कभी हटाए नहीं जा सके LS स्पीकर, आज अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा; ये दल ओम बिरला के खिलाफ
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ दूसरे चरण में वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी गतिरोध बढ़ सकता है। कांग्रेस पहले ही विदेश नीति पर चर्चा की मांग कर चुकी है।

पूरे 39 वर्षों के बाद सोमवार को फिर संसद में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। प्रस्ताव पर करीब दस घंटे तक चर्चा होने की उम्मीद है। बहस के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने पूरी तैयारी की है। केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जहां सत्तापक्ष की तरफ से चर्चा में हिस्सा लेने वाली सदस्यों के साथ बैठक की, वहीं कांग्रेस ने भी बैठक कर रणनीति पर चर्चा की है।
संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ होगी। लोकसभा में सबसे पहले शिलांग से सांसद डॉ. रिकी एजे सिंगकॉन को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद सदन कुछ देर के लिए स्थगित हो सकता है। कार्यसूची में प्रस्ताव पर चर्चा को शामिल किया है, हालांकि सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं।
सूत्रों का कहना है कि सत्तापक्ष पूरी मजबूती के साथ विपक्ष के आरोपों का खंडन करेगा। सरकार की ओर से भी उन घटनाओं का हवाला दिए जाने की संभावना है जिनमें विपक्षी नेताओं ने कथित तौर पर राष्ट्रपति, राज्यपालों, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक अधिकारियों के प्रति अनादर दिखाया है। वहीं, विपक्षी पार्टियां भी सरकार को घेरने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगी।
TMC ने भी किया समर्थन
संसदीय सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के 118 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस ने हस्ताक्षर नहीं किए थे, पर नए घटनाक्रम में टीएमसी ने भी प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया है। एनसीपी (शरद पवार) ने भी अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है, पर माना जा रहा है कि एनसीपी (एसपी) विपक्षी दलों के खिलाफ नहीं जाएगी।
वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी बढ़ सकता है गतिरोध
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ दूसरे चरण में वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी गतिरोध बढ़ सकता है। कांग्रेस पहले ही विदेश नीति पर चर्चा की मांग कर चुकी है। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका के रूस से तेल खरीदनों को लेकर बयानों पर भी विपक्ष सरकार को घेर सकता है।
अब तक तीन बार आए प्रस्ताव
लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए अब तक तीन औपचारिक प्रस्ताव पेश किए गए हैं, पर कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। सबसे पहले 1954 में तत्कालीन अध्यक्ष जीवी मावलंकर के खिलाफ समाजवादी नेता विग्नेश्वर मिश्रा ने पेश किया, पर इस पर सदन में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया है। इसके बाद 1966 में सरदार हुकुम सिंह के खिलाफ समाजवादी नेता मधु लिमये ने पेश किया। इस पर चर्चा हुई और प्रस्ताव गिर गया।
तीसरी बार 1987 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इसको भी जरूरी बहुमत नहीं मिला और यह भी पारित नहीं हो सका। इसके बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने की बात हुई थी, पर बाद में विपक्ष ने नोटिस देने का फैसला छोड़ दिया था।
बिरला नहीं रहेंगे सदन में मौजूद
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा नहीं हो जाता तब तक वे सदन में मौजूद नहीं रहेंगे।
लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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