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गर्मी की छुट्टियां

summer vocation

अपनी नानी के घर पहुंचकर शिवम बहुत खुश था। वह खुशी के कारण उछल रहा था। खुश होता भी क्यों नहीं, मम्मी इस बार उसे बहुत दिनों के बाद नानी के घर जो लाई थीं। शिवम को अपने बचपन के दिन याद आते थे, जब वह नानी के घर खूब शरारतें किया करता था। मगर एक घटना के बाद मम्मी का मन इस शहर से उचट गया था और उसके बाद वह नानी को ही दिल्ली बुलाने लगी थीं।
‘बेटा, इस बार तू ही शिवम को लेकर आ जा, मेरी तबीयत बहुत खराब है।’ नानी ने अप्रैल में ही फोन कर दिया था। नानी की बात सुनकर शिवम की मम्मी फोन पर ही रोने लगी थीं। ‘तुम जानती ही हो न! उस दिन के बाद से मुझे वह शहर पसंद नहीं है।’

‘बेटा, वह एक दुर्घटना थी, किसी के भी साथ हो सकती थी, मगर अब सब ठीक है।’  एक दिन शिवम जल्दी घर आ गया, तो वह फोन पर मम्मी को रोते देखकर रुक गया। मम्मी नानी से कह रही थीं, ‘शिवम बिल्कुल अपने पापा पर गया है, हर किसी की मदद करने लगता है! और आप ही देखिए कि मदद का नतीजा हमें क्या मिला था। मदद करते-करते शिवम के पापा ही ट्रक की चपेट में आ गए थे। मैं उधर आती हूं, तो दर्द हरा हो जाता है।’ फोन पर बात करते हुए मम्मी रोती जा रही थीं। उनकी बात सुनकर शिवम को धक्का लगा। कुछ दिन बाद वह अपनी नानी के घर पर था। धुंधली यादों के बाद से अब वह हकीकत में अपनी नानी के घर आया था। इतना बड़ा घर है, दिल्ली में जो उसका घर है, वैसे दस घर इधर समा जाएं।


शिवम उस दिन अपने नाना और नानी के साथ खूब खेलता रहा और सफर में थकान होने के कारण जल्दी सो गया। अगले दिन सभी को पहाड़ी पर बने मंदिर में जाना था। उस मंदिर की फोटो ही तो उसके घर में लगी हुई थी, जिसमें वह अपने पापा की गोद में है।

शिवम का मन हो रहा था कि वह भागकर उस मंदिर में जाए और वहीं पर फोर्टो खिंचवाए, जहां पर उसके पापा र्ने खिंचवाई थी। ‘शिवम, शिवम! जल्दी करो, हमें देर हो रही है।’ अपने नाम की आवाज सुनकर शिवम उठ गया था और जल्दी-जल्दी तैयार होकर नानी के साथ रिक्शे पर बैठकर मंदिर की तरफ चल पड़ा था। नाना और मम्मी पीछे रह गए थे और वह तेजी से वहां पहुंच गया। नानी उसे हंसते देखकर बहुत ही खुश हो रही थीं। सब ठीक रहा, सभी ने दर्शन कर लिए और जब वह घर के लिए चलने लगे, तो शिवम की नजर एक बच्ची पर गई! पीले रंग की फ्रॉक में वह एकदम सूरजमुखी की तरह लग रही थी।
‘मम्मी, देखो न वह केवल चार साल की ही होगी! वह अकेली क्यों है? और रो भी रही है! मम्मी, चलकर देखो न।’ 

हालांकि शिवम की मम्मी का मन बिल्कुल नहीं था, उन्हें याद आ रहा था कि जब शिवम चार साल का था, तब वह लोग यहां आए थे और एक बच्ची को बचाने के चक्कर में ट्रक की चपेट में आ गए थे। तब से वह किसी की भी मदद करने से डरने लगी थीं। आज उन्हें लगा जैसे फिर से वही सब न हो जाए। उन्होंने शिवम का हाथ पकड़ते हुए कहा, ‘चुपचाप घर चलो।’


तभी न जाने कहां से वह बच्ची कुत्तों से बचती हुई शिवम और उसकी मम्मी के सामने आ गई। और इन दोनों को देखकर कुत्ते रुक गए। शिवम की मम्मी ने उस लड़की की तरफ देखा, वह रो रही थी, रोते-रोते उसके गालों पर आंसू के दाग लग गए थे, उसकी नाक लाल हो गई थी! उसकी आंखों में आंसू देखकर शिवम की मम्मी को आज से आठ साल पहले हुए हादसे वाली लड़की के आंसू याद आ गए और शिवम के पापा भी! जैसे शिवम के पापा उनसे कह रहे हों कि अगर मैं होता, तो क्या करता। उस लड़की ने शिवम की मम्मी को अपनी तरफ घूरता पाया, तो वह शिवम के पीछे छिप गई।


‘संभलकर, यहां से गिरोगी तो चोट लग जाएगी।’ शिवम की मम्मी ने दोनों को अपनी तरफ खींचते हुए कहा। जब उन्होंने दोनों को अपनी तरफ खींचा, तो वह लड़की उनसे लिपट गई। ‘आंटी, मेरी मम्मी...’ कहते हुए बस रोने लगी।

‘तुम यहां कितनी देर से हो?’ शिवम की मम्मी ने उस लड़की से पूछा, पर वह कुछ भी नहीं बोल पा रही थी। बस, रोती जा रही थी!

शिवम, देखो, कहीं इसके मम्मी-पापा आसपास ही तो नहीं हैं! नहीं तो हम इसे लेकर पुलिस के पास चलें।’ शिवम की मम्मी ने शिवम से कहा।
‘मम्मी, आप।’ शिवम को यकीन नहीं हुआ।

‘हां, बेटा! तुमने और इस छोटी बच्ची ने आज मुझे एहसास दिलाया कि हादसों के कारण हमें जिंदगी नहीं रोक देनी चाहिए। चलो, नानी के पास चलते हैं और इस बच्ची के घर वालों को ढूंढ़ते हैं।’
शिवम की मम्मी ने उस बच्ची का हाथ पकड़ा, तो उस बच्ची ने भी कसकर हाथ पकड़ लिया। शिवम को देखकर वह बोली, ‘भैया।’
 शिवम उसे प्यार करता हुआ बोला, ‘हां, मैं तुम्हारा भैया और यह भैया हर साल अपनी बहन से मिलने इस शहर में आएगा! क्यों आऊंगा न मम्मी? इस मंदिर ने पापा छीने और बहन दे दी।’
शिवम उछलते हुए अपने नाना-नानी को बुलाने चला गया और थोड़ी ही देर में उस बच्ची के घर वाले भी उसे ढूंढ़ते-ढूंढ़ते वहां आ गए। 
शिवम से कहानी सुनकर उस बच्ची की मम्मी की आंखों में आंसू आ गए। वह बोलीं, ‘दीदी, आपने आज जो मेरे लिए किया, उसका कर्ज नहीं चुका सकती। अब इस शहर में केवल आपका मायका ही नहीं है, बल्कि आपकी छोटी बहन का घर भी है। शिवम की गुड़िया का घर भी है।’
शिवम गुड़िया के साथ खेल रहा था और उससे कहता जा रहा था, ‘अब हम सारी गर्मी की छुट्टियां साथ बिताएंगे।’

 

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  • Web Title:children and their summer holidays