यह युद्ध का अंत नहीं है... सीजफायर होते ही खामेनेई की खुली चेतावनी; सेना को दिया आदेश
अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से जारी भीषण युद्ध के बाद ईरान ने 2 हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया है। डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद मोजतबा खामेनेई ने शांति के लिए परमाणु हथियार न बनाने समेत कई बड़ी शर्तें रखी हैं।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच एक महीने से अधिक समय तक चले युद्ध के बाद, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने बुधवार को इस्लामी गणराज्य की सेना को संघर्ष विराम का पालन करने का निर्देश दिया है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कड़े शब्दों में यह स्पष्ट किया कि 'यह युद्ध का अंत नहीं है।'
सुप्रीम लीडर का आदेश और सुरक्षा परिषद की पुष्टि
अली खामेनेई के उत्तराधिकारी और उनके बेटे मोजतबा ने अपने बयान में घोषणा की। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा: यह युद्ध का अंत नहीं है, लेकिन सभी सैन्य शाखाओं को सुप्रीम लीडर के आदेश का पालन करना चाहिए और गोलीबारी रोक देनी चाहिए। इस चल रहे सैन्य तनाव के बीच ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी दो सप्ताह के संघर्ष विराम की पुष्टि की है।
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने खुद की निर्धारित की हुई समय-सीमा खत्म होने से करीब 90 मिनट पहले घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम पर सहमति जताई है। ट्रंप ने मंगलवार शाम ट्रुथ सोशल पर यह घोषणा की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बातचीत कर अनुरोध किया कि मैं आज रात ईरान के खिलाफ होने वाली विनाशकारी कार्रवाई को रोक दूं लेकिन इस शर्त पर कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलने पर सहमत हो।' ट्रंप ने कहा, 'मैं दो सप्ताह की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले रोकने पर सहमत हूं।' उन्होंने कहा कि यह दोनों पक्षों का संघर्षविराम होगा। तेहरान में, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि उसने दो सप्ताह के संघर्षविराम को स्वीकार कर लिया है और वह शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका से बातचीत करेगा।
ट्रंप की चेतावनी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विवाद
अब खामेनेई का सेना से गोलीबारी बंद करने का यह आदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस कड़ी चेतावनी के कुछ घंटों बाद आया है, जिसमें उन्होंने ईरान को आगाह करते हुए कहा था कि 'आज रात पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी।' अब सीजफायर के लिए सहमत होने के बावजूद, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि यह संघर्ष विराम विवाद का अंत नहीं है।
ईरान ने स्थायी शांति के लिए रखीं ये शर्तें
ईरान ने किसी भी स्थायी समाधान के लिए कई कड़ी शर्तें रखी हैं।
मुआवजा और फंड की बहाली: युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए पूर्ण मुआवजा, सभी प्रतिबंधों को हटाना और अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए ईरानी फंड (धन) को तुरंत जारी करना।
शत्रुता की समाप्ति: ईरान के साथ-साथ इराक, लेबनान और यमन में सभी तरह की सैन्य कार्रवाई और शत्रुता को पूर्ण और स्थायी रूप से समाप्त करना।
व्यापार और नेविगेशन: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और सुरक्षित व मुक्त नौवहन (नेविगेशन) की गारंटी देना।
परमाणु हथियारों पर ईरान का संकल्प
इसके अलावा, ईरान ने यह संकल्प लिया है कि यदि उसकी ये शर्तें मान ली जाती हैं, तो वह परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि इन शर्तों को मंजूरी मिलते ही सभी मोर्चों पर एक व्यापक संघर्ष विराम तुरंत लागू हो जाएगा।
गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले, तेहरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य कार्रवाई रोकने के वाशिंगटन के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। ईरान ने यह कदम तब उठाया था जब ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर युद्ध नहीं रुका तो ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा।
इस्लामाबाद में, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया, ताकि सभी विवादों के समाधान के लिए आगे बातचीत की जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि आमने-सामने बातचीत को लेकर चर्चा जारी है, 'लेकिन जब तक राष्ट्रपति या 'व्हाइट हाउस' आधिकारिक घोषणा नहीं करते, तब तक कुछ भी तय नहीं है।' ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका को ईरान से 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव मिला है, जिसे वह बातचीत के लिए एक व्यवहारिक आधार मानते हैं। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह के संघर्षविराम का उपयोग एक बड़े समझौते पर बातचीत के लिए किया जाएगा, जिससे युद्ध को समाप्त किया जा सके।
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