90 दिनों तक काम जरूरी, पेंशन की भी व्यवस्था; डिलिवरी बॉय के लिए सरकार का नया प्रस्ताव

Jan 02, 2026 06:58 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।
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लाभ प्राप्त करने के लिए श्रमिकों को एक विशिष्ट अवधि के लिए कार्य करना अनिवार्य होगा। यदि कोई श्रमिक केवल एक ही प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ा है, तो उसे एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक काम करना होगा।

90 दिनों तक काम जरूरी, पेंशन की भी व्यवस्था; डिलिवरी बॉय के लिए सरकार का नया प्रस्ताव

भारत सरकार ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों को ध्यान में रखते हुए नए मसौदा नियमों का प्रस्ताव दिया है। ये नियम 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर जैसे एग्रीगेटर्स के साथ काम करने वाले लाखों श्रमिकों को स्वास्थ्य, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सुरक्षा प्रदान करना है।

मसौदा नियमों के अनुसार, लाभ प्राप्त करने के लिए श्रमिकों को एक विशिष्ट अवधि के लिए कार्य करना अनिवार्य होगा। यदि कोई श्रमिक केवल एक ही प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ा है, तो उसे एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक काम करना होगा। यदि श्रमिक एक से अधिक प्लेटफॉर्म (जैसे सुबह ओला और शाम को स्विगी) पर काम करता है, तो कुल कार्य अवधि कम से कम 120 दिन होनी चाहिए।

काम की गिनती उस दिन से शुरू होगी जब श्रमिक पहली बार आय अर्जित करता है, चाहे राशि कितनी भी हो। यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है, तो उसे नियमों के अनुसार तीन दिन का काम माना जाएगा।

रजिस्ट्रेशन और पहचान

सरकार ने इन लाभों को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे पर जोर दिया है। 16 वर्ष से अधिक आयु के सभी गिग श्रमिक पंजीकरण के पात्र हैं। लाभ प्राप्त करने की अधिकतम आयु 60 वर्ष तय की गई है। ई-श्रम पोर्टल के जरिए सभी श्रमिकों का आधार-लिंक्ड रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। सरकार प्रत्येक पात्र श्रमिक को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और एक डिजिटल पहचान पत्र जारी करेगी। आधार-लिंक्ड UAN होने के कारण श्रमिक यदि प्लेटफॉर्म बदलते हैं, तो भी उनके लाभ निरंतर बने रहेंगे।

Gig Workers

पेंशन से बीमा तक की व्यवस्था

श्रमिकों के स्वास्थ्य और चिकित्सा के लिए 'आयुष्मान भारत' योजना के साथ एकीकरण किया जाएगा। जीवन बीमा और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की भी सुविधा होगा। भविष्य में एक ऐसी पेंशन योजना का प्रस्ताव है जिसमें प्लेटफॉर्म और श्रमिक दोनों का अंशदान शामिल होगा। मातृत्व लाभ (Maternity Benefits) और बच्चों के लिए क्रेच की भी सुविधा होगी।

राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड

नियमों में एक 'राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड' के गठन का भी प्रावधान है। केंद्र और राज्य सरकारों के नामित अधिकारी इसमें शामिल होंगे। असंगठित क्षेत्र के श्रमिक संघों से 5 प्रतिनिधि शामिल होंगे। एग्रीगेटर संघों से भी 5 प्रतिनिधि को जगह दी जाएगी। लोकसभा, राज्यसभा और अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रतिनिधि को भी जगह।

बोर्ड के मुख्य कार्य

गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की संख्या का आकलन करना। नए प्रकार के एग्रीगेटर्स की पहचान करना। इसके अलावा, कल्याणकारी नीतियों की निगरानी और सिफारिश करना।

यदि कोई श्रमिक पिछले वित्तीय वर्ष में निर्धारित 90/120 दिनों की कार्य अवधि पूरी नहीं कर पाता है, तो वह लाभ के लिए अपात्र हो जाएगा। 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद सामाजिक सुरक्षा लाभ समाप्त हो जाएंगे। इन मसौदा नियमों पर वर्तमान में जनता से राय मांगी गई है, जिसके बाद मार्च 2026 तक अंतिम अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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