14 मिनट में 2 बिल पास: बिना डिबेट लोकसभा में अब तक कुल 9 विधेयक पारित, सिर्फ दो में ही बहस

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को खत्म हो रहा है। इस सत्र के दौरान अब तक लोकसभा से कुल 11 बिल पारित हो चुके हैं। इनमें से सिर्फ़ दो पर ही बहस हुई है, जबकि बाकी 9 बिल विपक्ष के विरोध के बीच बिना किसी चर्चा के ही पास कर दिए गए

Lok sabha
लोकसभा ने मात्र 14 मिनट के अंदर केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया।

अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) समेत विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद अपराह्न 2 बजकर 25 मिनट पर दिनभर के स्थगित कर दी गई। हंगामे के बीच ही सदन ने इसी दौरान मात्र 14 मिनट के अंतराल में केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को चर्चा के बिना ध्वनिमत से पारित कर दिया।

संसद के मॉनसून सत्र के चौथे सप्ताह के दूसरे दिन की कार्यवाही भी पिछले तीन सप्ताह की तरह हंगामेदार रही और लगातार 17वें कार्यदिवस को भी सदन में प्रश्नकाल तथा शून्यकाल नहीं चल सके। एक बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजे सदन की बैठक शुरू हुई तो गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 'केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026' चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया। इस दौरान विपक्षी दलों के सांसद अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर सदन में चर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री शाह के जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। हंगामे के बीच ही सदन ने ध्वनिमत से इस विधेयक को पारित कर दिया।

सदन में होता रहा हंगामा, बिल पास होता रहा

इसके बाद, सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया। सदन ने इस विधेयक को भी चर्चा के बिना ही ध्वनिमत से पारित कर दिया। पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर जाकर बैठने और विधेयकों पर चर्चा में भाग लेने का बार-बार आग्रह किया। उन्होंने कहा, ''बहुत महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो रहे हैं। आप लोग सीट पर जाकर बैठिए।''

11 बजे से ही शुरू हो गया था हंगामा

तेन्नेटी ने कहा कि विपक्षी सांसदों ने केरल का नाम बदलकर केरलम करने से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयक पर भी नहीं बोला। हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले, सदन की कार्यवाही 11 बजे शुरू होते ही कांग्रेस और सपा समेत विपक्षी दलों के सदस्य अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए हंगामा करने लगे।

इस सत्र में कुल 11 बिल पारित

बता दें कि संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को खत्म हो रहा है। इस सत्र के दौरान अब तक लोकसभा से कुल 11 बिल पारित हो चुके हैं। इनमें से सिर्फ़ दो पर ही बहस हुई है, जबकि बाकी 9 बिल विपक्ष के विरोध के बीच बिना किसी चर्चा के ही पास कर दिए गए। इससे पहले दिन में, सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद बार-बार कामकाज में रुकावट आने और सदन स्थगित होने पर स्पीकर ओम बिरला ने चिंता जताई। उन्होंने सरकार और विपक्ष, दोनों से अपील की कि वे कोई आम सहमति बनाएं ताकि संसद उन बिलों पर चर्चा कर सके जिनसे "देश में दूरगामी बदलाव" आएंगे।

सभी दलों से सदन चलाने का आग्रह

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी दलों से सदन की कार्यवाही चलाने में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जब छात्रों के आंदोलन पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग पर सरकार ने सहमति दे दी है तो फिर विपक्ष को सदन चलने देना चाहिए। बिरला ने कहा कि सदन सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों को मिलकर चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता चाहती है कि सदन चले और सभी विषयों पर चर्चा हो। उन्होंने कहा कि उन्होंने सोमवार को कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में भी सभी दलों से सदन चलाने का आग्रह किया था।

सदन नहीं चलने से मन व्यथित होता है: ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ''मैंने व्यक्तिगत रूप से कई बार आग्रह किया कि प्रश्नकाल सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसमें सत्ता की जवाबदेही तय होती है और कार्यपालिका में पारदर्शिता आती है।'' उन्होंने विपक्ष की छात्रों से संबंधित प्रमुख मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बीएसी की बैठक में स्पष्ट किया है कि गृह मंत्री इस विषय पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। बिरला ने कहा, ''आपकी प्रमुख मांग पर सरकार ने सहमति जताई है। अब आप सदन चलने दें।'' उन्होंने सदन के भीतर तख्तियां लाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि यह संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा, ''आप लोग सहयोग करें। सदन नहीं चलने से मन व्यथित होता है।'' हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने 11 बजकर चार मिनट पर सदन की बैठक अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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