ईरान युद्ध के बीच सऊदी-तुर्की समेत 8 इस्लामी देशों ने खोला मोर्चा, इजरायल को क्यों घेरा?
सऊदी अरब, तुर्की और इंडोनेशिया समेत 8 प्रमुख इस्लामी देशों ने इजरायल की नई कानून को लेकर तीखी आलोचना की है। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने गुरुवार को एक संयुक्त बयान जारी कर कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के लिए मौत की सजा के प्रावधान वाले विधेयक को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।

ईरान युद्ध के बीच कई इस्लामी देशों ने इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सऊदी अरब, तुर्की और इंडोनेशिया समेत आठ प्रमुख इस्लामी देशों ने इजरायल की नई कानून को लेकर तीखी आलोचना की है। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने गुरुवार को एक संयुक्त बयान जारी कर कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के लिए मौत की सजा के प्रावधान वाले विधेयक को 'क्षेत्रीय स्थिरता' के लिए खतरा बताया है।
सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने कहा कि यह कानून एक खतरनाक बढ़ोतरी है, खासकर फिलिस्तीनी कैदियों के खिलाफ इसके भेदभावपूर्ण इस्तेमाल को देखते हुए। बयान में जोर देकर कहा गया कि ऐसे कदम तनाव को और बढ़ा सकते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर सकते हैं।
संयुक्त बयान में इजरायली कब्जे वाली शक्तियों द्वारा इस कानून को लागू करने की कड़ी निंदा की गई है। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि यह कदम फिलिस्तीनियों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देगा और अपार्थाइड जैसी व्यवस्था को मजबूत करेगा। हालांकि, आलोचना करने वाले इन देशों में से अधिकांश खुद अपने यहां मृत्युदंड का इस्तेमाल करते हैं। खासतौर पर सऊदी अरब ने 2025 में रिकॉर्ड 356 लोगों को फांसी दी थी, जो एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है।
इजरायल ने सोमवार को पास किया था कानून
दरअसल, इजरायल की संसद (नैसेट) ने सोमवार देर रात इस विवादास्पद कानून को पास कर दिया। इसके तहत वेस्ट बैंक की सैन्य अदालतों में 'आतंकवाद के कृत्यों' के रूप में वर्गीकृत घातक हमलों के दोषी पाए गए फिलिस्तीनियों को डिफॉल्ट सजा के रूप में फांसी का प्रावधान है। इस कानून की संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने भी आलोचना की है, जबकि अमेरिका ने इजरायल के अपने कानून बनाने के संप्रभु अधिकार का समर्थन किया है।
नए कानून के अनुसार, वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों पर सैन्य अदालतों में मुकदमा चलाया जाता है, इसलिए यह व्यवस्था उनके लिए एक अलग और कठोर कानूनी रास्ता तैयार करती है। वहीं, इजरायली नागरिक अदालतों में राज्य के अस्तित्व को नकारने के इरादे से हत्या करने वाले दोषियों को मौत या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
बता दें कि इजरायल ने अब तक केवल दो बार मौत की सजा दी है। 1948 में एक सैन्य अधिकारी को राजद्रोह के आरोप में और 1962 में नाजी युद्ध अपराधी एडॉल्फ आइचमैन को। नया कानून 1967 से इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में लागू होगा। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद से क्षेत्र में हिंसा में भारी वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप गाजा युद्ध शुरू हुआ था।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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