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29 मई, 2020|3:00|IST

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कम खाओ, अच्छा पाओ

मम्मी ने आयुष के लिए बिरयानी बनाई। मगर आयुष को वह पसंद नहीं आई। उसने कहा, “मम्मी, तुम्हारे हाथ में जादू था। अब वह कहां चला गया?”
मम्मी उदास हो गईं। फिर बोली, “शाम को मंचूरियन बनाती हूं। वह जरूर अच्छा लगेगा।”
शाम को आयुष घर आया। मम्मी ने कहा, “बेटा, मंचूरियन तैयार है।”
आयुष ने कहा, “नहीं मम्मी, अभी बिस्कुट और नमकीन दे दो।”
मम्मी ने एक प्लेट में चार बिस्कुट और थोड़ा नमकीन रखकर आयुष को दे दिया। आयुष ने फौरन बिस्कुट और नमकीन खा लिए और खाली प्लेट लेकर मम्मी के सामने खड़ा हो गया। मम्मी ने चार बिस्कुट और नमकीन फिर दिए। आयुष उन्हें भी जल्दी में खा गया। पर दो बिस्कुट अपने कुत्ते को भी खिलाए, जो उसकी ओर देखकर दुम हिला रहा था। फिर आयुष ने पूछा, “कुछ और खाने को है?”
मम्मी झल्लाने लगीं। उन्होंने कहा, “मंचूरियन तैयार है। वह क्यों नहीं खाता?”
आयुष ने कहा, “दादाजी ने पेस्ट्री दिलाई थी। उनमें से दो पीस दे दो।”
मम्मी ने पेस्ट्री निकालकर दे दी। तब जाकर उसकी भूख शांत हुई। उसने जोर की डकार ली और होमवर्क करने बैठ गया। 
रात के नौ बजे मम्मी ने सभी को डिनर पर आने के लिए कहा। मम्मी ने आयुष के सामने मंचूरियन रख दिया। आयुष ने मंचूरियन का पहला पीस मुंह में लिया। अचानक वह बोल पड़ा, “मम्मी, यह क्या? एकदम बेस्वाद! तुम कैसे काम करती हो? सुबह बिरयानी में फेल हुईं और अब मंचूरियन में भी?”
यह सुनकर दादाजी और डैडी सकते में आ गए। वहीं मम्मी दुखी हो गईं। मगर किसी ने कुछ नहीं कहा। आयुष ने किसी तरह खाना पूरा किया और सोने चला गया। 
अगला दिन रविवार था। आयुष थोड़ी देर से उठा। उसने ब्रश किया और बाहर बरामदे में आकर बैठ गया। 
दादाजी ने पूछा, “बहू, नाश्ते में हमारे लिए क्या बना रही हो?”
आयुष की मम्मी ने कहा, “आयुष के लिए छोले-भटूरे और आपके लिए रोटी-सब्जी बना रही हूं।”
दादाजी ने कहा, “आयुष के लिए भी रोटी-सब्जी ही बनाओ।”
मम्मी हैरानी से दादाजी को देखने लगीं। फिर बोलीं, “आयुष रोटी-सब्जी की तरफ देखेगा भी नहीं।”
दादाजी ने कहा, “तुम निश्चिंत रहो।” मम्मी सभी के लिए रोटी-सब्जी बनाने में लग गईं। 
दादाजी बरामदे में आए और बोले, “आयुष, आओ, थोड़ा टहलने चलते हैं।”
आयुष ने कहा, “दादाजी, कुछ खाकर चलता हूं।”
दादाजी ने कहा, “आज रविवार है। आज नहाकर खाएंगे। चलो, पहले टहलते हैं।”
दोनों घर से निकल पड़े। दादाजी ने आयुष से मैदान के चार चक्कर लगवाए। आयुष थक गया। उसने कहा, “दादाजी, पास में कोल्ड ड्रिंक मिलती है। वह पी लेते हैं।”
दादाजी ने कहा, “कोल्ड ड्रिंक पीना ठीक नहीं है। चलो, गैराज चलते हैं। मैंने अपनी कार बनने को दी है।”
आयुष मन मारकर दादाजी के साथ चल पड़ा। गैराज में मेकैनिक ने अभी-अभी ही दादाजी की कार पर काम करना शुरू किया था। दादाजी और आयुष वहीं बैठ गए और कार का काम देखने लगे। आयुष भूख से बेचैन हो रहा था। उसने मेकैनिक से पूछा, “भैया, यहां बिस्कुट मिलेगा ?”
मेकैनिक ने हंसते हुए कहा, “यहां सिर्फ ग्रीस, मोबिल और गाड़ी ठीक करने के टूल्स ही मिलेंगे।”
आखिर जब दोनों घर आए, तो 10 बज चुके थे। दादाजी ने कहा, “पहले नहा लो। तब हम एक साथ नाश्ता करेंगे।”
आयुष ने फटाफट स्नान किया। बाहर आकर कपड़े बदले और डायनिंग टेबल पर जाकर बैठ गया। उसने कहा, “मम्मी, नाश्ते में क्या है?” 
मम्मी ने कहा, “सरप्राइज है।” 
तब तक दादाजी और डैडी भी आकर बैठ चुके थे। मम्मी ने सभी के आगे रोटी-सब्जी परोस दी। यह देख आयुष की आखों के सामने अंधेरा छाने लगा। पर उसे जोर की भूख लगी थी। उसे ज्यादा विरोध करना सही नहीं लगा। वह रोटी-सब्जी खाने लगा। 
तभी वह बोल पड़ा, “नॉट बैड! रोटी-सब्जी वाकई अच्छी बनी हैं। वाह मम्मी! तुम बिरयानी और मंचूरियन अच्छा नहीं बनाती, मगर रोटी-सब्जी में अच्छा स्वाद डाल देती हो।”
अब दादाजी बोले, “बिरयानी और मंचूरियन रोटी-सब्जी से भी अच्छी बनी थीं। मगर तुम उनका स्वाद समझ नहीं पाए।” 
आयुष चौंक पड़ा। उसने पूछा, “वह कैसे?”
दादाजी ने कहा, “जब तक ठीक से भूख न लगे, किसी भी चीज के स्वाद का पता नहीं चलता। तुम्हारी आदत है, बीच-बीच में कुछ न कुछ खाने की। इससे तुम्हारी भूख मिट जाती है। जब मेन आइटम खाने का समय होता है, तुम्हारी भूख मरी हुई होती है। इस कारण अच्छी चीज भी बेस्वाद हो जाती है। आज तुम्हें जान-बूझकर देर तक भूखा रखा। यही वजह है कि तुम्हें रोटी-सब्जी भी अच्छी लग रही है।” 
आयुष को अपनी भूल फौरन समझ में आ गई। उसने लजाते हुए कहा, “दादाजी, आप ठीक कहते हैं। वैसे, मैंने पढ़ा भी है कि जरूरत से ज्यादा खाना सेहत के लिए ठीक नहीं है। आज से इसका ध्यान रखूंगा। रोटी-सब्जी अच्छी लग रही हैं। मैं इन्हें पूरे मन से खा लेता हूं। थैंक यू, मम्मी।”