्टी एक व्यक्ति के नियंत्रण में कमजोर हो रही है।
सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा दे दिया, जबकि सुष्मिता देव ने राज्यसभा और पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया। प्रकाश चिक बराइक ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। ये तीनों नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं।
काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व या प्रतिनिधित्व वाले एक अलग बागी गुट ने लगभग 19 सांसदों के समर्थन का दावा किया है और कहा है कि वह एनडीए का समर्थन कर सकता है।


