अभी एक-दूसरे के खिलाफ बना रहे प्लान, पर भारत में एक साथ बैठेंगे UAE और ईरान
भारत 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने जा रहे हैं। इससे पहले नई दिल्ली में मई में विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। भारत की ओर से रूस, ईरान, यूएई, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण भेज दिया गया है।

BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की 14 और 15 मई को होने जा रही है। खास बात है कि इस बैठक की अध्यक्षता भारत करेगा, जिसमें ईरान और UAE यानी संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल होंगे। खास बात है कि भारत की अगुवाई में होने वाली इस अहम बैठक में कम से कम तीन देश ऐसे हैं, जो अभी एक-दूसरे के साथ संघर्ष कर रहे हैं। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि पश्चिम एशिया के इस संघर्ष पर जल्द ही विराम लग सकता है।
ब्रिक्स समूह में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में विस्तार कर मिस्र, इथोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हो गया। ब्रिक्स देशों की कुल अनुमानित जनसंख्या 3.9 अरब है, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 48 प्रतिशत है।
भारत 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने जा रहे हैं। इससे पहले नई दिल्ली में मई में विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। भारत की ओर से रूस, ईरान, यूएई, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण भेज दिया गया है। रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने रूस की समाचार एजेंसी तास को बताया है कि विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली आएंगे।
तेहरान चाहे भारत जारी करे बयान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान की नई दिल्ली से अपील है कि अध्यक्ष होने के नाते एक औपचारिक बयान जारी किया जाए। इसमें उसके खिलाफ अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए हमले की निंदा की जाए। अब खास बात है कि समूह के ही देश इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं और अमेरिका और इजरायल के साथ भारत के घनिष्ठ संबंध हैं।
क्या हैं मुश्किलें
14 मार्च को भारत की तरफ से कहा गया था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर ब्रिक्स देशों के बीच साझा रुख तय करना मुश्किल है क्योंकि सदस्य देशों के अलग-अलग विचार हैं। हालांकि भारत इस मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश में जुटा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने किसी देश का नाम लिए बगैर कहा कि ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं, जिसकी वजह से समूह के लिए एक साझा रुख तय करना कठिन हो गया है।
भारत फिलहाल इस प्रभावशाली समूह की अध्यक्षता कर रहा है। हाल ही में इस समूह का विस्तार हुआ है और इसमें ईरान और संयुक्त अरब अमीरात समेत कुछ अन्य देशों को शामिल किया गया है। ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में भारत के सामने चुनौती है कि पश्चिम एशिया के इस संघर्ष पर ब्रिक्स का एक साझा रुख कैसे तैयार किया जाए।
जायसवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'ब्रिक्स के कुछ सदस्य फिलहाल पश्चिम एशिया संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं, जिसकी वजह से संघर्ष पर ब्रिक्स का साझा रुख तय करने में समस्या हुई है।' जायसवाल ने कहा, 'हम एक साझा रुख तय करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अलग-अलग विचारों के कारण यह मुश्किल हो रहा है।'
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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