
ईरान ने अमेरिका को बता दिया तेहरान का प्लान, वाशिंगटन में बैठे ट्रंप अब क्या करेंगे?
Iran US Tension Latest Update: ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान के संविधान में निहित सिद्धांतों के अनुरूप इस्लामी गणराज्य शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को स्वीकार करता है और कानून के दायरे में जनता की वैध मांगों को पूरा करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ता।
तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों के उन बयानों की कड़ी निंदा की है, जिन्हें वह ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेपपूर्ण और भ्रामक करार देता है। ईरान का कहना है कि ये टिप्पणियां वाशिंगटन की लंबे समय से चली आ रही शत्रुता का हिस्सा हैं, जिनका मकसद देश में अशांति और हिंसा भड़काना है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में साफ-साफ कहा कि ऐसे रुख ईरानी जनता के प्रति चिंता से प्रेरित नहीं हैं, बल्कि ईरान के आंतरिक मामलों में अधिकतम दबाव, धमकियों और हस्तक्षेप की नीति का हिस्सा हैं, जिनका मकसद हिंसा तथा आतंकवाद को उकसाना और ईरान में अशांति तथा असुरक्षा पैदा करना है।
घरेलू हालात पर बोलते हुए मंत्रालय ने कहा कि ईरान के संविधान में निहित सिद्धांतों के अनुरूप इस्लामी गणराज्य शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को स्वीकार करता है और कानून के दायरे में जनता की वैध मांगों को पूरा करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ता। इसमें जोर दिया गया कि विदेश मंत्रालय आर्थिक कठिनाइयों को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाने के महत्व पर बल देता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इन समस्याओं का बड़ा हिस्सा अमेरिका द्वारा ईरानी राष्ट्र के खिलाफ अवैध तथा अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों से छेड़े गए पूर्ण आर्थिक एवं वित्तीय युद्ध से उत्पन्न होता है।
बयान में आगे कहा गया है कि अमेरिकी सरकार आज ईरान के खिलाफ जो कुछ कर रही है, वह सिर्फ आर्थिक युद्ध नहीं है; बल्कि यह मनोवैज्ञानिक युद्ध, झूठी सूचनाएं फैलाने का मीडिया अभियान, सैन्य हस्तक्षेप की धमकियां तथा हिंसा और आतंकवाद को भड़काने का संयोजन है। इन कार्रवाइयों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनिवार्य नियमों तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार व्यवस्था की मूल नींव के स्पष्ट उल्लंघन के रूप में चिह्नित किया गया।
इस दौरान विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की ईरान-विरोधी दुश्मनी और हस्तक्षेप के लंबे इतिहास का जिक्र किया, जिसमें 1953 का तख्तापलट, इराक युद्ध में बाथवादी शासन का समर्थन, जून 2025 के हमले में जायोनी शासन की भागीदारी और अवैध प्रतिबंध शामिल हैं। मंत्रालय ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अमेरिका के एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों की अवैध व अमानवीय प्रकृति पर ध्यान दे, क्योंकि ये ईरानियों के मानवाधिकार, आजीविका और दैनिक जीवन को सीधे निशाना बनाते हैं तथा मानवता के खिलाफ अपराध हैं।
सीएनएन के अनुसार, यब बयान ईरान में घातक प्रदर्शनों के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्तक्षेप की धमकी दिए जाने के बाद बढ़ते तनाव के बीच आई हैं, जहां वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर वाशिंगटन हस्तक्षेप करता है तो क्षेत्र में अमेरिकी बलों को निशाना बनाया जा सकता है। शुक्रवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने संभावित अमेरिकी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाता है और उन्हें बेरहमी से मारता है, जो उसकी आदत है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। इसके लिए हम पूरी तरह तैयार हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने शनिवार को कहा कि ईरान दबाव के आगे नहीं झुकेगा उन्होंने कहा कि हम उनके सामने नहीं झुकेंगे। ईश्वर पर भरोसा और जनता के समर्थन पर विश्वास रखते हुए, हम दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे।

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