जिलाध्यक्षों ने नेताओं को सुनायी खरी-खोटी
ांग्रेस के जिलाध्यक्षों का तेवर गरम था। इन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बलमुचू और सह प्रभारी अब्दुल मन्नान को अपनी व्यथा सुनायी। कहा कि सरकार को बाहर से समर्थन देने के बावजूद कोई तराीह...

ांग्रेस के जिलाध्यक्षों का तेवर गरम था। इन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बलमुचू और सह प्रभारी अब्दुल मन्नान को अपनी व्यथा सुनायी। कहा कि सरकार को बाहर से समर्थन देने के बावजूद कोई तराीह नहीं मिल रही है। यहां तक कि अपनी पार्टी के सांसद भी जिला कमेटियों को तराीह नहीं देते। सांसदों ने एक तरह से पैरलल कमेटी बना ली है। ऐसे में संगठन को मजबूत करना मुश्किल होगा।ड्ढr झारखंड प्रदेश कमेटी के बुलावे पर नौ नवंबर को तमाम जिलाध्यक्ष रांची आये थे। प्रदेश मुख्यालय में आयोजित बैठक में इन्होंने दिल की भड़ास निकाली। जिलाध्यक्षों का आरोप है कि 20 सूत्री कमेटी के लिए नाम की अनुशंसा करने की जिम्मेवारी सांसदों को सौंपी गयी थी। इन्होंने बीजेपी और राजद के कार्यकर्ताओं का नाम दे दिया।ड्ढr रांची के जिलाध्यक्ष अमर उरांव ने कहा कि कांके के प्रखंड अध्यक्ष अपने को जिला कमेटी से ऊपर मानते हैं। कहते हैं कि उनपर सांसद का वरदहस्त है। यही स्थिति रही, तो मुझे सेवामुक्त कर दिया जाये। महानगर अध्यक्ष विनय सिन्हा दीपू ने कहा कि मोरचा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जिलाध्यक्षों के मनोनयन के लिए सुझाव तक नहीं मांगते हैं। यहां तक ही प्रदेश अध्यक्ष को भी जानकारी नहीं दी जाती है। वे अपने हित में कार्यक्रम आयोजित करते हैं।ड्ढr अन्य वक्ताओं ने कहा कि रलवे और दूरसंचार की कमेटी में कांग्रेस के सदस्य नहीं बनाये जाते हैं। मुख्यमंत्री और मंत्री जब उनके जिला में कार्यक्रम करते हैं, तो इसकी जानकारी तक नहीं दी जाती है। सरकारी विज्ञापनों में यूपीए के बड़े नेताओं का नाम तक नहीं होता। संबंधित मंत्री सिर्फ अपना फोटो छपवा लेते हैं। कांग्रेस ने सरकार को समर्थन दिया है, लेकिन अंकुश नहीं लगा पा रही है।
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