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600 परिवारों पर बेदखली का खतरा, SC पहुंचा वक्फ बोर्ड; हाईकोर्ट के आदेश पर लगी रोक

600 परिवारों पर बेदखली का खतरा, SC पहुंचा वक्फ बोर्ड; हाईकोर्ट के आदेश पर लगी रोक

संक्षेप:

यह मामला मुनंबम की करीब 135 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1950 में सिद्दीक सैत नामक व्यक्ति ने फारूक कॉलेज को दान में दिया था। उस समय इस भूमि पर स्थानीय परिवार पहले से ही रह रहे थे।

Dec 13, 2025 09:16 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल के एर्नाकुलम जिले की मुनंबम भूमि को वक्फ संपत्ति न मानने संबंधी केरल हाईकोर्ट की टिप्पणी पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई तक भूमि की यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी, 2026 को होगी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि केरल सरकार द्वारा गठित जस्टिस सी.एन. रामचंद्रन नायर जांच आयोग के कामकाज पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और आयोग अपनी जांच जारी रख सकता है।

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पीठ ने अपने आदेश में कहा- नोटिस जारी किया जाए, छह हफ्ते में जवाब दाखिल हो। मामले को 27 जनवरी 2026 को सूचीबद्ध किया जाए। तब तक हाईकोर्ट के उस आदेश की घोषणा कि विवादित संपत्ति वक्फ नहीं है, स्थगित रहेगी और यथास्थिति बनाए रखी जाए। यह स्पष्ट किया जाता है कि हमने जांच आयोग के काम पर कोई रोक नहीं लगाई है।

अदालत ने यह अंतरिम आदेश केरल वक्फ संरक्षण वेदी की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर पारित किया। याचिका में केरल हाईकोर्ट की उस डिवीजन बेंच के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने राज्य सरकार द्वारा गठित जांच आयोग को वैध ठहराया था और साथ ही यह टिप्पणी की थी कि मुनंबम की जमीन वक्फ संपत्ति नहीं है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला मुनंबम की करीब 135 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1950 में सिद्दीक सैत नामक व्यक्ति ने फारूक कॉलेज को दान में दिया था। उस समय इस भूमि पर स्थानीय परिवार पहले से ही रह रहे थे। बाद में कॉलेज ने भूमि के कुछ हिस्से इन्हीं निवासियों को बेच दिए।

विवाद तब गहराया जब 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने इस जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत कर दिया, जिससे पहले की गई बिक्री को अवैध माना गया। इसके चलते 600 से अधिक परिवारों को बेदखली का डर सताने लगा और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। वक्फ बोर्ड के इस फैसले को कोझिकोड वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई, जहां मामला अभी लंबित है।

हाईकोर्ट में क्या हुआ?

भूमि विवाद और बढ़ते तनाव के बीच, नवंबर 2024 में केरल सरकार ने इस मुद्दे का समाधान तलाशने के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सी.एन. रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया। इसके खिलाफ केरल वक्फ संरक्षण वेदी ने हाईकोर्ट का रुख किया और तर्क दिया कि वक्फ अधिनियम के तहत आने वाले मामलों में राज्य सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने इस दलील से सहमति जताते हुए आयोग को रद्द कर दिया।

हालांकि, अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल न्यायाधीश के फैसले को पलट दिया। डिवीजन बेंच ने न केवल राज्य सरकार के आयोग को वैध ठहराया, बल्कि यह भी कहा कि 2019 में वक्फ बोर्ड द्वारा जमीन का पंजीकरण कानून के विपरीत था। अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि जमीन को वक्फ घोषित करना एक तरह की जमीन पर कब्जा करने की रणनीति जैसा प्रतीत होता है और 1950 का दस्तावेज वक्फनामा नहीं, बल्कि एक गिफ्ट डीड था।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका

डिवीजन बेंच के इन निष्कर्षों को चुनौती देते हुए वक्फ संरक्षण वेदी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने यह तय करके कि जमीन वक्फ है या नहीं, अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसला दिया, जबकि यह मुद्दा पहले से ही वक्फ ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। साथ ही, यह भी तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट का फैसला कार्यपालिका को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की अनुमति देता है, जहां कानूनन एक अलग वैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है।

संक्षिप्त सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए भूमि की स्थिति को यथावत रखने का आदेश दिया, लेकिन जांच आयोग को अपना काम जारी रखने की अनुमति दे दी। अब सभी की निगाहें 27 जनवरी, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील भूमि विवाद की आगे की दिशा तय होगी।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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