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28 मई, 2020|10:36|IST

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चीकू की सूझबूझ

दंडक वन में सुनहरी चिड़िया, चीकू खरगोश, मस्तानी  गिलहरी, सुनहरा हिरन, मस्तु भालू और गबरू शेर जैसे ढेरों जानवर हंसी-खुशी साथ रहा करते थे। यहां की एक पहाड़ी पर ढेर सारी जड़ी-बूटियां थीं। जब भी कोई जानवर  बीमार पड़ता, तो वह मनोहर हाथी चाचा से सलाह लेेकर पहाड़ से जड़ी-बूटी लेकर खा लेता और ठीक हो जाता।
एक दिन दंडक वन के पड़ोसी जंगल मंडक में गब्बर महाराज के बेटे की शादी थी। देश-विदेश के जंगलों से ढेर सारे जानवर आए थे। दंडक वन के सभी लोगों के लिए भी न्योता था। सभी जाने की तैयारी कर रहे थे कि अचानक मस्तु भालू के पेट में दर्द होने लगा। सभी जानवर बड़े परेशान हुए कि अब क्या किया जाए? शाम को संगीत का कार्यक्रम होने वाला था और उसमें सभी जानवर मिल-जुलकर नाचने-गाने वाले थे। लेकिन अब ऐसा लग रहा था कि वे मस्तु भालूू के पेट दर्द की वजह से नहीं जा पाएंगे।
तभी चीकू खरगोश ने कहा, “मनोहर चाचा पेट दर्द वाली जड़ी-बूटी बता दें, तो मैं उसे मस्तु भैया को लाकर खिला दूंगा। फिर इनके ठीक होने के बाद हम सब चलेंगे।”
सुनहरी चिड़िया बोली, “चीकू भैया, अगर हम लोग अभी नहीं निकलेंगे, तो शाम के संगीत वाले फंक्शन में शामिल नहीं हो पाएंगे। फिर मंडक वन वालों को बुरा लगेगा।”
गबरू शेर को सुनहरी चिड़िया की बात सही लगी। उसने कहा, “एक काम करो, तुम सब चलो। मैं मस्तु को जड़ी-बूटी लाकर खिला दूंगा। उसके ठीक होते ही उसे साथ लेकर  पार्टी में आ जाऊंगा।”
चालाक लोमड़ी मौसी ने कहा, “महाराज, आप हमारे लीडर हैं। आपका सबके साथ जाना जरूरी है। इसलिए आप जाएं, मैं मस्तु के साथ उसके ठीक होने के बाद आ जाऊंगी।”
तभी मस्तानी गिलहरी बोली, “नहीं! लोमड़ी मौसी, आपका जाना जरूरी है, क्योंकि आप हम सबमें सबसे ज्यादा होशियारी से सोचती हैं। आप सबके साथ जाइए। मैं यहां रुकती हूं।”
इन्हीं बातों में काफी समय निकल गया। सारे जानवर एक-दूसरे से बहस करने लगे। तभी उन्होंने देखा, मस्तु थोड़ी दूरी पर आराम से सो रहा है।
चीकू खरगोश गबरू शेर के पास आया और बोला, “अब हम सभी जानवर साथ चलेंगे, क्योंकि मस्तु भालू ठीक है।” 
दरअसल जब सभी जानवर आपस में बहस कर रहे थे, तभी चीकू खरगोश मनोहर हाथी से पूछकर जल्दी से फुदकता हुआ पहाड़ों से जड़ी-बूटी ले आया और मस्तु भालू को खिला दी। जड़ी-बूटियों के असर से मस्तु भालू सो गया।
गबरू शेर चीकू की इस सूझबूझ से बहुत खुश हुआ और सबके सामने उसकी खूब तारीफ की। उसने कहा, “अगर चीकू भी हम सबकी तरह बहस में उलझा रहता, तो मस्तु भालू अब तक ठीक न होता।  इससे हमें सीख लेनी चाहिए कि मुसीबत के समय फिजूल की बातों में न उलझकर तुरंत सोच-समझकर आगे का काम करना चाहिए।”
इसके बाद सबने चीकू की खूब तारीफ की। फिर मस्तु भालू को लेकर  खुशी-खुशी सभी एक साथ शादी में गए।