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11 मई, 2020|2:32|IST

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राज और जादुई जिन्न

राज चौथी क्लास में पढ़ता था। वह अपने स्कूल की क्रिकेट टीम का कप्तान भी था। वह जहां खेलकूद में हरदम आगे रहता था, वहीं पढ़ाई का नाम लेते ही उसे बुखार आ जाता था। 
मां समझातीं, “जीवन में आगे बढ़ने के लिए पढ़ाई भी है।”
“यानी की हर हाल में पढ़ाई करनी ही पड़ेगी।” राज मुंुह फुलाकर बोला, तो मम्मी की हंसी छूट गई।
राज ने अपना होमवर्क पूरा किया और टीवी देखने लगा। टीवी पर ‘डोरेमोन कार्टून’ आ रहा था। उसे देखकर राज सोचने लगा, ‘काश, मेरे पास भी एक रोबोट होता, तो कितना मजा आता। मैं सारे काम उसी से कराता।’
तभी उसके दोस्त बंटी, बबलू और मिंटू ने खेलने के लिए आवाज दी। राज फुरती से अपना बैट लेकर पार्क में चला गया। टॉस उसने जीता, इसलिए पहले बल्लेबाजी उसे ही करनी थी। “अब देखना मेरी बैटिंग का कमाल।” राज ने दोस्तों से कहा।
बबलू गेंदबाजी कर रहा था। उसकी पहली गेंद पर राज कोई रन नहीं बना पाया। दूसरी गेंद पर उसने बल्ला तेज घुमाया। खटाक से शीशा टूटने की आवाज आई।
“गए काम से! शर्मा अंकल की खिड़की का शीशा टूट गया।” बंटी बोला, तो सभी बेंच के पीछे छिप गए।
तभी मकान का दरवाजा खुला और एक बुजुर्ग बाहर आए। “गेंद किसने मारी?” उन्होंने पूछा।
राज डरते हुए बोला, “सॉरी अंकल, अब ऐसा नहीं होगा...”
शर्मा अंकल बीच में ही बोले, “शॉट तो अच्छी मारी तुमने। मेरा एक काम करोगे? सब अंदर आ जाओ।” उन्होंने कहा, तो सभी बच्चे मकान के अंदर चले गए।
शर्मा अंकल ने फिर उनसे कहा, “मैंने आज स्टोर रूम साफ करके कबाड़ इकट्टा किया है। तुम सब इसे मेरी गाड़ी में रखने में मदद कर दो। और हां, उसमें से कुछ चाहिए, तो रख सकते हो। मैं गाड़ी निकालता हूं।”
बोरों में कई पुराने खिलौने, बरतन आदि थे। सबने एक-एक चीज उठा ली। राज ने एक पीतल का चिराग पसंद किया।
“इसमें मैं चिड़ियों को पानी दूंगा।” उसने अपने दोस्तों से कहा।
शर्मा अंकल ने बच्चों को मदद के लिए धन्यवाद कहा। शाम हो चुकी थी, इसलिए सभी अपने-अपने घर चले गए। रात को सोने से पहले राज ने उस चिराग को साफ किया। पर यह क्या? उसमें से धुआं निकलने लगा। कुछ ही पल में एक राक्षसनुमा इनसान उसके पास आकर खड़ा हो गया। राज थर-थर कांपने लगा।
वह बलशाली इनसान बोला, “ऐ मालिक, घबराओ नहीं। मैं जादुई जिन्न हूं। बताएं, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं?”
राज कुछ देर अपनी आंखें मलता रहा। फिर संभलकर बोला, “अरे वाह, क्या तुम अलादीन के चिराग हो?अब तुम हमेशा मेरी मदद करोगे क्या?”
जिन्न बोला, “हमेशा नहीं, क्योंकि मुझे अपने लोक वापस जाना है। मैं आपका एक काम जरूर पूरा करूंगा।”
राज ने कहा, “मुझे सोचने का समय दो।”
“ठीक है।” कहकर जिन्न वापस चिराग के अंदर चला गया।
राज सोचने लगा, ‘कोई ऐसा काम दूंगा कि जिन्न को करने में समय लग जाए। इस तरह वह मुझे छोड़कर जल्दी नहीं जा पाएगा।’
सुबह उसने जिन्न से कहा, “मैं इतने सालों में कभी भी क्लास में फर्स्ट नहीं आया हूं, इस बार मेरी मदद करो।”
जिन्न सिर खुजलाते हुए बोला, “पढ़ाई में तो मेरा दिमाग भी कम चलता है, सो तुम्हें भी मेरी मदद करनी पड़ेगी।”
शाम को राज ने अपना मैथ्स का काम जिन्न को सौंपा।
जिन्न उसे देखकर बोला, “मुझे पहाड़ा नहीं आता, इसलिए मैं यह गुणा, भाग नहीं कर सकता।”
राज बोला, “क्या मुसीबत है? चलो, मैं ही पहाड़ा याद कर लेता हूं।”
दूसरे दिन राज ने इंग्लिश का काम जिन्न को दिया, तो वह बोला, “मेरा व्याकरण कमजोर है, इसलिए जरा तुम ही मुझे समझा दो न।”
राज ने खुद ही किताब में वाक्यों को शुद्घ लिखने का तरीका सीखा। फिर उसे जिन्न को बताया।
तीसरे दिन हिंदी में स्वतंत्रता दिवस पर निबंध लिखना था।
जिन्न बोला, “मैं क्या जानूं स्वतंत्रता क्या है? तुम्हीं पढ़कर बताओ न?”
राज चिढ़कर बोला, “तुम्हें भला आता क्या है?”
जिन्न मासूमियत से बोला, “उड़ना, सामान ढोना और सोना।” राज ने सिर पीट लिया।
कुछ दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा। अब राज को किताब पढ़कर नई बातें सीखना अच्छा लगने लगा। अब तो सारे काम वह खुद ही करने लगा। इम्तिहान नजदीक आए, तो उसे पहले की घबराहट नहीं थी। उसने सारा कोर्स पूरा कर लिया था। अब तो वह अपने दोस्तों की दिक्कतें भी दूर करने लगा।
उसके दोस्त, मम्मी-पापा और अध्यापक भी राज के बदलाव से खुश थे। जब इम्तिहान का रिजल्ट आया, तो सब अचरज में थे।
क्लास टीचर बधाई देते हुए बोले, “वाह राज, तुमने तो कमाल कर  दिया। तुम अपनी क्लास में ही नहीं, तीनों सेक्शन में फर्स्ट आए हो।”
सभी राज को बधाई देने लगे। घर पर मां ने खीर बनाई। पापा ने भी पीठ थपथपाई।
“मम्मी-पापा, यह सब तो मेरे प्यारे दोस्त जिन्न का कमाल है।” राज ने कहा, तो वे चौंके।
राज उन्हें अपने कमरे में ले गया। वहां न चिराग था, न जिन्न। बस, एक पत्र था। जिस पर लिखा था—
‘प्यारे राज, शर्त पूरी हुई, सो मैं चला। एक बात सच बताऊं , तुम्हें। यह उपलब्धि केवल तुम्हारी लगन और मेहनत से प्राप्त हुई है। मेहनत से आदमी अपने सारे सपने पूरे कर सकता है।’
                    तुम्हारा मित्र,
                    जिन्न
राज ने वह पत्र अपने सीने से लगा लिया।