कैसे होगा महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का परिसीमन, टीम में कौन-कौन? तीन विधेयकों में और क्या
केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए तीन महत्वपूर्ण विधेयकों के मसौदे जारी कर दिए हैं। इन विधेयकों के माध्यम से नई जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा। साथ ही लोकसभा की मौजूदा 543-545 सीटों को बढ़ाकर लगभग 850 तक करने का प्रावधान किया गया है।

केंद्र की मोदी सरकार ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए तीन महत्वपूर्ण विधेयकों के मसौदे जारी कर दिए हैं। इन विधेयकों के माध्यम से नए जनगणना के आधार पर परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा। साथ ही लोकसभा की मौजूदा 543-545 सीटों को बढ़ाकर लगभग 850 तक करने का प्रावधान किया गया है। इन बदलावों के जरिए संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की लंबे समय से लंबित मांग को भी अमल में लाया जाएगा। सरकार द्वारा जारी इस विधायी पैकेज में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026, परिसीमन विधेयक-2026 और संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक-2026 शामिल हैं। ये विधेयक 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान 106वां संशोधन) पर आधारित हैं, जिसमें महिलाओं के आरक्षण को भविष्य की जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था। सरकार ने 1971 की जनगणना पर आधारित दशकों पुरानी 'फ्रीज' को हटाने का फैसला किया है, जिससे महिलाओं का आरक्षण अब जल्द लागू हो सकेगा।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
बताया जा रहा है कि सरकार का मुख्य लक्ष्य संवैधानिक रोक को दूर करना है, जिसके कारण लोकसभा और विधानसभाओं की सीटें 1971 की जनगणना पर फ्रीज थीं। नए संशोधनों से संसद द्वारा अधिसूचित 'नवीनतम प्रकाशित जनगणना आंकड़ों' के आधार पर परिसीमन संभव हो जाएगा। इससे वर्तमान जनसंख्या पैटर्न के अनुसार सीटों का व्यापक पुनर्वितरण होगा। संशोधन के बाद राज्यों से लोकसभा सदस्यों की अधिकतम संख्या 815 और संघ राज्य क्षेत्रों से 35 हो जाएगी, जिससे लोकसभा का कुल आकार बढ़ जाएगा और संसदीय बहुमत का गणित भी बदल जाएगा।
संविधान में प्रस्तावित बदलाव
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 लोकसभा की संरचना से जुड़े अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसमें निचले सदन की कुल सदस्य संख्या को मौजूदा 550 की सीमा से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है। अनुच्छेद 81(2) और (3) में 1971 की जनगणना पर आधारित फ्रीज को हटाया जाएगा। विधेयक अनुच्छेद 82 के शीर्षक को 'प्रत्येक जनगणना के बाद पुनर्समायोजन' से बदलकर 'निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्समायोजन' करने का प्रस्ताव रखता है। साथ ही राज्य विधानसभाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण से संबंधित अनुच्छेदों में भी 2001 की बजाय संसद द्वारा तय 'जनगणना' को आधार बनाने का प्रावधान किया गया है।
परिसीमन के लिए संस्थागत व्यवस्था
परिसीमन विधेयक-2026 इस प्रक्रिया के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करता है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली परिसीमन आयोग का गठन होगा, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और राज्य निर्वाचन आयुक्त (SECs) सदस्य के रूप में शामिल होंगे। आयोग को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां दी जाएंगी। आयोग राज्यों में सीटों का आवंटन, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण और SC-ST तथा महिलाओं के लिए आरक्षण तय करेगा। आयोग को नए जनगणना आंकड़ों के अलावा भौगोलिक सघनता, प्रशासनिक इकाइयों, संचार और सार्वजनिक सुविधाओं को भी ध्यान में रखना होगा।
महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण
इस पूरे अभ्यास का मुख्य उद्देश्य 2023 के महिलाओं के आरक्षण कानून को प्रभावी बनाना है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में कुल सीटों का एक-तिहाई हिस्सा (SC/ST आरक्षण के अंदर भी) महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। आरक्षित क्षेत्रों को हर परिसीमन चक्र के बाद घुमाया जाएगा। यह आरक्षण शुरू में 15 वर्षों के लिए होगा, जिसे संसद आगे बढ़ा सकती है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक के उद्देश्यों में लिखा है कि 1971 की जनगणना पर फ्रीज रखना जनसंख्या नियंत्रण का उद्देश्य पूरा करता था, लेकिन अब देश की जनसांख्यिकी में बड़े बदलाव आ चुके हैं। अंतर-राज्यीय प्रवास, शहरीकरण और असमान वृद्धि से असमानताएं बढ़ गई हैं। इसलिए अगली जनगणना और परिसीमन में लगने वाले समय को देखते हुए महिलाओं की भागीदारी में देरी नहीं होनी चाहिए। संघ राज्य क्षेत्र विधेयक दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी के कानूनों में जरूरी संशोधन करता है ताकि नए परिसीमन और महिला आरक्षण को वहां भी लागू किया जा सके।
बदल जाएगी देश की सियासत?
सरकार के इस कदम से राज्यों के बीच सीटों के पुनर्वितरण का संवेदनशील मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। 1970 के दशक में जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए लगाई गई फ्रीज की वजह से दक्षिण भारतीय राज्यों ने अपनी सीटें बरकरार रखीं, जबकि उत्तर के हिंदी पट्टी राज्यों में जनसंख्या ज्यादा बढ़ी। नई परिसीमन से हिंदी पट्टी राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है, जिससे दक्षिण के राज्यों का सापेक्षिक वजन कम होने की आशंका है। हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि राज्यों के मौजदा आनुपातिक हिस्से पर असर नहीं पड़ेगा। परिसीमन आयोग को इस वादे को पूरा करने वाला फॉर्मूला तैयार करना होगा। विधेयकों में प्रक्रियागत सुरक्षा भी रखी गई है, जिसमें मसौदा प्रकाशन, आपत्तियां मंगवाना और सार्वजनिक सुनवाई शामिल है। आयोग के अंतिम आदेश कानून की तरह मान्य होंगे और अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
विपक्षी दलों ने महिलाओं के आरक्षण का समर्थन किया है, लेकिन परिसीमन के व्यापक प्रभावों को लेकर अभी से ही अलर्ट हैं। कुछ दलों ने OBC महिलाओं के लिए अतिरिक्त कोटा की मांग भी की है। इन बदलावों से चुनावी राजनीति पर गहरा असर पड़ने की उम्मीद है। लोकसभा के विस्तार से बहुमत का आंकड़ा बढ़ेगा, गठबंधन की राजनीति प्रभावित हो सकती है और आरक्षित सीटों का घुमाव पार्टियों की रणनीति को बदल सकता है।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
और पढ़ें


