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क्यों बदल रहा है 129 साल पुराना किलोग्राम, जानें इससे जुड़ी सभी जानकारी

किलोग्राम (साभारः New Atlas)

क्यों बदल रही है किलो की परिभाषा? क्यों बदल रहे हैं 129 साल पुरानी इस इकाई को वैज्ञानिक? कैसे होता है इसमें बदलाव? माप की इकाई को लेकर कुछ सवाल तुम्हारे मन में भी होंगे? तुम्हारे इन्हीं सवालों का जवाब दे रही हैं मधु दीवान

कुछ बेचने और खरीदने का अगर तुम खेल खेलते होंगे तो इस खेल में ‘किलोग्राम’ शब्द भी कितनी बार आ चुका होगा। राशन का सामान लेते समय मम्मी-पापा भी दुकानदार से किलोग्राम में ही देने की बात करते हैं। माप की यह इकाई तुम्हारे लिए नई तो नहीं है। लेकिन एक बात जो शायद तुम नहीं जानते होंगे, तुम्हारे लिए नई जानकारी ये है कि अब किलोग्राम वैसा नहीं रहेगा, जैसा अब तक था। किलोग्राम को अब एक नई परिभाषा दी जा रही है। तुम्हारे सिलेबस में भी अब किलोग्राम एक नई परिभाषा के साथ पढ़ाया जाएगा। 20 मई, 2019 से वैज्ञानिक किलोग्राम को मापने के नए तरीके का प्रयोग करेंगे। इस बदलाव का असर हमारे और तुम्हारे जीवन पर नहीं पड़ेगा। मगर तुम्हारे लिए यह जानना जरूरी है कि असल में इसका असर किन चीजों पर पड़ेगा और दुनिया में होने जा रहे किलोग्राम के इस बदलाव की पूरी कहानी है क्या!

क्या हुआ तिजोरी में?
माप की इकाई में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी, यह जानने से पहले तुम्हें यह मालूम होना चाहिए कि किलोग्राम को प्लेटिनम से बने एक सिलेंडरनुमा बाट के वजन से परिभाषित किया गया है, जिसे ‘ली ग्रैंड के’ कहा जाता है। यह खास चीज पेरिस में इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स (बीआईपीएम) के पास साल 1889 से बंद है।

बताया जाता है कि प्रदूषण और अन्य कारणों के चलते तिजोरी में रखे इस सिलेंडर के द्रव्यमान माप में बदलाव आ रहा है। कुछ साल पहले भी इसमें कुछ माइक्रोग्राम का फर्क आया था। हालांकि यह बहुत छोटा बदलाव है, जिसका हमारे जीवन पर असर नहीं होगा। मगर यह फर्क वैज्ञानिक गणनाओं के लिए काफी गंभीर मामला है। ऐसे में इससे किसी भी वस्तु की माप करने पर अशुद्धि सामने आ सकती है। वैज्ञानिकों को अपने प्रयोगों से सही नतीजे पर पहुंचने के लिए एकदम सटीम माप की जरूरत होती है। 129 सालों से किलोग्राम की जिस इकाई के जरिये ये माप की जा रही थी, उसमें कुछ अशुद्धियों की आशंका के चलते ही किलोग्राम को बदलने का फैसला किया गया है। इस बदलाव के लिए हाल ही में फ्रांस में ‘वेट एंड मेजर्स’ पर एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया था। नई माप के लिए 50 से भी ज्यादा देशों के वैज्ञानिक इकट्ठा हुए थे।

इसमें नया क्या है
वर्तमान में जो किलोग्राम है, उसे एक फिजिकल ऑब्जेक्ट द्वारा परिभाषित किया था। लेकिन अब किलोग्राम को किब्बल या वाट बैलेंस का उपयोग करके मापा जाएगा। एक ऐसा उपकरण, जो यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का इस्तेमाल करके सही गणना करता है। कहने का मतलब यह है कि अब एक किलोग्राम को प्लांक कॉन्स्टेंट के आधार पर मापा जाएगा। यह एक गणितीय मात्रा है, जिस पर प्रदूषण या घर्षण जैसे बाहरी तत्वों का असर नहीं होगा। इसलिए इसके इस्तेमाल पर एक राय बनी है। ऐसा होने के बाद किलोग्राम की परिभाषा न बदली जा सकेगी और न ही इसे कोई नुकसान पहुंचाया जा सकेगा। यह तरीका दुनिया में कहीं भी वैज्ञानिकों को एक किलो का सही माप बताएगा। नए किलोग्राम के मई 2019 तक आने की उम्मीद है। 

129 साल से एक तिजोरी में बंद है किलोग्राम
क्या तुम्हें पता है कि किलोग्राम को मापने वाली वस्तु, जिसे बदलने की बात हो रही है, वह फ्रांस की राजधानी पेरिस के सेवरे में एक तिजोरी में 129 साल से बंद है। सिलेंडरनुमा ‘ली ग्रैंड के’ नाम की यह वस्तु 90 प्रतिशत प्लेटिनम और 10 प्रतिशत इरिडियम से बनी है। इसे एक छोटे से कांच के बक्से में बंद किया गया है। हैरानी की बात यह है कि वैज्ञानिकों ने इसे तिजोरी में क्यों बंद किया है? दरअसल यह एक धातु है, जो आसानी से अपने परमाणु को खो सकती है या हवा अणुओं को अवशोषित कर सकती है। इसी कारण इसकी मात्रा कई बार बदली भी गई थी। ये सिलेंडर पेरिस के अंतरराष्ट्रीय मानक संस्थान में एक तिजोरी में रखा गया है। इस तिजोरी की चाबी तीन लोगों के पास है, जो दुनिया के तीन अलग-अलग देशों में रहते हैं। इस तिजोरी की निगरानी इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स द्वारा की जाती है।

मीटर और सेकंड भी बदलेंगे
हाल ही में जो सम्मेलन आयोजित किया गया था, उसमें किलोग्राम के अलावा भी कई और बदलाव करने को लेकर बातचीत हुई थी। ऐसे में हो सकता है कि आने वाले समय में मीटर और सेकंड में भी कुछ बदलाव देखने को मिलें। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब अन्य इकाइयों को मापने के लिए भी प्राकृतिक वस्तुओं को आधार बनाया जाएगा। खबरों के मुताबिक, एम्पियर को अब एलिमेंट्री इलेक्ट्रिकल चार्ज से परिभाषित किया जाएगा। केल्विन की परिभाषा वोल्ट्जमैन कॉन्स्टेंट से तय होगी। पदार्थ की इकाई मोल अब एवोगाड्रो कॉन्स्टेंट से तय की जाएगी।


कौन तय करता है माप की इकाई
20 मई 1875 को 60 देशों ने मिलकर फ्रांस में इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट एंड मेजर्स की स्थापना की थी। इसे आमतौर पर बीआईपीएम के नाम से जाना जाता है। इसका काम था अलग-अलग चीजों के सात मानकों की इकाई तय करना। इसी संस्था ने हमें वो सात अहम इकाइयां दीं, जिनका इस्तेमाल आज हम तमाम चीजों की माप में करते हैं। जैसे लंबाई के लिए मीटर, भार के लिए किलोग्राम, समय के लिए सेकंड, करंट के लिए एम्पियर, तापमान के लिए केल्विन, पदार्थ की मात्रा के लिए मोल और प्रकाश की तीव्रता के लिए केंडेला। यही वह संस्था है, जो 7 स्टैंडर्ड (एसआई) इकाई तय करती है। 

ये भी जानो
किलोग्राम के बारे में तो तुमने काफी कुछ पढ़ लिया। अब ये भी जानो कि इसके अलावा माप की अलग-अलग इकाइयां क्या होती हैं और इनका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है-
1 पाउंड = 0.45 किलोग्राम
पुराने समय में अमेरिका और अन्य देशों में वजन के लिए पाउंड का इस्तेमाल किया जाता था। भारत में भी किसी नवजात का वजन या स्वेटर बुनने वाली ऊन को पाउंड में मापा जाता है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार एक पाउंड 0.45 किलोग्राम के बराबर माना जाता है।
1 गैलन = 3.78 लीटर
पानी को मापते हुए तुमने कभी शायद ही सुना हो, लेकिन बड़े-बड़े कामों में जब पानी का इस्तेमाल होता है तो उसकी मात्रा गैलन में ही मापी जाती है। एक गैलन में 3.78 लीटर पानी या कोई अन्य द्रव होता है।
1 बैरल = 159 लीटर
कच्चे तेल और पेट्रोल के कारोबार में बैरल का इस्तेमाल होना आम बात है। ये समझ लो कि ये पेट्रोल या तेल को मापने की इकाई है। एक बैरल 159 लीटर के बराबर होता है।

पहली बार किलोग्राम
जानते हो किलोग्राम को पहली बार 1795 में परिभाषित किया गया था और फिर बाद में 1889 में इसे बदला गया, जो वर्तमान में है। अब वैज्ञानिक 20 मई, 2019 से किलोग्राम को मापने के नए तरीके का प्रयोग करेंगे।

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