फारस की खाड़ी में फंसे हैं 28 भारतीय जहाज, जिन पर 778 नाविक सवार; रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल के निर्देश
मंत्रालय फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा और बदलती समुद्री स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। पश्चिम एशिया क्षेत्र की समुद्री स्थिति को देखते हुए भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और तैयारी के उपायों को मजबूत किया गया है।
फारस की खाड़ी में 28 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जिन पर 778 नाविक सवार हैं। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने प्रेसवार्ता में बताया कि इनमें से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी भाग में 677 नाविकों के साथ मौजूद हैं, जबकि चार जहाज चालक दल के 101 सदस्यों के साथ पूर्वी भाग में हैं। भारत का बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय इन जहाजों की सुरक्षा की लगातार निगरानी कर रहा है।
सिन्हा ने कहा, ''हम सभी जहाजों की सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से निगरानी कर रहे हैं। अधिकारी, जहाज प्रबंधक और भर्ती एजेंसियां भारतीय दूतावासों और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए समन्वय कर रहे हैं।''
बदलती समुद्री स्थिति पर लगातार नजर
उन्होंने कहा कि मंत्रालय फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा और बदलती समुद्री स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और पश्चिम एशिया क्षेत्र की समुद्री स्थिति को देखते हुए भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और तैयारी के उपायों को मजबूत किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इन जहाजों पर लदे माल की कीमत लगभग 10,000 करोड़ रुपये है, जो वर्तमान में संकट में है।
'रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल' का सख्ती से पालन करने का निर्देश
पोत परिवहन महानिदेशालय द्वारा सलाह जारी की गई है जिसमें भारतीय ध्वज वाले सभी जहाजों और भारतीय नाविकों को उन्नत सुरक्षा उपायों को अपनाने और वास्तविक समय के विवरण प्रस्तुत करने सहित 'रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल' का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। सिन्हा ने कहा कि पूरे भारत में बंदरगाहों का संचालन सुचारू बना हुआ है और प्रमुख बंदरगाहों ने परिचालन संबंधी उपाय लागू किए हैं।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


