खाली बैठा भारत का भविष्य: देश में 8.7 करोड़ युवा बेरोजगार, ना पढ़ाई और ना नौकरी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।
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नीति आयोग के अनुसार, कमजोर वित्तीय स्थिति वाले NEET युवाओं और महिलाओं को किफायती या सब्सिडी वाली ट्रेनिंग के साथ-साथ वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।

खाली बैठा भारत का भविष्य: देश में 8.7 करोड़ युवा बेरोजगार, ना पढ़ाई और ना नौकरी
नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट ने चिंताजनक खुलासे किए हैं।

नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट ने चिंताजनक खुलासे किए हैं। भारत में 15 से 29 वर्ष की आयु के लगभग 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न कोई नौकरी कर रहे हैं और न ही किसी प्रकार का ट्रेनिंग ले रहे हैं। ऐसे युवाओं को NEET (Not in Education, Employment, and Training) श्रेणी में रखा गया है। इस रिपोर्ट में आयोग ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और स्थानीय मांग के अनुसार ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये अनुमान वर्ष 2021 में आयोजित राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के आंकड़ों पर आधारित हैं।

कौशल विकास योजनाओं का अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए नीति आयोग ने भारत के कार्यबल और शिक्षार्थियों को 5 प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है। स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, औपचारिक और अनौपचारिक कार्य, NEET श्रेणी के युवा, महिलाएं और कमाई के साथ पढ़ाई करने वाले लोग। रिपोर्ट में कहा गया है कि NEET श्रेणी के युवा आय की कमी और पिछली शिक्षा पर हुए खर्च के वित्तीय बोझ से दबे होते हैं। ऐसे में छात्र अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति के बीच भारी शुल्क वाले स्किल ट्रेनिंग कोर्स का खर्च नहीं उठा सकते।

नीति आयोग के अनुसार, कमजोर वित्तीय स्थिति वाले NEET युवाओं और महिलाओं को किफायती या सब्सिडी वाली ट्रेनिंग के साथ-साथ वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। रिपोर्ट में इस बात जोर दिया गया है कि सभी श्रेणियों के लिए सीखने के साथ कमाने का अवसर देना सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

डिग्री के बाद भी रोजगार का संकट

रिपोर्ट में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई है कि भारत में केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक ही अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप नौकरी कर रहे हैं। आयोग ने कहा है कि कम आय वाले परिवारों के छात्र पहले से ही कॉलेज फीस और ट्यूशन के खर्चों से परेशान रहते हैं। पारंपरिक डिग्री के साथ अलग से पैसे देकर स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग में निवेश करना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं होता है। इसकी वजह से कई ग्रैजुएट युवाओं को पढ़ाई के बाद परिवार को आर्थिक सहारा देने के लिए कम वेतन वाली ही नौकरी क्यों नहीं मिलती है वह उसे स्वीकार कर लेते हैं। यहां ऐसे युवाओं की संख्या भी काफी है जो काम हासिल करने के लिए संघर्ष करते हैं और अंततः NEET श्रेणी में शामिल हो जाते हैं।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

नीति आयोग ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश के नागरिकों को निरंतर सीखने, कमाने और आगे बढ़ने के योग्य बनाना आवश्यक है। इसमें कौशल विकास की भूमिका प्रमुख है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


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