TMC के 9 दिग्गजों को अपने ही बूथ पर नहीं मिले वोट, ममता की हार पर चुनाव आयोग की रिपोर्ट

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Mamata Banerjee: हैरान करने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई मौजूदा मंत्रियों को अपने ही घरेलू वॉर्डों और उन सीटों पर शिकस्त झेलनी पड़ी है, जिन्हें कभी टीएमसी का अभेद्य गढ़ माना जाता था।

TMC के 9 दिग्गजों को अपने ही बूथ पर नहीं मिले वोट, ममता की हार पर चुनाव आयोग की रिपोर्ट

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई मजबूत किलों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा जारी बूथ स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि टीएमसी के प्रमुख 36 नेताओं में से केवल 14 नेता ही अपनी सीट बचा पाए हैं। टीएमसी 22 दिग्गज नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

हैरान करने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई मौजूदा मंत्रियों को अपने ही घरेलू वॉर्डों और उन सीटों पर शिकस्त झेलनी पड़ी है, जिन्हें कभी टीएमसी का अभेद्य गढ़ माना जाता था। 16 वरिष्ठ टीएमसी नेता अपनी सीटों के महज एक-तिहाई या उससे भी कम पोलिंग बूथों पर जीत दर्ज कर सके।

भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी का दबदबा

भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी ने 2021 के उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। वहां इस बार भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें करारी शिकस्त दी। यह लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव है जब शुभेंदु ने ममता बनर्जी को पराजित किया है। भवानीपुर के कुल 270 पोलिंग बूथों में से ममता बनर्जी केवल 62 बूथों पर ही बढ़त बना सकीं।

ममता बनर्जी ने अपने घरेलू पोलिंग स्टेशन बूथ संख्या 207 पर 63.33% वोट शेयर के साथ जीत जरूर दर्ज की, लेकिन वह पूरी सीट बचाने के लिए नाकाफी रहा। ममता केवल 54 बूथों पर 50% से अधिक वोट हासिल कर पाईं। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के 197 बूथों पर 50% से अधिक वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत हासिल की, जिसमें 44 बूथ ऐसे थे जहां उन्हें 80% से अधिक वोट मिले।

3 मंत्रियों को नहीं मिला 15% बूथों पर भी समर्थन

टीएमसी के चार प्रमुख चेहरे और मंत्री सुजीत बोस, ब्रात्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य और प्रदीप मजूमदार अपनी सीटों के कुल पोलिंग बूथों में से 15% बूथों पर भी जीत हासिल नहीं कर सके। इन चारों ही मंत्रियों को भाजपा उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से हराया। केवल तीन टीएमसी मंत्री मोहम्मद गुलाम रब्बानी, अखरुज्जमां और सबीना यास्मिन ही ऐसे रहे जिन्होंने अपनी सीटों के 80% से अधिक पोलिंग बूथों पर शानदार जीत दर्ज की।

अपने ही घर में घिरे नेता

आंकड़ों के मुताबिक, इन 36 प्रमुख नेताओं में से 25 नेता उसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड थे, जहां से वे चुनाव लड़ रहे थे। इन 25 नेताओं में से केवल 9 नेता अपने घरेलू पोलिंग बूथ पर जीत दर्ज कर सके, जिनमें से 6 अंततः अपनी पूरी सीट हार गए और केवल 3 को ही अंतिम जीत मिली। कुल मिलाकर, अपने घरेलू बूथ पर जीतने वाले 16 वरिष्ठ टीएमसी नेताओं में से सिर्फ 6 ही अपनी विधानसभा सीट जीत पाए।

भाजपा की रणनीति रही सफल

आंकड़े बताते हैं कि टीएमसी के दिग्गजों को बेदखल करने के लिए भाजपा ने बेहद रणनीतिक जीत दर्ज की। जिन 22 सीटों पर टीएमसी के बड़े नेता हारे उनमें से 15 सीटें ऐसी थीं जहां भाजपा ने कुल बूथों के 30% से भी कम हिस्से पर 50% से अधिक वोट शेयर हासिल किया था, फिर भी वे सीट जीतने में कामयाब रहे। भाजपा के सौरव सिकदार ने पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को हरा दिया, जबकि सिकदार केवल 3.78% बूथों पर ही 50% से अधिक वोट शेयर हासिल कर पाए थे।

जीत का बड़ा अंतर

जिन 22 सीटों पर टीएमसी के दिग्गज हारे, उनमें से 16 सीटों पर आधे से अधिक पोलिंग बूथों में भाजपा उम्मीदवार और टीएमसी उम्मीदवार के बीच 10 प्रतिशत से अधिक वोटों का फासला था। दूसरी तरफ, टीएमसी के जो 14 प्रमुख नेता चुनाव जीते हैं उनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चंद्रनाथ सिन्हा (बोलपुर) और पुलक रॉय (उलूबेरिया दक्षिण) शामिल हैं। ये दोनों नेता अपनी सीटों के आधे से अधिक बूथों पर भाजपा से 10% से अधिक वोटों से पिछड़ने के बावजूद अंतिम रूप से सीट जीतने में सफल रहे। टीएमसी के लिए सबसे एकतरफा और बड़ी जीत गोलपोखर में मोहम्मद गुलाम रब्बानी और सुजापुर में सबीना यास्मिन की सीटों पर दर्ज की गई।

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Himanshu Jha

लेखक के बारे में

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बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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