शांति का नोबेल फिर भी जेल; ईरान ने नरगिस मोहम्मदी को दी 6 साल कैद की सजा

Feb 08, 2026 10:21 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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ईरान की एक अदालत ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को छह साल की जेल की सजा सुनाई है। उनके वकील मुस्तफा नीली ने बताया कि यह सजा अपराध करने के लिए साजिश रचने और इकट्ठा होने के आरोप में दी गई है।

शांति का नोबेल फिर भी जेल; ईरान ने नरगिस मोहम्मदी को दी 6 साल कैद की सजा

ईरान की एक अदालत ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को छह साल की जेल की सजा सुनाई है। उनके वकील मुस्तफा नीली ने रविवार ( 8 फरवरी ) को बताया कि यह सजा 'अपराध करने के लिए साजिश रचने और इकट्ठा होने' के आरोप में दी गई है। साथ ही, उन्हें दो साल के लिए देश छोड़ने पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया है। इसके अलावा, प्रचार गतिविधियों (Propaganda Activities) के लिए डेढ़ साल की अतिरिक्त जेल सजा सुनाई गई है, जिससे कुल सजा सात साल से अधिक हो जाती है। उन्हें दो साल के लिए दक्षिण खोरासान प्रांत के पूर्वी शहर खोसफ में निर्वासित भी किया जाएगा।

ईरानी कानून के अनुसार, जेल की सजाएं एक साथ चलती हैं, इसलिए सबसे लंबी सजा प्रभावी मानी जाएगी है। हालांकि वकील ने कहा कि यह फैसला अंतिम नहीं है और अपील की जा सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मोहम्मदी की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं (जिनमें हाल ही में ट्यूमर हटाने और हड्डी प्रत्यारोपण शामिल हैं) के कारण उन्हें इलाज के लिए अस्थायी जमानत पर रिहा किया जा सकता है।

53 वर्षीय नरगिस मोहम्मदी पिछले 25 वर्षों से ईरान में मृत्युदंड के खिलाफ, महिलाओं के अनिवार्य हिजाब/ड्रेस कोड के विरुद्ध और राजनीतिक कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। इस दौरान उन्हें बार-बार गिरफ्तार किया गया, कुल 31 साल से अधिक की जेल और 154 कोड़ों की सजा सुनाई जा चुकी है, हालांकि कोड़े की सजा अभी लागू नहीं हुए हैं। उन्होंने पिछले एक दशक का अधिकांश समय जेल में बिताया और 2015 से अपने जुड़वां बच्चों (जो पेरिस में रहते हैं) से नहीं मिल पाई हैं।

दिसंबर 2024 में स्वास्थ्य कारणों से उन्हें कुछ समय के लिए रिहा किया गया था, लेकिन हाल ही में (दिसंबर 2025) एक मानवाधिकार वकील की शोक सभा में शामिल होने पर उन्हें फिर हिंसक तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में भी वे चुप नहीं रहीं। फरवरी 2026 की शुरुआत में उन्होंने भूख हड़ताल शुरू की, ताकि अपनी 'गैरकानूनी हिरासत' और राजनीतिक कैदियों की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित किया जा सके।

बता दें कि 2023 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। मुख्य रूप से ईरान में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार, मृत्युदंड और राजनीतिक दमन के खिलाफ उनके अभियान के लिए दिया गया था। पुरस्कार ग्रहण करने उनकी ओर से उनके बच्चे गए थे, क्योंकि वह उस समय जेल में थीं। एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईरान (चीन को छोड़कर) किसी भी अन्य देश की तुलना में प्रति वर्ष सबसे अधिक लोगों को फांसी देता है, हालांकि चीन के विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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