लाशों के साथ बनाए संबंध, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर ज्यादती; इजरायली बंधकों ने खोली हमास की पोल

Devendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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हमास और उसके सहयोगी संगठनों ने 7 अक्टूबर 2023 के आतंकी हमले के दौरान तथा उसके बाद गाजा में बंधक बनाए गए लोगों के खिलाफ व्यवस्थित रूप से चरम यौन हिंसा, बलात्कार और शारीरिक-मानसिक यातना को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।

लाशों के साथ बनाए संबंध, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर ज्यादती; इजरायली बंधकों ने खोली हमास की पोल

एक स्वतंत्र इजरायली जांच आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, हमास और उसके सहयोगी संगठनों ने 7 अक्टूबर 2023 के आतंकी हमले के दौरान तथा उसके बाद गाजा में बंधक बनाए गए लोगों के खिलाफ व्यवस्थित रूप से चरम यौन हिंसा, बलात्कार और शारीरिक-मानसिक यातना को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। आयोग ने संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों से अपील की है कि गाजा पट्टी में युद्ध के दौरान महिलाओं, बच्चों और अन्य बंधकों पर हुई यौन हिंसा की गहन और निष्पक्ष जांच की जाए। दो वर्षों की गहन जांच के बाद आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि 7 अक्टूबर के हमले और उसके बाद की लंबी कैद के दौरान बंधकों पर यौन एवं लैंगिक हिंसा का स्तर बेहद भयावह और असहनीय था।

300 पृष्ठों वाली रिपोर्ट में सनसनीखेज आरोप

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बलात्कार, यौन यातना और अपमान को जानबूझकर 'दर्द और पीड़ा को अधिकतम करने' के लिए हथियार बनाया गया। इसका निशाना केवल व्यक्तिगत पीड़ित नहीं, बल्कि पूरा परिवार और समुदाय था। बीबीसी की रिपोर्ट के हवाले से आयोग ने बताया कि ये निष्कर्ष हमले में बचे लोगों, प्रत्यक्षदर्शियों और पूर्व बंधकों के 430 से अधिक साक्षात्कारों, हमले स्थलों से बरामद 10000 से अधिक तस्वीरों-वीडियो तथा हमलावरों द्वारा खुद रिकॉर्ड किए गए फुटेज पर आधारित हैं। यह अब तक की सबसे व्यापक स्वतंत्र जांच मानी जा रही है।

महिलाओं पर जीवित और मृत्यु के बाद भी अत्याचार

जांच रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि महिलाओं के साथ जीवित अवस्था में बलात्कार, अंग-भंग और सार्वजनिक अपमान के साथ-साथ उनकी हत्या के बाद भी यौन अत्याचार किए गए। कई गवाहों ने बताया कि पीड़ितों को यौन उत्पीड़न के दौरान या तुरंत बाद मार दिया गया और उनके शवों को ट्रॉफी की तरह प्रदर्शित किया गया। जांचकर्ताओं ने कुछ अपराधों को 'घातक यौन हिंसा' की संज्ञा दी है, जिनका उद्देश्य पारिवारिक संरचनाओं को तोड़ना और दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक आघात पहुंचाना था। रिपोर्ट में ऐसे मामले भी दर्ज हैं जिनमें बंधकों को जबरन शादी की धमकी दी गई और रिश्तेदारों को एक-दूसरे के साथ यौन कृत्यों के लिए मजबूर किया गया। आयोग का कहना है कि इन कृत्यों ने मानवीय बंधनों का घोर दुरुपयोग किया और पीड़ा को चरम स्तर तक पहुंचाया, जिसका असर कई पीढ़ियों तक रह सकता है।

परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल

रिपोर्ट के एक महत्वपूर्ण हिस्से में दो युवा रिश्तेदारों का जिक्र है, जिन्हें अपहरणकर्ताओं ने कथित तौर पर यौन कृत्यों के लिए मजबूर किया। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह परिवार को निशाना बनाकर हिंसा करने और पारिवारिक रिश्तों को आतंक का हथियार बनाने की सोची-समझी रणनीति को दर्शाता है। नोवा संगीत समारोह से बचे राज कोहेन ने गवाही देते हुए बताया कि उन्होंने एक महिला को गाड़ी से बाहर खींचा, उसके कपड़े फाड़े और सामूहिक बलात्कार किया। इसके बाद चाकू से बार-बार वार कर हत्या कर दी गई। मौत के बाद भी शव के साथ अत्याचार जारी रखा गया। एक अन्य पीड़ित डारिन कोमारोव ने कहा कि पास में हो रही चीखें और फिर अचानक छा जाने वाला सन्नाटा आज भी उनके कानों में गूंजता है।

यौन हिंसा एक सोची-समझी रणनीति: आयोग

आयोग की संस्थापक डॉ कोचाव एल्कायम-लेवी ने कहा कि दो साल तक पीड़ितों और गवाहों की बातें सुनने, सबूतों की जांच करने और अकल्पनीय सामग्री का सामना करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यौन हिंसा एक सुनियोजित रणनीति थी, जिसे बेहद क्रूरता के साथ अंजाम दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश अत्याचार इजरायली समुदायों और नोवा फेस्टिवल (जहां 370 से अधिक लोग मारे गए) में हुए, लेकिन गाजा की सुरंगों और सुरक्षित घरों में कैद के दौरान भी यह सिलसिला जारी रहा। पुरुषों, लड़कों और बुजुर्गों को भी इसका शिकार बनाया गया। न्यूयॉर्क पोस्ट के हवाले से रिपोर्ट में इन कृत्यों को युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के कृत्य बताया गया है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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