ईरान युद्ध के बीच MBS और पुतिन के बीच हाई-लेवल की बातचीत; क्या हुआ तय?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच गुरुवार को टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा के बढ़ते खतरों पर विस्तार से चर्चा की।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच गुरुवार को टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा के बढ़ते खतरों पर विस्तार से चर्चा की। सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी (SPA) ने इसकी पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि बातचीत में दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। हालांकि, बातचीत के दौरान कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के समाप्त होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। इस बीच रूस ने मध्यस्थता की पेशकश की है। मॉस्को का यह कदम क्षेत्रीय शत्रुता को जल्द खत्म करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आह्वान के बाद सामने आया है। सरकारी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स के हवाले से पता चला है कि पुतिन ने कहा कि वे क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं और मॉस्को क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद करने को पूरी तरह तैयार है।
वहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि राष्ट्रपति पुतिन बढ़ते संघर्ष के बीच क्षेत्रीय नेताओं के साथ अपने संपर्क जारी रखे हुए हैं। पेस्कोव ने कहा कि राष्ट्रपति इन संपर्कों को बनाए हुए हैं। यदि किसी भी रूप में हमारी सेवाओं की जरूरत पड़ी, तो हम निश्चित रूप से अपना योगदान देंगे ताकि सैन्य स्थिति जल्द से जल्द शांतिपूर्ण रास्ते पर आ सके।
ईरान ने युद्धविराम के लिए रखीं चार प्रमुख मांगें
इस बीच, रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली ने TASS समाचार एजेंसी से बात करते हुए अमेरिका और इजरायल से क्षेत्र में स्थायी शांति बहाल करने के लिए ईरान की चार प्रमुख शर्तें बताईं। राजदूत जलाली के अनुसार...
- आक्रामकता और आतंकवादी हमलों की निश्चित एवं पूर्ण समाप्ति
- किसी भी प्रकार की आक्रामकता या युद्ध की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए विश्वसनीय गारंटी
- भौतिक एवं नैतिक क्षति के लिए पूर्ण मुआवजा
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से होर्मुज में ईरान के कानूनी अधिकार क्षेत्र का सम्मान करना
ये मांगें ईरानी सरकार और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 15 सूत्री शांति योजना को 'अत्यधिक' बताकर खारिज करने के बाद आई हैं। राजदूत जलाली ने कहा कि ईरान संघर्ष समाप्त करने के लिए रचनात्मक राजनयिक प्रयासों के प्रति खुला है, लेकिन किसी भी युद्धविराम या शांति प्रस्ताव में 'जमीनी हकीकतों' को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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