एयर इंडिया के 70 फीसदी विमानों में तकनीकी गड़बड़ी, सरकार ने बताए चौंकाने वाले आंकड़े
सरकार ने लोकसभा में बताया कि एयर इंडिया के 10 में से सात विमानों में कोई ना कोई तकनीकी खामी पाई गई। सरकार ने बताया कि जनवरी 2025 के बाद से अलग-अलग एयरलाइन के 377 विमानों में गड़बड़ी का पता चला है।

एयर इंडिया के विमानों में तकनीकी खराबी की घटनाओं को लेकर सरकार ने संसद में बताया है कि एयरलाइन के हर 10 में से 7 विमानों ने में कोई ना कोई तकनीकी खामी पाई गई है। इसका मतलब है कि एयर इंडिया के 70 फीसदी विमान तकनीकी रूप से बीमार हैं। केंद्र ने बताया कि सभी एयरलाइन्स में सबसे ज्यादा तकनीकी समस्या एयर इंडिया के विमानों में पाई गई है। सरकार ने बताया कि जनवरी 2025 से लेकर इस साल तीन फरवरी तक विभिन्न एयरलाइन के कुल 377 विमानों में बार-बार गड़बड़ी होने का पता चला है।
405 विमानों की हुई जांच
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि बार-बार होने वाली गड़बड़ी के सिलसिले में इंडिगो के 405 विमानों का विश्लेषण किया गया और इस साल तीन फरवरी तक 148 विमानों में बार-बार गड़बड़ी होने की बात सामने आई। मंत्री द्वारा लिखित जवाब में दिये गए आंकड़ों के अनुसार, विश्लेषण किये गए 166 एयर इंडिया विमानों में से 137 में, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 विमानों में से 54 में बार-बार होने वाली गड़बड़ी की बात सामने आई।
स्पाइसजेट के 16 विमानों में गड़बड़ी
इसके अलावा, स्पाइसजेट के 43 विमानों में से 16 में बार-बार गड़बड़ी होने का पता चला तथा आंकड़ों के अनुसार, विश्लेषण किये गए 32 विमानों में से कुल 14 अकासा एअर विमानों में बार-बार होने वाली गड़बड़ी की बात सामने आई। इसी दौरान, विमानन सुरक्षा नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने भी 3,890 निगरानी निरीक्षण किए। मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि पिछले तीन वर्षों में उड़ानों में तकनीकी गड़बड़ी के मामलों की संख्या में कमी आई है और गत वर्ष ऐसी केवल 353 घटनाएं हुईं।
मोहोल ने बताया कि वर्ष 2024 में तकनीकी गड़बड़ी के कुल 421 मामले सामने आए, जो इसके पिछले वर्ष की 448 घटनाओं से कम है। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के पास सभी विमान और हवाई अड्डा संचालकों के लिए नियमों और नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुपालन की निगरानी के लिए एक व्यवस्थित सुरक्षा निगरानी तंत्र मौजूद है। उन्होंने बताया कि इसके तहत निगरानी, अचानक जांच और नियामक ऑडिट की जाती है।
इन ऑडिट के दौरान कमियों का पता चलने पर एयरलाइंस से संपर्क किया जाता है, ताकि प्रभावी और सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके। मंत्री ने कहा कि यदि नियमों का कोई उल्लंघन या गैर अनुपालन पाया जाता है, तो डीजीसीए द्वारा प्रवर्तन कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि डीजीसीए ने इस सिलसिले में एक परिपत्र भी जारी किया है, जिसके तहत एयरलाइन को सभी घटनाओं की रिपोर्ट डीजीसीए को देना अनिवार्य है।

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Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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