
कोई सुप्रीम कोर्ट गलती से नहीं पहुंचता, खुद के CJI बनने पर ऐसा क्यों बोले जस्टिस सूर्य कांत
CJI: सोमवार को राष्ट्रपति भवन में ईश्वर के नाम पर हिंदी में शपथ लेने के तुरंत बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 53वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। सीजेआई कांत की अगुवाई वाली पीठ ने अपने पहले दिन लगभग दो घंटे तक 17 मामलों की सुनवाई की।
Supreme Court: जस्टिस सूर्य कांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं। किसान परिवार से आने वाले नए सीजेआई अपनी कानूनी यात्रा का श्रेय भी खेती से मिले सबक को देते हैं। पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने कहा कि हर किसान जानता है कि उपज को तेजी से नहीं बढ़ाया जा सकता और इसमें समय लगता है और उसका ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस सबक ने कानून के प्रति उनका नजरिया ही बदल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने सफर पर खुलकर बात की।
क्या सीजेआई बनने का पहले से था सपना
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान सीजेआई कांत से सवाल किया गया कि क्या इस पद पर बैठना उनका सपना था। इसपर उन्होंने कहा कि हर वो व्यक्ति जो एडवोकेट के तौर पर शुरुआत करता है, कुछ अलग करने का सपना देखता है। मैं भी अलग नहीं था। उन्होंने कहा, 'एक युवा वकील होने के नाते मैं सार्थक करियर चाहता था। जब तक मैं एडवोकेट रहा, तब तक न्यायपालिका की अगुवाई करने का ख्याल कभी मुझे नहीं आया।'
उन्होंने कहा, 'मैंने अपना करियर प्लान नहीं किया। सरकारी वकील से लेकर हरियाणा का एडवोकेट जनरल और हाईकोर्ट जज बनने का सिलसिला अपने आप हुआ।' उन्होंने कहा, 'एक वकील और संवैधानिक कोर्ट का जज होने के दौरान एक चीज हमेशा रही कि मैं कानून और कोर्ट की कला के प्रति जुनूनी रहा। मुझे अपने सीनियर्स से मार्गदर्श मिला और जूनियर्स से सहयोग मिला। ये कानून में मेरे करियर के असली आर्किटेक्ट हैं।'
क्या किस्मत पर निर्भर होता है CJI बनना
अखबार से बातचीत में सीजेआई कांत ने कहा, 'मुख्य न्यायाधीश बनने की यात्रा लंबी होती है, जो सालों की कड़ी मेहनत और निष्पक्षता और संतुलन के साथ फैसला सुनाने की क्षमता पर बनी होती है। सुप्रीम कोर्ट में (जज के तौर पर) कोई भी गलती से नहीं पहुंचता है। यह दशकों तक मुश्किल मामलों को सुनने, संस्था की जिम्मेदारियों को संभालने, लगातार निष्पक्षता दिखाने, स्पष्ट सोच और संयम दिखाने के बाद आता है।'
उन्होंने कहा, 'एक जज का बर्ताव और कोर्ट में व्यवहार, सहकर्मियों के बीच प्रोत्साहन लाने की क्षमता और मूल्यों के प्रति अडिग प्रतिबद्धता, ये सब मिलकर नेतृत्व की खूबियां तय करते हैं। लेकिन हां टाइमिंग और हालात नियुक्तियों में छोटी भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन ये कभी योग्यता, विश्वसनीयता और चरित्र की जगह नहीं ले सकते। सीजेआई पद पर बैठा हर जज पूरी जिंदगी मेहनत करता है।'
कैसा रहा पहला दिन
सीजेआई कांत की अगुवाई वाली पीठ ने अपने पहले दिन लगभग दो घंटे तक 17 मामलों की सुनवाई की। सोमवार को राष्ट्रपति भवन में ईश्वर के नाम पर हिंदी में शपथ लेने के तुरंत बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 53वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। सीजेआई के तौर पर पहली बार उच्चतम न्यायालय पहुंचने पर उन्होंने न्यायालय परिसर में महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने अदालत कक्ष संख्या एक में तीन न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर भी शामिल थे।





