तनाव के बीच इजरायल का बड़ा फैसला, बदल जाएगा वेस्ट बैंक का नक्शा, क्या है राज्य संपत्ति?

Feb 16, 2026 02:49 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के बीच इजरायली कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक और विवादास्पद फैसला लिया है। 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद पहली बार वेस्ट बैंक में भूमि पंजीकरण और स्वामित्व निपटान की प्रक्रिया फिर से शुरू करने को मंजूरी दे दी गई है।

तनाव के बीच इजरायल का बड़ा फैसला, बदल जाएगा वेस्ट बैंक का नक्शा, क्या है राज्य संपत्ति?

इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के बीच इजरायली कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक और विवादास्पद फैसला लिया है। 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद पहली बार वेस्ट बैंक (खासकर एरिया सी) में भूमि पंजीकरण और स्वामित्व निपटान की प्रक्रिया फिर से शुरू करने को मंजूरी दे दी गई है। इस कदम से बड़े क्षेत्रों को राज्य संपत्ति (State Land) घोषित किया जा सकता है, अगर फिलिस्तीनी मालिक स्वामित्व साबित करने वाले दस्तावेज पेश नहीं कर पाते। यह प्रस्ताव धुर दक्षिणपंथी वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच, न्याय मंत्री यारिव लेविन और रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ द्वारा पेश किया गया था। स्मोट्रिच ने इसे 'बस्ती क्रांति' और पूरे क्षेत्र पर इजरायली नियंत्रण मजबूत करने की 'क्रांति' का हिस्सा बताया है।

नए प्रस्ताव में क्या प्रावधान हैं?

इस प्रस्ताव के तहत इजरायल कब्जे वाले वेस्ट बैंक में भूमि स्वामित्व के निपटान (Settlement Of Land Title) की प्रक्रिया को फिर से शुरू करेगा। यह प्रक्रिया 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद से रुकी हुई थी। प्रक्रिया शुरू होने पर भूमि पर दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति को अपने स्वामित्व को साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज पेश करने होंगे। अगर फिलिस्तीनी दस्तावेज पेश करने में असफल रहते हैं, तो नए प्रस्ताव के तहत इजरायल को उस भूमि को 'राज्य की संपत्ति' के रूप में अपने नियंत्रण में लेने का अधिकार मिल जाएगा।

यह प्रस्ताव मुख्य रूप से वेस्ट बैंक के एरिया सी पर केंद्रित है, जो पूरी तरह से इजरायली सेना के नियंत्रण में है। वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी भूमि का अधिकांश हिस्सा महंगी कानूनी प्रक्रियाओं के कारण या युद्ध/कब्जे के दौरान दस्तावेजों के खो जाने के कारण कभी पंजीकृत नहीं हो पाया। अनुमान है कि इस क्षेत्र में 3 लाख से अधिक फिलिस्तीनी रहते हैं, और आसपास के समुदायों में कई और लोग इसकी कृषि व चरागाह भूमि पर निर्भर हैं। कई परिवारों के पास दशकों पुराने भूमि दस्तावेज या कर रिकॉर्ड हैं।

प्रस्ताव की कड़ी निंदा

फिलिस्तीन, मिस्र और कतर ने इस प्रस्ताव की कड़ी निंदा की है और इसे 'वास्तविक विलय' करार दिया है। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे 'गंभीर तनाव बढ़ाने वाला और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन' बताया है। फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने कहा कि यह कदम वेस्ट बैंक के 'वास्तविक विलय' के समान है। इजरायली बस्ती-विरोधी समूह पीस नाउ ने इसे फिलिस्तीनियों से 'बड़े पैमाने पर भूमि हड़पने' का प्रयास बताया है।

पीस नाउ के सेटलमेंट वॉच कार्यक्रम की निदेशक हागित ओफ्रान ने कहा कि यह कदम बहुत नाटकीय है और इससे राज्य को एरिया सी के लगभग पूरे हिस्से पर नियंत्रण मिल सकता है। ओफ्रान ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि फिलिस्तीनियों को स्वामित्व साबित करने के लिए कहा जाएगा, जो वे शायद कभी नहीं कर पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि इससे इजरायल एरिया सी के 83 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर सकता है, जो वेस्ट बैंक का लगभग आधा हिस्सा है।

यहूदीकरण करने का प्रयास

वहीं, फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास ने भी इस कदम की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन बताया। हमास ने इसे कब्जे वाले वेस्ट बैंक में जमीनों को हड़पने और उन्हें तथाकथित 'राज्य भूमि' के रूप में पंजीकृत कर यहूदीकरण करने का प्रयास कहा है।

मिस्र और कतर ने भी इस कार्रवाई की निंदा की। कतर के विदेश मंत्रालय ने वेस्ट बैंक की भूमि को तथाकथित 'राज्य संपत्ति' में बदलने के फैसले की निंदा करते हुए कहा कि इससे फिलिस्तीनी लोगों को उनके अधिकारों से वंचित किया जाएगा। वहीं, मिस्र सरकार ने एक बयान में इजरायली प्रस्ताव को कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर इजरायली नियंत्रण को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया खतरनाक कदम बताया है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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