सिर्फ 10 मिनट दे दीजिए मिलॉर्ड, SC में इस 19 साल के लड़के का हौसला देख CJI भी पिघले; क्या मामला?
NEET 2025–26 में 164 EWS रैंक हासिल करने के बावजूद, अथर्व को कहीं एडमिशन नहीं मिला। इसके बाद उसने एक ऑनलाइन पिटीशन के जरिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सोशल मीडिया पर इस केस की खूब चर्चा है।

अदालत में केस लड़ना आसान काम नहीं होता। खास कर सुप्रीम कोर्ट के हाई टेंशन माहौल में दलील देते समय कई बार बड़े-बड़े वकीलों के भी पसीने छूट जाते हैं। लेकिन हाल ही में एक 19 साल के लड़के ने इस मुश्किल काम को इतनी बखूबी से निभाया है कि उसकी चारों तरफ चर्चा हो रही है। इस लड़के ने अपना हक मांगने के लिए ना सिर्फ मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत के सामने खुद दलील देने का फैसला किया, बल्कि केस को जीतने में भी कामयाब हुआ।
यह कहानी है अथर्व चतुर्वेदी की। मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले 19 वर्षीय NEET अभ्यर्थी अथर्व चतुर्वेदी इन दिनों सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। दरअसल अथर्व चतुर्वेदी ने बीते दिनों 720 में से 530 अंकों के साथ NEET 2024–25 परीक्षा पास की। हालांकि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए रिजर्वेशन लागू करने में राज्य की नाकामी की वजह से उन्हें एडमिशन प्रोसेस से बाहर कर दिया गया।
अथर्व को नहीं मिला था एडमिशन
NEET 2025–26 में 164 EWS रैंक हासिल करने के बावजूद, अथर्व को एडमिशन नहीं मिला और उसने एक ऑनलाइन पिटीशन के जरिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बीते 10 फरवरी को अथर्व ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने अपना केस पेश करने के लिए 10 मिनट मांगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई एक पोस्ट में SC में दलील देते अर्थव का हौसला देखने लायक है।
'मुझे बस 10 मिनट चाहिए'
सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, “सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के अंदर, उसका केस जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच के सामने लिस्टेड था। सीनियर वकीलों से घिरा, एक 19 साल का लड़का अकेला खड़ा था, तैयार और कॉन्फिडेंट। जैसे ही बेंच उठने वाली थी, उसने पूरी हिम्मत जुटाई और कहा, ‘माई लॉर्ड्स, मुझे बस 10 मिनट चाहिए’।” कोर्ट के सामने अथर्व ने संविधान के 103वें संशोधन और आर्टिकल 15(6) और 16(6) का हवाला येदिया। यह प्रावधन प्राइवेट और नॉन-माइनॉरिटी शैक्षणिक संस्थानों में 10 परसेंट EWS रिजर्वेशन को जरूरी बनाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हक में सुनाया फैसला
दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अथर्व को उसके नियंत्रण से बाहर के हालात और राज्य के अधिकारियों द्वारा पहले के न्यायिक निर्देशों का पालन ना करने की वजह से एडमिशन नहीं दिया गया। कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन और मध्य प्रदेश सरकार को एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में MBBS कोर्स में अथर्व का एडमिशन पक्का करने का निर्देश दिया है। अथर्व ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान कहा कि वह शुरू में घबराए हुए थे, लेकिन उन्हें पता था कि कानून उनके पक्ष में है। उन्होंने कहा, “इसलिए मैंने बस नियमों का पालन किया।”
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लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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