
9 साल से अफेयर, पाक में इस्लाम कबूल करने वाली सरबजीत कौर के निकाह का वीडियो आया सामने
सिख जत्थे के साथ पाकिस्तान गई सरबजीत कौर ने नूर हुसैन बनकर इस्लाम कबूल किया और एक पाकिस्तानी से निकाह कर लिया। इसका वीडियो भी सामने आया है। सरबजीत वीडियो में कहती हैं कि वह शख्स को 9 साल से जानती थीं।
भारत से सिख जत्थे के साथ पाकिस्तान गई पंजाब की सरबजीत कौर का नया वीडियो सामने आया है, जिसमें वह इस्लाम कबूल करती दिख रही हैं। सरबजीत कौर निकाह कबूल करने की बात करती नजर आ रही है। वीडियो में पाकिस्तानी नागरिक नासिर हुसैन के साथ बैठी महिला का कहना है कि नासिर हुसैन को वह 9 सालों से जानती है और अपनी मर्जी से उसके साथ निकाह कर रही है। उक्त वीडियो सामने आने के इस बात की पुष्टि हो गई है कि उक्त महिला ने पाकिस्तानी युवक से निकाह कर लिया है।

52 वर्षीय सरबजीत कौर का कई साल पहले अपने पति से तलाक़ हो चुका है और उसके दो बेटे हैं। पाकिस्तान में निकाह करने वाली भारतीय महिला का वीडियो सामने आने के बाद इस बात की पुष्टि होती दिख रही है कि उक्त महिला ने पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन कर निकाह कर लिया है। एक दिन पहले निकाहनामा भी वायरल हुआ था, जिस से पता चला था कि सरबजीत कौर ने अपना नाम बदल कर नूर रख लिया था। वहीं, इस घटना से भारतीय सुरक्षा एजेंसीज की चिंता बढ़ गई है। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, यह राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा सवाल है।
एसजीपीसी ने पल्ला झाड़ लिया
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत पाकिस्तान के रिश्तों में आए भारी तनाव के बाद केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर शुरू में जत्थे को पाकिस्तान जाने की अनुमति नहीं दी थी। सिख संगठनों ने सरकार से मंजूरी देने की मांग की थी, जिसके बाद मंजूरी दे दी गई। अब सरबजीत कौर के पाकिस्तानी युवक से निकाह कर वहीं रह जाने के मामले से मचे बवाल पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपना पल्ला झाड़ते नजर आ रही है। कमेटी ने कहा है कि वे सिर्फ श्रद्धालुओं की सूची सरकार को भेजते हैं,। बैकग्राउंड चेक करना सरकार का काम होता है। वहीं, आम बात ये भी है कि 4 नवंबर को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते गुरुपर्व के मौके पर पाकिस्तान जाने वाले इस सिख जत्थे की अगुवाई ही एसजीपीसी के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज ने की थी।
सचिव बोले, घटना निंदनीय, सिख कौम की छवि पर असर
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव प्रताप सिंह ने इस मामले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कमेटी को जो आधिकारिक सूची केंद्र सरकार की ओर से भेजी गई थी, उसमें सरबजीत कौर का नाम शामिल ही नहीं था। केवल सरकारी सूची के आधार पर ही मंजूरी दी थी, क्योंकि यात्रियों की पृष्ठभूमि की जांच करना सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है।
प्रताप सिंह ने कहा कि अगर महिला पाकिस्तान के किसी से ऑनलाइन बातचीत कर रही थी या उसके इरादे संदिग्ध थे तो यह जानकारी सरकार के पास होनी चाहिए थी। अगर समय पर जांच होती तो उसे बॉर्डर पार करने से पहले ही रोक दिया जाता। जांच प्रक्रिया को और सख़्त करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जत्थे के साथ जाकर ऐसी गलती या गलत कदम न उठा सके। उन्होंने कहा कि महिला को ऐसा कदम उठाने से पहले अपने परिवार और अपनी कौम के सम्मान के बारे में सोचना चाहिए था। ऐसा व्यवहार पूरी सिख कौम की छवि पर असर डालता है।
(रिपोर्ट: मोनी देवी, लाइव हिन्दुस्तान)



