अभिजीत का फोन आया था…, दीपके की मां ने क्या बताया; 2 हफ्तों तक छिपे रहे

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके आंदोलन के बाद टायफाइड का सामना कर रहे हैं। इसी बीच उनके माता-पिता ने एक अखबार से बातचीत में बताया है कि कैसे उन्हें सीजेपी के गठन के बाद छिपना पडडा था।

Abhijeet Dipke
सीजेपी की शुरुआत से पहले अभिजीत दीपके अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे।

पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी को फाउंडर अभिजीत दीपके के पैरेंट्स अब उनकी शादी की तैयारियां शुरू करने जा रहे हैं। हालांकि, इसका फैसला उन्होंने अभिजीत पर ही छोड़ रखा है। हाल ही में एक अखबार से बातचीत में उन्होंने सीजेपी के बनने के बाद हुए अनुभवों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पार्टी के बनने के बाद वह दो हफ्तों तक छिपे रहे थे।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अभिजीत की मां अनीता दीपके ने बताया कि सीजेपी के लॉन्च होने के बाद वह दो हफ्ते तक छिपे रहे। साथ ही धमकियां मिलना भी शुरू हो गईं थीं। उन्होंने कहा, 'पार्टी के लॉन्च होने के बाद अभिजीत को बॉस्टन में धमकियां मिलने लगी थीं। कॉल करने वाले धमकी देते थे कि वह बॉस्टन में है, तो यहां उसके पैरेंट्स के निशाना बनाया जाएगा।'

अभिजीत का आया कॉल

उन्होंने अखबार को बताया, 'अभिजीत ने हमें तुरंत कॉल किया और कहीं जाने की अपील की। हम कोंकण चले गए और दो सप्ताह तक रिश्तेदारों के साथ रहे। जब वह जून के पहले हफ्ते में बॉस्टन से लौटा, तो हम उसे लेने गए थे।' रिपोर्ट के अनुसार, दीपके का परिवार छत्रपति संभाजीनगर के वालुज क्षेत्र में रहता है।

उन्होंने कहा कि अभिजीत ने कभी भी राजनीति के बारे में नहीं बताया था। उन्होंने कहा, 'उसने कभी हमें कॉकरोच जनता पार्टी के लॉन्च होने के बारे में नहीं बताया था। हमने जब उसके इंटरव्यू देखे, तब सबकुछ न्यूज चैनल से पता चला।'

फिर से दी चेतावनी

सीजेपी फाउंडर दीपके ने हाल ही में एक्स पर आरोप लगाया कि पुलिस अब भी छात्रों को परेशान कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसपर रोक नहीं लगी, तो 'बहुत बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन' किया जाएगा। दीपके ने कहा, 'अगर पुलिस छात्रों को परेशान करती रही, तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेगी। सरकार को छात्रों को निशाना बनाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लगानी चाहिए।'

ये थी शर्तें

सीजेपी ने जंतर-मंतर पर 36 दिन तक चला आंदोलन शनिवार को खत्म कर दिया था। पार्टी ने कहा था कि सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्राथमिकियां वापस लेने, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बदले की कार्रवाई न करने और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर विचार करने समेत प्रमुख मांगें मान ली हैं।

सोमवार को संगठन ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने, सभी आपराधिक मामले वापस लेने और यह लिखित आश्वासन देने की मांग की थी कि कोई नई प्राथमिकियां दर्ज नहीं की जाएगी। साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश की निर्देश संख्या चार में सरकारों को पहले से दर्ज प्राथमिकियां बरकरार रखने और जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है। सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा, 'यह निर्देश 25 जुलाई को भारत सरकार की ओर से देश के युवाओं को दिए गए आश्वासन और गारंटी के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि प्राथमिकियां वापस ली जाएंगी और शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निशाना नहीं बनाया जाएगा।'

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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