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क्यों मनाते हैं 26 जनवरी


26 जनवरी की सुबह। दिल्ली में कड़ाके की ठंड, पर लोगों के जत्थे के जत्थे देश के सबसे बड़े उत्सवों में से एक को मनाने के लिए राज पथ की ओर चले जा रहे थे। कई बच्चे पापा या मम्मी की उंगली पकड़े, तो कई पापा के कंधे पर चढ़कर देश में निकलने वाली सबसे बड़ी परेड को देखने के लिए ठंड की परवाह न करते हुए हंसते-खेलते आगे बढ़ते जा रहे थे। 

समर भी पापा के साथ पहली बार 26 जनवरी की परेड देखने आया था। उसके दादू भी साथ आना चाहते थे, पर अब उनसे ज्यादा चला नहीं जाता। उन्होंने कल रात ही समर को बताया था, “पता है, मैं भी अपने पापा के साथ भारत में मना पहला गणतंत्र दिवस देखने गया था।”
“अच्छा! कब?” नन्हे समर ने उत्सुकता से पूछा। 

“हमारे देश की आजादी के बाद 1950 में। उस साल भारत में संविधान लागू हुआ था और हमारा देश गणतंत्र बना। इसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने। समारोह के बाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति के साथ सभी लोग इंडिया गेट के पास बने इर्विन स्टेडियम पहुंचे। मैं भी अपने पापा के साथ उसमें था।”

“अरे, वाह! अब वह स्टेडियम कहां है?” समर ने उत्सुकता से पूछा।

“तुम उस स्टेडियम में खेलने जा चुके हो। अब उसी स्टेडियम को मेजर ध्यानचंद स्टेडियम कहते हैं।” दादाजी मुसकराकर बोले।

समर पापा के साथ राजपथ पर पहुंच गया, जहां समारोह होना था। समर के पापा को पास मिला हुआ था। उनकी सीट मुख्य मेहमानों की सीट के बिल्कुल सामने थी। 

समर पहली बार रिपब्लिक डे परेड देखने आया था। वहां लोगों का हुजूम देखकर उसकी आंखें फैल गईं। उसने पापा से पूछा, “दिल्ली के सारे लोग इसे देखने आते हैं?”

“अरे, नहीं! ये सब लोग दिल्ली के नहीं हैं। पूरे भारत से लोग इस राष्ट्रीय त्योहार में भाग लेने आते हैं।” समर के पापा मुसकराकर बोले।

“पर पापा, जनवरी में इतनी ठंड होती है। लोगों को मुश्किल होती है। इसी दिन को क्यों चुना गया गणतंत्र दिवस के रूप में?” ठंड से ठिठुरते हुए समर ने पूछा। 

उसके पापा ने उसे अपने से सटा लिया, फिर प्यार से बोले, “इस दिन को इसलिए भी चुना गया, क्योंकि देश की गुलामी के दौरान 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज का नारा दिया गया था।”

“अच्छा!” अब समर की समझ में बात आ गई।

“गणतंत्र दिवस के बहाने हम अपने देश के लिए काम करने वाले वीरों को याद करते हैं। आज के दिन देश के लिए अपनी जान देने को तैयार सेना के वीरों को पुरस्कृत किया जाता है। देश का नाम रोशन करने वाले लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।” पापा ने नई जानकारी दी।

“आज वीर बच्चे भी देखने को मिलेंगे हमें। है न पापा?” समर उत्साह से बोला।

“हां बेटा! तुम्हारे स्कूल में भी स्काउट होते हैं न! ऐसा ही एक स्काउट था हरिश्चंद्र। 2 अक्तूबर 1957 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक समारोह के दौरान टेंट में आग लग गई थी। उस समारोह में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे। 14 साल के स्काउट हरिश्चंद्र ने बहादुरी दिखाकर चाकू से टेंट को चीरकर हजारों लोगों की जान बचाई थी। इस घटना के बाद नेहरू जी के सुझाव पर बच्चों के लिए राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार शुरू किए गए और पहला सम्मान हरिश्चंद्र को मिला।”

“मैं भी वीर बनूंगा। आप देखना, एक दिन वीरता पुरस्कार पाकर मैं भी हाथी पर बैठकर यहां परेड में भाग लूंगा।” समर अपना सीना फुलाते हुए बोला, तो उसके पापा हंस पड़े। फिर बोले, “जरूर मेरा राजा बेटा। पर हाथी पर सवारी तब निकलती थी, जब मैं बच्चा था। अब तो वीर बच्चों को जीप पर लाया जाता है।”

इतनी देर में कार्यक्रम शुरू हो गया। पहले प्रधानमंत्री जी का काफिला आया। फिर काफी देर के बाद राष्ट्रपति जी आए। उनके साथ विदेशी मेहमान देखकर समर चौंका, तो उसके पापा ने बताया, “हमारे यहां परंपरा है कि हम गणतंत्र दिवस पर किसी दूसरे देश के प्रमुख को अपना अतिथि बनाकर बुलाते हैं। यह परंपरा पहले गणतंत्र दिवस से चली आ रही है। हमारे पहले अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो थे।”

“एक चीज मैं भी बताऊं पापा। कल ही नेट पर मैंने सर्च करके पता लगाया है।” समर अपनी आंखें मटकाते हुए बोला।

“वह क्या?” पापा मुसकराते हुए बोले। 

“ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय दिवस भी 26 जनवरी ही है। इसी दिन 1788 में ब्रिटिश ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में उतरे थे और वहां ब्रिटिश झंडा फहराया गया था। और हां, युगांडा में 26 जनवरी लिबरेशन डे के रूप में मनाया जाता है।” बड़े गर्व से समर ने बताया। वह बहुत खुश था कि उसने पापा को नई बात बताई। उसके पापा को यह बात मालूम थी, पर बेटे का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्होंने यह बात जाहिर नहीं की।

समारोह शुरू हुआ। सैनिकों के प्रदर्शन के बाद भारत के राज्यों की झांकियां, स्कूली बच्चों के डांस देखकर समर तो बहुत खुश हुआ। जब उसके स्कूल के ग्रुप ने अपना डांस दिखाया, तो वह खड़े होकर जोर-जोर से ताली बजाने लगा।

समारोह खत्म हुआ, तो आसमान में हवाई करतब देखकर वहां के लोगों के साथ-साथ समर भी खुशी के मारे खिल उठा।

जब समर लौटने लगा, तो उसके साथ कितनी ही नई यादें थीं, जिन्हें वह जल्दी से घर पहुंचकर अपने दादाजी को बताने के लिए उतावला हो रहा था।

 

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  • Web Title:Big celebration of new year