ममता की टीम में 10 में से 8 लोग चोर; TMC छोड़ते ही मदन मित्रा भड़के, खुद का गला काटने की बात क्यों कही?
अभिषेक बनर्जी के पार्टी में बढ़ते कद और कार्यशैली पर निशाना साधते हुए मदन मित्रा ने कहा कि जब अभिषेक राजनीति में आए तो उन्होंने देखा कि सामने तीन वरिष्ठ नेता पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय और सुब्रत बख्शी चेहरे के तौर पर मौजूद हैं।

Madan Mitra: पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से ठीक पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा सपरिवार समन किए जाने के बाद कामरहाटी के कद्दावर विधायक मदन मित्रा ने मंगलवार रात को ही ऋतब्रत गुट से संपर्क किया और सुबह होते ही कालीघाट तृणमूल यानी कि ममता बनर्जी के आधिकारिक गुट को अलविदा कह दिया। पार्टी छोड़ने के तुरंत बाद मदन मित्रा ने ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए।
बांग्ला समाचार चैनल एबीपी आनंदा को दिए एक इंटरव्यू के दौरान मदन मित्रा ने ममता बनर्जी और विशेष रूप से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कई सनसनीखेज दावे किए।
मदन मित्रा की खुली चुनौती- मैं गला काट लूंगा
इस दौरान जब मदन मित्रा से उनके आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में कहा, "मैं यह साबित कर दूंगा कि आपकी टीम के 10 में से 8 लोग चोर हैं। चोर, चोर, चोर! अगर आप यह साबित कर दें कि मदन मित्रा चोर है, तो मैं अपने हाथों से अपना गला काट लूंगा। यह मेरी खुली चुनौती है।"
उनसे जब चुटकी लेते हुए पूछा गया कि जिन 8 चोरों की बात वह कर रहे हैं वे अब ऋतब्रत शिविर में उनके बगल की कुर्सी पर ही बैठेंगे तो मदन मित्रा ने कहा, "इसमें कुछ नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे आखिरकार चले ही जाएंगे।"
अभिषेक बनर्जी से बड़ा क्रिमिनल दिमाग किसी का नहीं
अभिषेक बनर्जी के पार्टी में बढ़ते कद और कार्यशैली पर निशाना साधते हुए मदन मित्रा ने कहा कि जब अभिषेक राजनीति में आए तो उन्होंने देखा कि सामने तीन वरिष्ठ नेता पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय और सुब्रत बख्शी चेहरे के तौर पर मौजूद हैं। अभिषेक ने इन नेताओं को आगे रखकर पीछे से अपना खेल खेलना शुरू किया। मदन मित्रा ने आगे कहा, "अगर यह क्रिमिनल पॉलिटिक्स है तो मैं कहता हूं कि आपराधिक राजनीति में अभिषेक बनर्जी से बड़ा आपराधिक प्रवृत्ति किसी का नहीं है। बाकी सीपीआईएम (CPM) और बीजेपी (BJP) तो उनके सामने बच्चे पॉलिटिशियन हैं।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें इस बयान के बाद डर नहीं लग रहा तो मदन मित्रा ने कहा, "बिल्कुल डर नहीं लग रहा। जब इन लोगों के दांत टूट जाते हैं तब ये जोर-जोर से रोते हैं। मूल्य तब तक होता है जब तक दांत और पंजे सलामत हों। अब कुछ दिन शांति से सो जाओ, क्योंकि डर बाहर हो चुका है और भरोसा अंदर आ गया है।"
"मुझ पर हमला करने की औकात किसी में नहीं"
जब मदन मित्रा से पूछा गया कि अगर अभिषेक बनर्जी इतने शक्तिशाली हैं और उन्हें ममता बनर्जी का पूरा संरक्षण प्राप्त है तो इस बयान के बाद मदन मित्रा पर भारी अत्याचार होना चाहिए था, लेकिन क्या ऐसा हुआ है? इस पर मदन मित्रा ने पलटवार करते हुए कहा, "अत्याचार करने के लिए भी हिम्मत की जरूरत होती है। वह औकात अभिषेक बनर्जी में नहीं है। मदन मित्रा पर हमला करने की औकात अभी तक किसी माई के लाल में पैदा नहीं हुई है।"
अभिषेक बनर्जी के जनाधार पर सवाल उठाते हुए उन्होंने अंत में दावा किया कि अभिषेक के साथ उनके खुद के मोहल्ले के लोग तक नहीं हैं। उन्होंने माकपा के मुखपत्र गणशक्ति का हवाला देते हुए कहा कि सीपीआईएम कहती है कि एक मोहल्ले में 37 घर हैं, जिसके आंकड़े सिलसिलेवार तरीके से छापे गए, लेकिन अभिषेक की तरफ से आज तक उस पर कोई खंडन नहीं दिया गया।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
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