बर्बर हैं ईरानी नेता...नहीं होगा शांति समझौता; तेहरान को लेकर नेतन्याहू का कड़ा संदेश
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया कि तेहरान के अधिकारियों के साथ कोई शांति समझौता संभव नहीं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात का जिक्र करते हुए ईरानी नेताओं को बर्बर करार दिया और कूटनीतिक रास्ते को पूरी तरह खारिज कर दिया।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने ईरान के साथ किसी भी शांति समझौते की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने तेहरान के नेताओं और अधिकारियों को 'बर्बर' करार दिया और कहा कि उनके साथ राजनयिक समझौता संभव नहीं है।
न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हालिया मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने ईरान के साथ कूटनीति की संभावना पर चर्चा की। इस दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि मुझे संदेह है कि उस समूह, उन बर्बर लोगों के साथ कोई समझौता हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मैं आपको बताता हूं कि कोई समझौता संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने ट्रंप के आर्थिक दबाव अभियान की सराहना की।
अमेरिका का ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा
बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को विभिन्न देशों को चेतावनी दी कि वे ईरान के साथ व्यापारिक संबंध तुरंत तोड़ दें, अन्यथा द्वितीयक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसे ईरान के वैश्विक वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ 'आर्थिक हमला' बताया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेसेंट ने कहा कि हम स्थिति को स्थिर करना और सुधार का समय देना चाहते हैं, लेकिन सभी को पता होना चाहिए कि यह प्रक्रिया बहुत तेजी से आगे बढ़ेगी और हम इस मामले में गंभीर हैं। चीन कई वर्षों से ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सितंबर के अंत में वाशिंगटन में मुलाकात निर्धारित है।
युद्ध के बाद का अनिश्चित परिदृश्य
ईरान के साथ महीनों से चले युद्ध के बाद इजरायल एक अनिश्चित रणनीतिक स्थिति का सामना कर रहा है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले किए थे, जिनमें तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली हितों पर हमले तेज कर दिए तथा होर्मुज पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर लिया।
तेल अवीव स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन संस्थान के ईरान विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविच ने कहा कि ईरान के संबंध में इजरायली रणनीति एक बड़ी विफलता साबित हुई है। परिचालन स्तर पर उपलब्धियां मिलीं, लेकिन रणनीतिक रूप से हम असफल रहे। नेतन्याहू ने 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा किए गए परमाणु समझौते को भी पहले खारिज कर चुके हैं।


