2014 से अब तक पाकिस्तान से कितने भारतीय मछुआरे लौटे? संसद में सरकार ने दी ये जानकारी

Feb 12, 2026 10:53 pm ISTDevendra Kasyap भाषा
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राज्यसभा में सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण 2014 से अब तक पाकिस्तान से 2661 भारतीय मछुआरे स्वदेश वापस आए हैं। उच्च सदन में विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

2014 से अब तक पाकिस्तान से कितने भारतीय मछुआरे लौटे? संसद में सरकार ने दी ये जानकारी

राज्यसभा में सरकार ने गुरुवा को कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण 2014 से अब तक पाकिस्तान से 2661 भारतीय मछुआरे स्वदेश वापस आए हैं। उच्च सदन में विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण को उच्च प्राथमिकता देती है। सरकार से पाकिस्तान में कैद उन भारतीय मछुआरों की संख्या पूछी गई, जिन्हें सजा पूरी होने के बावजूद रिहा नहीं किया गया है।

सिंह ने कहा कि भारत और पाकिस्तान हर साल एक जनवरी और एक जुलाई को एक-दूसरे की जेलों में बंद मछुआरों और नागरिक कैदियों की सूचियां साझा करते हैं। एक जनवरी 2026 को साझा की गई सूचियों के अनुसार, पाकिस्तान ने 199 भारतीय/भारतीय मछुआरे माने जा रहे लोगों के हिरासत में होने की बात स्वीकार की।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 183 भारतीय मछुआरे ऐसे हैं, जिनकी सजा पूरी हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार भारतीय मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण को "उच्च प्राथमिकता" देती है। मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को लगातार पाकिस्तान सरकार के समक्ष उठाया जाता है और इस बात पर ज़ोर दिया जाता है कि इस मामले पर विशुद्ध रूप से मानवीय और आजीविका संबंधी आधार पर विचार किया जाना चाहिए। सिंह ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप 2014 से अब तक 2661 भारतीय मछुआरों को पाकिस्तान से स्वदेश भेजा जा चुका है।

उन्होंने कहा कि जैसे ही पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा भारतीय मछुआरों को पकड़े जाने की खबर मिलती है, इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग तुरंत पाकिस्तान सरकार से दूतावासीय (कांसुलर) पहुंच की मांग करने के लिए आवश्यक कदम उठाता है। उन्होंने आगे कहा कि कांसुलर पहुंच के दौरान, भारतीय उच्चायोग के अधिकारी पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय/भारतीय माने जाने वाले मछुआरों से मिलकर उनका हालचाल पूछते हैं और दैनिक उपयोग की कल्याणकारी वस्तुएं वितरित करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय मछुआरों की शीघ्र रिहाई और स्वदेश वापसी के साथ-साथ उनकी नौकाओं की रिहाई के लिए हरसंभव सहायता प्रदान की जाती है। एक अन्य प्रश्न में सरकार से पिछले तीन वर्षों में 'डंकी मार्ग' (अवैध मार्ग) के माध्यम से यूरोप में अवैध प्रवास का प्रयास करने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या पूछी गई। मंत्री ने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों की जानकारी मिली है, जिनमें फर्जी भर्ती प्रस्तावों में शामिल संदिग्ध संस्थाओं ने भारतीय युवाओं सहित नागरिकों को मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से यूरोप सहित विभिन्न देशों में रोजगार के लिए लुभाया है।

सिंह ने कहा कि ऐसे अवैध/बेईमान भर्ती एजेंट की धोखाधड़ी वाली गतिविधियां तब सामने आती हैं जब पीड़ित प्रवासी या उनके रिश्तेदार/मित्र/परिवार के सदस्य, जिन्हें उनके नियोक्ताओं द्वारा धोखा दिया गया है, शिकायत दर्ज कराते हैं, क्योंकि ये भारतीय नागरिक फर्जी भर्ती एजेंट और अवैध चैनलों के माध्यम से अपनी मर्जी से विदेश जाते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप में इस तरह के अवैध प्रवास का प्रयास करने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या के बारे में विशिष्ट आंकड़े "उपलब्ध नहीं हैं"।

मंत्री ने कहा कि भारत सरकार भारतीय नागरिकों के अवैध प्रवास सहित प्रवास के मामलों पर संबंधित विदेशी सरकारों के साथ घनिष्ठ समन्वय में काम करती है। उन्होंने कहा कि भारत ने ऑस्ट्रिया, फ्रांस, डेनमार्क, इटली, जर्मनी और ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों के साथ प्रवासन और आवाजाही साझेदारी समझौते (एमएमपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। सिंह ने कहा कि इन समझौतों का उद्देश्य भारत से कुशल कामगारों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों, विशेषज्ञों, छात्रों और प्रशिक्षुओं की सुरक्षित और नियमित आवाजाही को सुगम बनाना है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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