फारस की खाड़ी में उतरने की हिम्मत दिखाओ; ईरान का अमेरिका को ओपन चैलेंज, असेप्ट करेंगे ट्रंप?
आईआरजीसी के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने कहा कि अब तक युद्ध में इस्तेमाल की गई मिसाइलें कम से कम 10 साल पुरानी हैं। उन्होंने कहा कि अगर दुश्मन हमारी नौसेना को नष्ट करने का दावा करता है, तो वे अपने युद्धपोतों को फारस की खाड़ी में लाने की हिम्मत करें।
ईरान-अमेरिका युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से और बढ़ रहा है। अमेरिका के सबसे उन्नत विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड को क्षेत्र में तैनात किया गया है, जिसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी जारी की है। आईआरजीसी के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने प्रेस टीवी को दिए बयान में कहा कि अब तक युद्ध में इस्तेमाल की गई मिसाइलें कम से कम 10 साल पुरानी हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल जून में अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बाद विकसित नए हथियारों का जखीरा अभी तक तैनात नहीं किया गया है।
नैनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के पूर्ण नियंत्रण की बात दोहराते हुए कहा कि अगर दुश्मन हमारी नौसेना को नष्ट करने का दावा करता है, तो वे अपने युद्धपोतों को फारस की खाड़ी में लाने की हिम्मत करें। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार कह चुके हैं कि ईरान की सेना को तबाह कर दिया है। नौसेना अब किसी काम के नहीं हैं। ऐसे में नैनी का नया बयान राष्ट्रपति ट्रंप को जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही इसे ओपन चैलेंज भी बताया जा रहा है।
बता दें कि ईरान युद्ध शुरू होने के साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो विश्व के लगभग एक-पांचवें हिस्से के कच्चे तेल परिवहन का प्रमुख मार्ग है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट को दूर करने के लिए सात देशों से संपर्क किया और उन्हें जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने का आग्रह किया, लेकिन जापान और ऑस्ट्रेलिया ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया है।
गौरतलब है कि शनिवार को ईरान ने यूएई में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों, बंदरगाहों और डॉकों को वैध सैन्य लक्ष्य घोषित किया। फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि फुजैरा, जेबेल अली और पोर्ट खलीफा जैसे प्रमुख बंदरगाह अमेरिकी सैन्य बलों की मौजूदगी के कारण लक्ष्य बने हुए हैं। कुछ घंटों बाद ही फुजैरा में एक ड्रोन हमले से पेट्रोकेमिकल परिसर में भीषण आग लग गई, जिसके कारण तेल लोडिंग कार्यवाही अस्थायी रूप से रोक दी गई। यह हमला होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर यूएई के एकमात्र वैकल्पिक निर्यात मार्ग पर हुआ है।
बता दें कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। संकट का कोई तत्काल समाधान नजर नहीं आ रहा है, जबकि दोनों पक्षों से लगातार नई चेतावनियां जारी हो रही हैं, जिस कारण तनाव बढ़ता जा रहा है। अब ईरान की नई धमकी का जवाब अमेरिका कैसे देता है, इस पर सबकी नजर है।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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