शादी से पहले लड़कों का हो टेस्ट; सदन में AAP नेता ने की कानून बनाने की मांग, बोले- तलाक बढ़ रहे

Upendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने शादी के पहले लड़कों के डोप और मेडीकल टेस्ट को अनिवार्य करने की बात उठाई है। उन्होंने सदन में ऐसा कानून बनाने और सभी राज्यों में इसे लागू करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि ऐसा होने की वजह से ही देश में तलाक और घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं।

शादी से पहले लड़कों का हो टेस्ट; सदन में AAP नेता ने की कानून बनाने की मांग, बोले- तलाक बढ़ रहे

देश में बढ़ते तलाक और घरेलू हिंसा के मामलों को लेकर आम आदमी पार्टी सांसद मालविंदर सिंह कंग ने शुक्रवार को सदन में आवाज उठाई। उन्होंने संसद को संबोधित करते हुए शादी के पहले लड़कों का डोप और मेडिकल टेस्ट अनिवार्य करने के लिए कानून बनाने की मांग की। आपको बता दें, पंजाब से आम आदमी पार्टी के सांसद कंग का यह संबोधन ऐसे समय में सामने आया है, जब सोशल मीडिया पर पंजाब का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक लड़का घंटों तक नशे की हालात में एक ही जगह पर खड़ा हुआ देखा जा सकता है।

सदन में जीरो आवर में बोलते हुए कंग ने भारतीय समाज में शादी को लेकर लड़के और लड़कियों के बीच में होते भेदभाव को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने कहा, " जब नया रिश्ता जुड़ता है तो लड़की के बारे में बहुत जांच-पड़ताल की जाती है, लेकिन लड़कों को लेकर उतनी जांच-पड़ताल नहीं होती। हमारे समाज में लगातार तलाक और घरेलू हिंसा के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में हमें यह अनिवार्य कर देना चाहिए कि अगर किसी लड़के को विवाह का सर्टिफिकेट जारी करवाना है, तो उससे पहले उसे मेडीकल और डोप टेस्ट करवाना होगा।''

कंग ने जोर देकर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह हमारे समाज की भलाई के लिए है। सरकार को इस पर कानून बनाना चाहिए और सभी राज्यों को इसे अपनाने के लिए कहना चाहिए।

गौरतलब है कि आप सांसद का यह बयान भारतीय समाज की सच्चाई को भी उजागर करता है। कई मामलों में ऐसा देखा जाता है कि परिवार अपने लड़कों की कमियों को छिपाते हैं या फिर उसके बारे में झूठ बोलकर उसकी शादी करवा देते हैं। बाद में जब लड़की के सामने सच्चाई आती है, तो उसे भाग्य का लिखा बोलकर टाल देते हैं। शराब और खराब स्वास्थ्य की वजह से कई लड़कियों की जिंदगियां बर्बाद हो जाती हैं। इसके अलावा बड़े स्तर पर घरेलू हिंसा के मामले भी सामने आते हैं।

2025 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 2.25 लाख घरेलू हिंसा के मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा केस दहेज उत्पीड़न या फिर पति द्वारा की गई क्रूरता से जुड़ा होता है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक 18 से 49 साल की करीब 29.3 फीसदी महिलाएं किसी न किसी प्रकार से घरेलू हिंसा का सामना कर रही हैं। इस हिंसा के ज्यादातर मामलों में शराब और नशा ही निकलकर सामने आता है।

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लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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