
तेहरान की ताकत 'ना' कहने में है; अमेरिका से बातचीत के बीच ईरान, अब आगे क्या?
अराघची ने कहा कि मेरा मानना है कि ईरान के इस्लामी गणराज्य की शक्ति का रहस्य दूसरों के दबाव, प्रभुत्व और धमकियों का सामना करने की उसकी क्षमता में है। उन्होंने कहा कि वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
अमेरिका और ईरान की बीच बातचीत चल रही है, ताकि मध्य पूर्व में शांति बनी रहे। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि तेहरान की असली शक्ति महान शक्तियों को 'ना' कहने की उसकी क्षमता में छिपी है। यह बयान अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम पर अप्रत्यक्ष वार्ता के ठीक बाद आया, जब ईरान घरेलू विरोध प्रदर्शनों और क्षेत्रीय तनाव से जूझ रहा है। अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। हमारा परमाणु बम बड़ी शक्तियों को 'ना' कहने की ताकत है।
क्या बोले ईरान के विदेश मंत्री?
तेहरान में राजनयिकों के एक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया कि ईरान यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता पर अडिग रहेगा। अराघची ने कहा कि मेरा मानना है कि ईरान के इस्लामी गणराज्य की शक्ति का रहस्य दूसरों के दबाव, प्रभुत्व और धमकियों का सामना करने की उसकी क्षमता में है। उन्होंने आगे कहा कि वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। हमारा परमाणु बम बड़ी शक्तियों को 'ना' कहने की शक्ति है। इस्लामी गणराज्य की शक्ति का रहस्य शक्तियों को 'ना' कहने की शक्ति में निहित है। बता दें कि यह मुद्दा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रमुख विवाद का केंद्र रहा है, जिनके कार्यकाल में जून 2025 में 12 दिवसीय ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की गई थी।
हालांकि ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता आ रहा है, लेकिन पश्चिमी देश और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का कहना है कि तेहरान 2003 तक परमाणु बम बनाने के लिए एक संगठित सैन्य कार्यक्रम चला रहा था। ईरान 60% शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा है, जो हथियार-ग्रेड 90% तक पहुंचने का एक छोटा तकनीकी कदम है। ऐसा करने वाला ईरान एकमात्र गैर-परमाणु हथियार वाला देश है। हाल के वर्षों में ईरानी अधिकारियों ने धमकी दी है कि इस्लामी गणराज्य बम बनाने की कोशिश कर सकता है, जबकि उसके राजनयिक सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के फतवे (धार्मिक फरमान) का हवाला देते हैं, जिसमें बम बनाने को प्रतिबंधित बताया गया है।
शनिवार को क्या बोले थे अब्बास अराघची?
इससे पहले शनिवार को विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जजीरा को दिए साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का मिसाइल कार्यक्रम 'कभी विचार-विमर्श का विषय नहीं' था। यह बयान उनके टेलीग्राम चैनल पर फारसी में साझा की गई। शुक्रवार को हुई वार्ता ( जो पूरी तरह ईरान के परमाणु मुद्दे पर केंद्रित थी) पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने इसे एक अच्छी 'शुरुआत' बताया, लेकिन विश्वास बहाली के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
बता दें कि पिछले महीनों में अमेरिका ने ईरान से मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की है, जिसे तेहरान ने सख्ती से खारिज किया है। अराघची ने कहा कि मिसाइल कार्यक्रम पर कभी समझौता नहीं हो सकता, क्योंकि यह रक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी नीति में यह दृष्टिकोण दिखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने पिछले जून में परमाणु केंद्रों पर बमबारी के बावजूद ईरान की परमाणु क्षमताओं को नष्ट नहीं किया। उन्होंने यूरेनियम संवर्धन जारी रखने के ईरान के 'अविभाज्य' अधिकार पर जोर दिया। संभावित अमेरिकी हमले पर अराघची ने कहा कि ईरान के लिए अमेरिकी मुख्य भूमि पर हमला संभव नहीं होगा, लेकिन वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है।

लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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