हर कोई गोली खाए, सुप्रीम कोर्ट यही चाहता है? कॉकरोच वाले अभिजीत दीपके क्यों भड़क उठे
पीठ ने महुआ मोइत्रा को पुलिस के समक्ष पेश होने को कहा। साथ ही, यह टिप्पणी की, 'आप सांसद हैं। राजनीति में आने के बाद आपको अंडों से डर लगता है? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने सीने पर गोलियां खाईं। ऐसी याचिकाएं नहीं आनी चाहिए।'

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सुप्रीम कोर्ट की एक हालिया टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट करके कहा, 'क्या अब सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि हर कोई गोलियां खाए?' दरअसल, एससी ने महुआ मोइत्रा की उस याचिका को आज खारिज कर दिया, जिसमें नफरत फैलाने वाले भाषण के मामले में उन्हें 15 अगस्त को पुलिस के समक्ष पेश होने का निर्देश देने संबंधी कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। जज दीपांकर दत्ता और जज शील नागू की पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।
पीठ ने महुआ मोइत्रा को पुलिस के समक्ष पेश होने को कहा। साथ ही, यह टिप्पणी की, 'आप सांसद हैं। राजनीति में आने के बाद आपको अंडों से डर लगता है? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने सीने पर गोलियां खाईं। ऐसी याचिकाएं इस अदालत के समक्ष आनी ही नहीं चाहिए।' पीठ के मामले पर सुनवाई के लिए इच्छुक नहीं होने पर सीनियर वकील ने याचिका वापस ले ली और न्यायालय ने इसे वापस ले लिया गया मानते हुए खारिज कर दिया गया।
अभिजीत दीपके ने किस बात पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए सीजेपी लीडर अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा, 'क्या अब सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि हर कोई गोलियां खाए? जब सुप्रीम कोर्ट के जज विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह के बयान देते हैं तो ऐसे में आम आदमी के लिए आखिर क्या उम्मीद बचती है?'
महुआ मोइत्रा के वकील ने अदालत से क्या कहा
वहीं, महुआ मोइत्रा की ओर से पेश हुए वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि कानून के तहत उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पुलिस के समक्ष पेश होने का कानूनी अधिकार है। उन्होंने कहा, 'पुलिस के नोटिस के मुताबिक मुझे अपने निर्वाचन क्षेत्र के थाने में पेश होना है। पिछली बार जब मैं वहां गई थी तो दो बातें हुई थीं। पहले मुझे धमकियां मिलीं कि मुझ पर अंडे फेंके जाएंगे आदि और दूसरी बार, वास्तव में अंडे फेंके गए।' कलकत्ता हाई कोर्ट ने नफरत फैलाने वाले भाषण के मामले में मोइत्रा को 5 अक्टूबर तक हर प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से 21 जुलाई को अंतरिम राहत दी थी। मोइत्रा का दावा है कि यह मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है।


