आधी रात पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या? शराब-भोजन पर वकील ने ऐसा क्या लिखा कि गुस्से से तमतमा उठे CJI

Mar 09, 2026 02:46 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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CJI सूर्यकांत ने अपने आदेश में लिखा  कि यह पिटीशन दिमाग न लगाने का एक और उदाहरण है। इसमें प्रार्थनाएं साफ नहीं हैं, बेबुनियाद हैं जिसे खारिज किया जाता है। याचिका खराब ड्राफ्टिंग का भी एक उदाहरण है।

आधी रात पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या? शराब-भोजन पर वकील ने ऐसा क्या लिखा कि गुस्से से तमतमा उठे CJI

देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ आज (सोमवार, 9 मार्च को) एक ऐसी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसे एक वकील ने खुद याचिकाकर्ता के तौर पर फाइल की थी। इस याचिका में वकील ने शराब के फिक्स्ड प्रिस्क्रिप्शन को जरूरी बनाने से लेकर तामसिक भोजन पर नियम बनाने तक का अनुरोध शीर्ष अदालत से किया था। इसके अलावा उसी PIL में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के मुद्दों समेत अन्य कई मुद्दों का भी ज़िक्र किया था। जब ये मामला CJI सूर्यकांत के पास आया तो वह पिटीशन में इन सब चीजों का उल्लेख देखकर याचिकाकर्ता वकील पर भड़क उठे।

सबसे पहले CJI सूर्यकांत ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और कहा कि यह याचिका दिमाग नहीं लगाने का एक बड़ा उदाहरण है। याचिकाकर्ता पर भड़कते हुए CJI ने पूछा, आधी रात को यह सब पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या?" इसके बाद CJI की अगुवाई वाली बेंच ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताते हुए खारिज कर दिया।

दिमाग न लगाने का एक और उदाहरण

बार एंड बेंच के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने अपने आदेश में लिखा, "यह पिटीशन दिमाग न लगाने का एक और उदाहरण है। इसमें प्रार्थनाएं साफ नहीं हैं, बेबुनियाद हैं जिसे खारिज किया जाता है। याचिका खराब ड्राफ्टिंग का भी एक उदाहरण है।" सीजेआई ने आगे लिखा कि अगर पिटीशनर वकील नहीं होता तो हम उस पर बहुत भारी भरकम पेनाल्टी लगाते और तब याचिका खारिज करते। उन्होंने अपने आदेश में लिखा, “यह प्रार्थना कैज़ुअल ड्राफ्टिंग और सुप्रीम कोर्ट पर बोझ डालने का एक उदाहरण है।”

अगली बार छोड़ेंगे नहीं, भारी जुर्माना होगा

इसके साथ ही CJI ने याचिकाकर्ता वकील को ताकीद किया कि अगली बार जब आप ऐसी पिटीशन फाइल करेंगे, तो उस पर बहुत भारी जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने वकील को फटकार लगाते हुए कहा, "तुम लोगों ने बहुत सारी ऐसी दुकानें चला रखी हैं।" हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका खारिज करते हुए याचिककर्ता से ये भी कहा कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार उचित अधिकारियों से संपर्क कर सकता है।

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लेखक के बारे में

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प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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